WhatsApp ला रहा है ‘सेकेंडरी अकाउंट’ फीचर, मां-पिता तय करेंगे बच्चे किससे करेंगे बात! जानें कैसे करेगा काम

WhatsApp ला रहा है ‘सेकेंडरी अकाउंट’ फीचर, मां-पिता तय करेंगे बच्चे किससे करेंगे बात! जानें कैसे करेगा काम

क्या आप भी इस बात से परेशान हैं कि आपका बच्चा WhatsApp पर किससे बातें कर रहा है या उसे कौन मैसेज भेज रहा है? डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है. लेकिन अब, WhatsApp माता-पिता को एक ‘सुपरपावर’ देने जा रहा है. गूगल प्ले बीटा प्रोग्राम के जरिए आए नए अपडेट (वर्जन 2.26.1.30) में एक ऐसे फीचर का खुलासा हुआ है जो पेरेंट्स को अपने बच्चों के WhatsApp अकाउंट को मैनेज करने का पावर देगा.

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यह नया ‘सेकेंडरी अकाउंट’ (Secondary Account) सिस्टम न केवल बच्चों को अनचाहे कॉन्टैक्ट्स से बचाएगा, बल्कि उनकी निजता का भी सम्मान करेगा. आइए जानते हैं कि यह फीचर कैसे काम करेगा और माता-पिता को क्या-क्या कंट्रोल मिलेंगे.

WhatsApp का नया फीचर

WhatsApp एक ऐसा सिस्टम तैयार कर रहा है जहां दो तरह के अकाउंट होंगे.

  • प्राइमरी अकाउंट (Primary): यह माता-पिता या अभिभावक का अकाउंट होगा.
  • सेकेंडरी अकाउंट (Secondary): यह बच्चे या नाबालिग का अकाउंट होगा, जिसमें सीमित सुविधाएं (Limited Features) होंगी.
  • लिंकिंग: बच्चे के सेकेंडरी अकाउंट को माता-पिता के प्राइमरी अकाउंट से एक विशेष ‘डेडिकेटेड कनेक्शन’ के जरिए जोड़ा जाएगा.

माता-पिता के पास क्या कंट्रोल होगा?

लिंक होने के बाद, माता-पिता को कई प्राइवेसी-संबंधित विकल्प मिलेंगे.

कॉन्टैक्ट कंट्रोल: माता-पिता यह तय कर सकेंगे कि उनके बच्चे के अकाउंट पर कौन मैसेज या कॉल कर सकता है. यह अजनबियों और अनचाहे लोगों (Unsolicited Contact) को बच्चों तक पहुंचने से रोकने में मदद करेगा.

एक्टिविटी अपडेट: सेकेंडरी अकाउंट की गतिविधियों की रिपोर्ट मेन अकाउंट के साथ साझा की जाएगी. माता-पिता देख सकेंगे कि अकाउंट में क्या बदलाव हो रहे हैं.

क्या माता-पिता बच्चों की चैट पढ़ सकेंगे?

यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है. इसका जवाब है-नहीं.

एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन: WhatsApp ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और निजता से समझौता नहीं किया जाएगा. माता-पिता को ‘एक्टिविटी अपडेट’ तो मिलेंगे, लेकिन रिपोर्ट में मैसेज का कंटेंट (Message Content) शामिल नहीं होगा. यह फीचर सुरक्षा और निजता के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाता है-माता-पिता को पता होगा कि ‘कौन’ संपर्क कर रहा है, लेकिन ‘क्या’ बात हो रही है, यह सीक्रेट रहेगा.

उम्र की सीमा और नियम

WhatsApp की सेवा शर्तों (Terms of Service) के अनुसार, अकाउंट बनाने के लिए यूजर की एक निश्चित आयु होनी चाहिए. आमतौर पर यह 13 वर्ष है, लेकिन स्थानीय कानूनों के हिसाब से अलग-अलग देशों में यह ज्यादा भी हो सकती है. कानूनी सहमति की उम्र से कम के नाबालिग खुद शर्तों को स्वीकार नहीं कर सकते. ऐसे मामलों में, अब माता-पिता या कानूनी अभिभावक नाबालिग की ओर से अप्रूवल दे सकेंगे.

यह क्यों जरूरी है?

आजकल ऑनलाइन स्कैम और साइबर बुलिंग के मामले बढ़ रहे हैं. यह फीचर सुनिश्चित करेगा कि बच्चे WhatsApp का इस्तेमाल सुरक्षित तरीके से करें और माता-पिता को यह तसल्ली रहे कि उनका बच्चा किसी गलत संगत या अनजान व्यक्ति के संपर्क में नहीं है. फिलहाल यह फीचर बीटा टेस्ट में है. एक बार टेस्टिंग पूरी होने जाने के बाद इसको सभी यूजर्स के लिए जारी किया जाएगा.

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सुधांशु शुभम (Sudhanshu Shubham) डिजिटल मीडिया में पिछले 6 साल से सक्रिय हैं. टाइम्स ग्रुप (Times Group) में आने से पहले वह न्यूज18 (News18) और आजतक (Aaj Tak) जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक के अलावा इन्होंने हाइपर लोकल बीट, डेटा एनालिसिस का भी काम किया है. View Full Profile