AI से आवाज की हूबहू नकल..कॉल पर भाई समझ ट्रांसफर कर दिए 97,500 रुपये, बाद में समझ में आई ठगी, इंदौर में पहला मामला

AI से आवाज की हूबहू नकल..कॉल पर भाई समझ ट्रांसफर कर दिए 97,500 रुपये, बाद में समझ में आई ठगी, इंदौर में पहला मामला

AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पावर्ड फ्रॉड के एक चौंकाने वाले मामले में, इंदौर के स्कैमर्स ने कथित तौर पर एक टीचर के कजिन की आवाज को क्लोन करने के लिए AI का यूज किया और उसे 1 लाख रुपये ट्रांसफर करने के लिए धोखा दिया. पुलिस का मानना है कि यह मध्य प्रदेश का AI-ड्रिवन वॉयस-मॉड्यूलेशन फ्रॉड का पहला कन्फर्म केस हो सकता है. इंदौर की रहने वाली एक स्कूल टीचर ने एडवांस टेक्नोलॉजी के झांसे में आकर अपनी गाढ़ी कमाई खो दी. स्कैमर्स ने इतनी सफाई से उनके कजिन की आवाज निकाली कि उन्हें जरा भी शक नहीं हुआ.

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रात के खाने के समय आया फर्जी कॉल

विक्टिम की पहचान स्मिता के रूप में हुई है, इंदौर में रहने वाली एक मिडिल-एज्ड स्कूल टीचर हैं. उन्होंने अपने कजिन से, जो UP पुलिस की इमरजेंसी डायल सर्विस के लिए काम करता है, आखिरी बार लगभग दो साल पहले बात की थी. जनवरी 6 की रात, जब स्मिता अपनी फैमिली के साथ डिनर कर रही थीं, उन्हें एक अननोन नंबर से कॉल आया जो उनके कजिन के फोन नंबर से काफी मिलता-जुलता था.

कॉलर ने दावा किया कि वह उनका कजिन बोल रहा है और कहा कि उसके एक फ्रेंड को हार्ट अटैक आया है और उसे इंदौर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में अर्जेंट सर्जरी की जरूरत है. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, आवाज इतनी मिलती-जुलती थी कि स्मिता को कोई शक नहीं हुआ.

QR कोड्स और ट्रांजेक्शन का खेल

फ्रॉडस्टर ने उन्हें QR codes भेजे और रिक्वेस्ट की कि वह उसकी ओर से मनी ट्रांसफर कर दें. जानी-पहचानी आवाज और डिटेल्स पर भरोसा करते हुए, स्मिता ने चार ट्रांजेक्शन में 97,500 रुपये ट्रांसफर कर दिए. जब उन्होंने वापस कॉल करने की कोशिश की, तो नंबर ब्लॉक्ड था. अगली सुबह, जब उन्होंने अपने असली कजिन से बात की, तो उसने कॉल करने से साफ इनकार कर दिया. इसके बाद स्मिता ने तुरंत पुलिस स्टेशन में कंप्लेंट दर्ज कराई.

एडिशनल डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम) राजेश दंडोतिया ने कहा, “एक टीचर को किसी ऐसे व्यक्ति का कॉल आया जिसने उनके कजिन होने का दावा किया. उसने QR codes भेजे और इमीडिएट पेमेंट के लिए कहा. 30,000 रुपये के तीन और 7,500 रुपये का एक ट्रांजेक्शन हुआ. जब उन्होंने वापस कॉल किया, तो उन्हें ब्लॉक कर दिया गया था. आवाज बिल्कुल उनके कजिन जैसी थी. यह AI-बेस्ड वॉयस मॉड्यूलेशन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की ओर स्ट्रॉन्गली इंडिकेट करता है.”

MP में साइबर क्राइम और रिकवरी का सच

जहां डिजिटल फ्रॉड के केसेस लगातार बढ़ रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश पिछले चार सालों में साइबर क्राइम में खोए गए पैसे का 0.2% से भी कम रिकवर कर पाया है. विधानसभा में होम डिपार्टमेंट द्वारा डिस्क्लोज किए गए डेटा के अनुसार, नागरिकों ने 1 मई 2021 और 13 जुलाई, 2025 के बीच साइबर फ्रॉड में 1,054 करोड़ रुपये से अधिक खो दिए, लेकिन केवल 1.94 करोड़ रुपये, या 0.18% ही विक्टिम्स को वापस मिले.

इस पीरियड के दौरान, सस्पिशियस अकाउंट्स में 105 करोड़ रुपये से अधिक अस्थायी रूप से फ्रीज किए गए थे, लेकिन उसका केवल एक छोटा हिस्सा ही रिकवर किया गया. कुल 1,193 FIRs रजिस्टर की गईं, फिर भी चार्जशीट केवल 585 मामलों में फाइल की गईं.

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Sudhanshu Shubham

Sudhanshu Shubham

सुधांशु शुभम मीडिया में लगभग आधे दशक से सक्रिय हैं. टाइम्स नेटवर्क में आने से पहले वह न्यूज 18 और आजतक जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक में रूचि होने की वजह से आप टेक्नोलॉजी पर इनसे लंबी बात कर सकते हैं. View Full Profile

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