e-Challan Scam: कानून के नाम पर चल रही ऑनलाइन ठगी की पूरी कहानी

e-Challan Scam: कानून के नाम पर चल रही ऑनलाइन ठगी की पूरी कहानी

भारत में ट्रैफिक व्यवस्था को पारदर्शी और फास्ट बनाने के लिए e-Challan सिस्टम लाया गया था। काग़ज़ी चालानों से छुटकारा मिला, प्रक्रिया आसान हुई और डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिला। लेकिन जैसे-जैसे यह सिस्टम आम लोगों की ज़िंदगी का हिस्सा बना, वैसे-वैसे साइबर अपराधियों ने भी इसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। आज देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग एक ऐसे डिजिटल जाल में फँस रहे हैं, जहाँ कानून और ट्रैफिक पुलिस के नाम पर डर दिखाकर उनसे पैसे और बैंकिंग जानकारी छीनी जा रही है। इसे ही कहा जा रहा है, e-Challan Scam, आइए इसके बारे में डीटेल में जानते हैं कि आखिर ये बला क्या है।

Digit.in Survey
✅ Thank you for completing the survey!

एक मैसेज से शुरू होने वाला खेल

इस स्कैम की शुरुआत किसी कॉल या ऐप डाउनलोड से नहीं होती, बल्कि एक साधारण से दिखने वाले मैसेज से होती है। मैसेज में लिखा होता है कि आपकी गाड़ी पर ट्रैफिक चालान पेंडिंग है, हालांकि, इतने पर ही मैसेज खत्म नहीं होता है, आगे यह भी लिखा होता है कि अगर तुरंत भुगतान नहीं किया गया, तो ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड हो सकता है या कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसे एक घमकी और डराने वाले मैसेज के तौर पर भी देखा जा सकता है। अब शुरू होता है पैसे का खेल- इस स्कैम में चालान की राशि आमतौर पर इतनी कम रखी जाती है कि व्यक्ति बिना ज़्यादा सोचे-समझे पेमेंट कर देता है या मैसेज को पढ़ते ही पेमेंट करने की ठान लेता है। अब यही वह पल है, जब डर और जल्दबाजी आपकी या किसी भी अन्य इंसान की समझ पर हावी हो जाती है, इसी समय आप ग़लती करते हैं और इस गलती का फायदे साइबर अपराधियों को होता है।

असली जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट

अब ये स्कैम एक नए पड़ाव पर आता है और मैसेज या SMS में प्राप्त हुआ लिंक या वेबसाइट जो स्कैम के लिए ही सेट की गई है, आपको लूटने की तैयारी शुरू कर देती है। असल में, इस मैसेज में दिया गया लिंक एक ऐसी वेबसाइट पर ले जाता है जो पहली नज़र में बिल्कुल सरकारी पोर्टल जैसी लगती है, ऐसे में आपको कुछ कुछ भरोसा होता है कि आप सरकारी वेबसाइट पर ही अपने चालान को भर रहे हैं। इस वेबसाइट को तैयार भी इसी तरह से डिजाइन किया जाता है, यहाँ चालान नंबर, उल्लंघन की तारीख, जगह और गाड़ी की डिटेल्स तक दिखाई देती है। सब कुछ इतना विश्वसनीय लगता है कि शक की गुंजाइश कम रह जाती है।

हालांकि, सच्चाई यह है कि इन वेबसाइटों का किसी भी सरकारी डेटाबेस से कोई संबंध नहीं होता। यह सिर्फ एक फिशिंग पेज होता है, जिसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यूज़र अपनी जानकारी खुद ही दर्ज कर दे।

कार्ड से भुगतान की मजबूरी और असली जाल

जैसे ही यूज़र पेमेंट के लिए आगे बढ़ता है, एक अजीब बात सामने आती है, यहाँ न तो UPI पेमेंट का ऑप्शन मिलता है और न ही नेट बैंकिंग सेवा से यहाँ आप चालान का भुगतान कर सकते हैं। यहाँ पेमेंट के लिए केवल और केवल Debit या Credit Card का ही इस्तेमाल किया जा सकता है।

यहीं स्कैम अपने सबसे खतरनाक चरण में प्रवेश करता है। यूज़र से कार्ड नंबर, एक्सपायरी डेट, CVV और कभी-कभी OTP तक मांगा जाता है। कई मामलों में पेमेंट जानबूझकर ‘Failed’ दिखाई जाती है, ताकि यूज़र दोबारा कोशिश करे। हर नई कोशिश के साथ ठगों के पास नई और ज्यादा संवेदनशील जानकारी पहुँच जाती है।

अकेली ठगी नहीं, पूरा नेटवर्क

जांच में सामने आया है कि यही फर्जी ढांचा केवल e-Challan तक सीमित नहीं है। इसी नेटवर्क का इस्तेमाल बैंक अलर्ट, कूरियर डिलीवरी और अन्य सरकारी नोटिस जैसे स्कैम में भी किया जा रहा है। मतलब साफ है, यह किसी एक व्यक्ति का किया हुआ अपराध नहीं, बल्कि एक सोची समझी और संगठित साइबर ठगी का तंत् होता है, जो भरोसे को हथियार बनाकर लोगों को निशाना बना रहा है।

यह भी पढ़ें: आखिर क्या है USSD Code Scam! एक कोड और अकाउंट खाली, 2026 से पहले हैकर्स ने बनाया नया हथकंडा, बचने के उपाय देखें

नकली e-Challan को पहचानना क्यों जरूरी?

इस स्कैम की सबसे बड़ी ताकत यही है कि इसमें कोई वायरस या ऐप नहीं होता, इसलिए सामान्य एंटीवायरस भी इसे पकड़ नहीं पाते। वेबसाइट असली जैसी होती है, राशि छोटी होती है और कानून का नाम सामने होता है। इसी का नतीजा होता है कि लोग बिना किसी जांच पड़ताल के पेमेंट करना ही सही समझते हैं। हालांकि, बाद में बैंक अकाउंट खाली होने की शिकायत सामने आती हैं, और आ रही हैं और अगर सतर्क नहीं हुआ गया तो भविष्य में भी आती रहेंगी। इंटरनेट पर ऐसे बहुत से मामले पड़े हैं जो आपको बताते हैं कि कैसे एक छोटे से मैसेज ने लोगों के जीवन भर की कमाई को एक झटके में खत्म कर दिया।

सही तरीका: असली चालान ऐसे चेक करें

अगर कभी भी आपको ट्रैफिक चालान से जुड़ा कोई मैसेज मिले, तो सबसे सुरक्षित तरीका है खुद जाकर जांच करना। भारत सरकार ने इसके लिए mParivahan ऐप और Parivahan e-Challan पोर्टल उपलब्ध कराया है।

mParivahan ऐप पर आप ऐप डाउनलोड करके लॉग-इन करते हैं, अपनी गाड़ी या ड्राइविंग लाइसेंस नंबर दर्ज करने के बाद ‘View Challan’ ऑप्शन से आप अपने चालान देख सकते हैं। अगर चालान सही है, तो भुगतान भी सुरक्षित तरीके से वहीं किया जा सकता है।

इसी तरह, आप सीधे आधिकारिक वेबसाइट https://echallan.parivahan.gov.in पर जाकर भी चालान नंबर, वाहन नंबर या ड्राइविंग लाइसेंस नंबर डालकर पूरी जानकारी देख सकते हैं और वहीं से पेमेंट भी कर सकते हैं। अगर यह मैसेज सही है तो आपको वह चालान यहाँ पर भी नजर आने वाला है, अगर नहीं है तो आपको किसी भी पेमेंट को करने की या किसी भी लिंक पर क्लिक करने की जरूरत नहीं है। याद रखिए, सरकार कभी भी आपसे OTP, CVV या कार्ड की गोपनीय जानकारी नहीं मांगती। ऐसा कोई भी अनुरोध साफ तौर पर ठगी का संकेत है।

थोड़ी-सी सावधानी, बड़ा बचाव

नकली e-Challan को पहचानना मुश्किल नहीं है, बस ध्यान देने की जरूरत है। अनजान नंबर से आए मैसेज, जरूरत से ज्यादा डर पैदा करने वाली भाषा, या तुरंत पेमेंट करने आदि का दबाव! ये सब खतरे के संकेत हैं। शक होने पर अपने नजदीकी ट्रैफिक पुलिस स्टेशन से संपर्क करना भी एक सुरक्षित रास्ता है।

डिजिटल सिस्टम, डिजिटल समझदारी

e-Challan Scam हमें यह याद दिलाता है कि डिजिटल सिस्टम जितने सुविधाजनक हैं, उतने ही संवेदनशील भी बनते जा रहे हैं। तकनीक हमारे काम को आसान बनाती है, लेकिन अंधा भरोसा हमें कमजोर बना देता है। इस डिजिटल दौर में सबसे बड़ी सुरक्षा कोई ऐप या टूल नहीं, बल्कि जागरूक नागरिक है।

यह भी पढ़ें: बैंक में खड़े हैं पर नहीं है आधार कार्ड की कॉपी.. खड़े-खड़े इन स्टेप्स से चुटकियों में कर लें फोन में डाउनलोड

Ashwani Kumar

Ashwani Kumar

Ashwani Kumar has been the heart of Digit Hindi for nearly nine years, now serving as Senior Editor and leading the Vernac team with passion. He’s known for making complex tech simple and relatable, helping millions discover gadgets, reviews, and news in their own language. Ashwani’s approachable writing and commitment have turned Digit Hindi into a trusted tech haven for regional readers across India, bridging the gap between technology and everyday life. View Full Profile

Digit.in
Logo
Digit.in
Logo