भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने यह भी कहा है कि कंपनी यदि दो डिफॉल्टिंग तिमाहियों के बीच एक तिमाही मानक पर खरा उतर जाती है, तो जुर्माना राशि फिर से एक लाख रुपये हो जाएगी.
भारत में कॉल ड्राप की समस्या काफी ज्यादा बढ़ गई है. इस समस्या की ओर केवल आम आदमी का ध्यान गया है बल्कि देश के प्रधानमंत्री ने भी कॉल ड्राप को एक बड़ी समस्या माना है और प्रधानमंत्री ने इस समस्या के बारे में एक बयान भी जारी किया था जिसके बाद भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने सभी टेलीकॉम ओपरेटर्स को इस समस्या का समाधान निकलने के लिए कहा था. अब इस बारे में ट्राई ने और भी सख्त रुख अपनाया है. दरअसल कॉल ड्रॉप की समस्या के बीच सरकार ने गुरुवार को खराब सेवा के लिए कंपनियों पर लगाया जाने वाले जुर्माने को विनियामक द्वारा घोषित नए नियमों के तहत दोगुना कर दिया.
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इस बारे में भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने अपने वेबसाइट पर नए नियम जारी किए हैं, जिसमें बताया गया है कि कंपनियों पर किसी भी एक तिमाही में मानक का पहली बार अनुपालन नहीं करने पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाया जाएगा, जिसके लिए पहले 50 हजार रुपये जुर्माना था.
कंपनियों की सेवा को लगभग 15 मानकों पर परखा जाता है, जो तकनीकी और ग्राहक सेवा दो प्रमुख श्रेणियों में बंटे होते हैं. इसके साथ ही भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने कहा कि एक ही मानक पर लगातार दो या अधिक तिमाही खरा नहीं उतरने पर जुर्माना राशि डेढ़ लाख रुपये हो जाएगी और उसके बाद हर तिमाही जुर्माना राशि दो लाख रुपये तक ली जा सकती है.
इसके अलावा भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने यह भी कहा है कि कंपनी यदि दो डिफॉल्टिंग तिमाहियों के बीच एक तिमाही मानक पर खरा उतर जाती है, तो जुर्माना राशि फिर से एक लाख रुपये हो जाएगी.