“बदला लेने का समय आ गया है”…ईरान के धार्मिक ऐप पर मैसेज पर आते ही मचा बवाल, 50 लाख से ज्यादा बार है डाउनलोड

“बदला लेने का समय आ गया है”…ईरान के धार्मिक ऐप पर मैसेज पर आते ही मचा बवाल, 50 लाख से ज्यादा बार है डाउनलोड

शनिवार सुबह अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के ठिकानों पर हमलों के साथ ही साइबर गतिविधियों की एक अलग लहर भी देखी गई. विस्फोटों के कुछ ही मिनट बाद ईरान में कई लोगों को अपने फोन पर लगातार नोटिफिकेशन मिलने लगे. ये सरकारी चेतावनी संदेश नहीं थे, बल्कि लोकप्रिय प्रार्थना टाइमिंग ऐप BadeSaba Calendar से आए पुश नोटिफिकेशन थे. इस ऐप के Google Play Store पर 50 लाख से अधिक डाउनलोड बताए जाते हैं.

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WIRED Middle East की रिपोर्ट के अनुसार, ये संदेश तेहरान समयानुसार सुबह 9:52 बजे “Help Has Arrived” वाक्य के साथ शुरू हुए और लगभग 30 मिनट तक लगातार आते रहे. सभी नोटिफिकेशन “Help is on the way” टाइठल से फारसी भाषा में भेजे गए थे.

नोटिफिकेशन में क्या लिखा था?

WIRED Middle East को साझा किए गए स्क्रीनशॉट्स के अनुसार, संदेशों में ईरानी सैन्य कर्मियों से हथियार डालने की अपील की गई थी और उन्हें माफी देने का वादा किया गया था. कुछ मैसेज में सैनिकों से “forces of liberation” से जुड़ने और “अपने भाइयों की रक्षा” करने की अपील की गई.

एक नोटिफिकेशन में लिखा था: “The time for revenge has come.” (बदला लेने का समय आ गया है)

दूसरे संदेश में कहा गया कि शासन की दमनकारी ताकतें निर्दोष लोगों के खिलाफ अपने कार्यों की कीमत चुकाएंगी, और जो लोग ईरानी राष्ट्र की रक्षा में शामिल होंगे उन्हें माफी दी जाएगी.

हैक के पीछे कौन?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने पुष्टि की कि हमलों के समय BadeSaba ऐप यूजर्स को नोटिफिकेशन मिले थे. हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि इस कथित हैक के पीछे कौन था. डिजिटल राइट्स शोधकर्ता नर्गेस केशावरज़निया, जो Miaan Group से जुड़ी हैं, ने कहा कि अभी यह कहना संभव नहीं है कि इसके पीछे इज़राइल था या कोई ईरान-विरोधी समूह. अब तक किसी संगठन ने इन साइबर गतिविधियों की जिम्मेदारी नहीं ली है.

ईरान में इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रभावित

Reuters के अनुसार, ईरान में 0706 GMT पर इंटरनेट कनेक्टिविटी में बड़ी बाधा आई और 1147 GMT पर फिर से गंभीर व्यवधान दर्ज हुआ. Kentik में इंटरनेट विश्लेषण के निदेशक डग मैडोरी ने भी सोशल मीडिया पर इस व्यवधान की पुष्टि की. रिपोर्ट्स में कहा गया कि साइबर ऑपरेशंस ने ईरानी सरकारी सेवाओं और सैन्य लक्ष्यों को भी प्रभावित किया, जिससे संभावित समन्वित प्रतिक्रिया सीमित हो सके.

बढ़ते साइबर खतरे

साइबर सुरक्षा कंपनी Sophos के थ्रेट इंटेलिजेंस निदेशक राफे पिलिंग ने Reuters को बताया कि जैसे-जैसे ईरान अपने विकल्पों पर विचार करेगा, प्रॉक्सी समूहों और हैक्टिविस्ट्स द्वारा इज़राइली या अमेरिकी सैन्य और नागरिक लक्ष्यों पर साइबर हमलों की आशंका बढ़ सकती है.

एंटी-रैंसमवेयर फर्म Halcyon से जुड़े एक पूर्व FBI साइबर अधिकारी ने कहा कि मध्य पूर्व में हैकर गतिविधियां बढ़ी हैं. उनकी कंपनी ने ऐसे प्रो-ईरानी साइबर समूहों की सक्रियता देखी है जो पहले हैक-एंड-लीक, रैंसमवेयर और DDoS हमलों में शामिल रहे हैं.

अमेरिकी साइबर अधिकारी अक्सर ईरान को रूस और चीन के साथ संभावित साइबर खतरे के रूप में सूचीबद्ध करते रहे हैं. हालांकि, हाल के महीनों में ईरान पर हुए हमलों के जवाब में बड़े पैमाने पर विघटनकारी साइबर हमलों के स्पष्ट संकेत कम देखने को मिले हैं. जून में अमेरिकी हमलों के बाद भी व्यापक साइबर प्रतिक्रिया के ठोस संकेत नहीं मिले थे.

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Sudhanshu Shubham

Sudhanshu Shubham

सुधांशु शुभम मीडिया में लगभग आधे दशक से सक्रिय हैं. टाइम्स नेटवर्क में आने से पहले वह न्यूज 18 और आजतक जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक में रूचि होने की वजह से आप टेक्नोलॉजी पर इनसे लंबी बात कर सकते हैं. View Full Profile

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