आपकी केवल एक रात की नींद बताएगी 100 बीमारियों का खतरा, डेवलप किया गया जबरदस्त AI, जानें कैसे करता है काम
सालों से, डॉक्टर्स किसी भी बीमारी के ‘रिस्क’ (Risk) का पता लगाने के लिए सिम्पटम्स, चेक-अप्स और मेडिकल हिस्ट्री पर भरोसा करते आए हैं. लेकिन क्या हो अगर सिर्फ एक रात की नींद के दौरान आपकी बॉडी से मिलने वाले ‘सिग्नल्स’ (Signals) इन सब सवालों का जवाब दे सकें?
Surveyयूनाइटेड स्टेट्स में Stanford Medicine के रिसर्चर्स ने एक नया Artificial Intelligence (AI) मॉडल डेवलप किया है जो सिर्फ एक रात की नींद की फिजियोलॉजिकल रिकॉर्डिंग्स के आधार पर किसी व्यक्ति में 100 से अधिक हेल्थ कंडीशन्स डेवलप होने के जोखिम की भविष्यवाणी करने में सक्षम है.
क्या है SleepFM और इसे कैसे ट्रेन किया गया?
इस फाउंडेशनल AI मॉडल को ‘SleepFM’ नाम दिया गया है. इसे 65,000 प्रतिभागियों (Participants) से इकट्ठा किए गए लगभग 6,00,000 घंटे के स्लीप डेटा (Sleep Data) पर ट्रेन किया गया है. Stanford Medicine के 6 जनवरी के ब्लॉग पोस्ट के अनुसार, यह डेटासेट स्लीप सिग्नल्स की एक वाइड रेंज को एक साथ लाता है. इसमें ब्रेन एक्टिविटी, हार्ट एक्टिविटी, रेस्पिरेटरी सिग्नल्स, लेग मूवमेंट्स, आई मूवमेंट्स और अन्य फिजियोलॉजिकल डेटा शामिल हैं, जिन्हें रात भर विभिन्न ‘सेंसर्स’ (Sensors) का उपयोग करके कैप्चर किया गया था.
स्टडी के को-ऑथर और बायोमेडिकल डेटा साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जेम्स ज़ोउ ने कहा, “AI के नजरिए से, नींद का अभी भी अपेक्षाकृत कम अध्ययन (Understudied) किया गया है. पैथोलॉजी या कार्डियोलॉजी में बहुत सारा AI वर्क हो रहा है, लेकिन जीवन का इतना महत्वपूर्ण हिस्सा होने के बावजूद नींद पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया गया है.”
वहीं, स्टडी के एक अन्य को-ऑथर डॉ. इमैनुएल मिग्नॉट ने कहा, “जब हम नींद की स्टडी करते हैं तो हम आश्चर्यजनक संख्या में सिग्नल्स रिकॉर्ड करते हैं. यह एक तरह की जनरल फिजियोलॉजी है जिसे हम एक ऐसे सब्जेक्ट में आठ घंटे तक स्टडी करते हैं जो पूरी तरह से कैपिटिव है. यह बहुत ‘डेटा रिच’ है.” यह स्टडी ‘Nature Medicine’ में प्रकाशित हुई है.
हेल्थकेयर में AI की बढ़ती भूमिका
Stanford Medicine के रिसर्चर्स की यह खोज ऐसे समय में आई है जब AI कंपनियां तेजी से हेल्थकेयर सेक्टर में अपने पैर पसार रही हैं. पिछले कुछ दिनों में, OpenAI ने ‘ChatGPT for Health’ लॉन्च किया और Anthropic ने भी ‘Claude for Healthcare’ नाम से इसी तरह की पेशकश की घोषणा की. हालांकि, AI-पावर्ड हेल्थकेयर टूल्स की बढ़ती संख्या ने ‘प्राइवेसी’ (Privacy) को लेकर चिंताएं भी पैदा कर दी हैं.
साथ ही ‘हैलुसिनेशन्स’ का रिस्क भी है, जिससे गलत या भ्रामक मेडिकल जानकारी मिल सकती है. बीमारियों का प्रेडिक्शन (Prediction) करने के लिए AI टूल्स का उपयोग करना पूरी तरह से नया नहीं है, लेकिन SleepFM उन पहले AI मॉडल्स में से एक है जो समान परिणाम प्राप्त करने के लिए स्लीप डेटा का विश्लेषण (Analysis) करता है.
35,000 मरीजों का डेटा और ट्रेनिंग प्रोसेस
AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए स्लीप डेटा कलेक्ट करने के मकसद से, Stanford Medicine के रिसर्चर्स ने 35,000 मरीजों के एक बड़े समूह (Cohort) पर भरोसा किया, जिनकी उम्र दो साल से लेकर 96 साल तक थी. इन मरीजों का ‘पॉलीसॉम्नोग्राफी’ (Polysomnography) डेटा 1999 और 2024 के बीच Stanford के स्लीप क्लिनिक में रिकॉर्ड किया गया था. लगभग 5,85,000 घंटे का पॉलीसॉम्नोग्राफी डेटा कलेक्ट किया गया और उसे मरीज के इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड्स के साथ पेयर किया गया.
इसके बाद स्लीप डेटा को पांच-पांच सेकंड के ‘इंक्रीमेंट्स’ में डिवाइड किया गया, ठीक वैसे ही जैसे लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) ट्रेनिंग के लिए शब्दों का उपयोग करते हैं. मॉडल को ट्रेन करने के बाद, रिसर्चर्स ने इसे अलग-अलग टास्क पूरे करने के लिए ‘फाइन-ट्यून’ किया.
SleepFM की परफॉरमेंस और नतीजे
अपनी टेस्टिंग में, रिसर्चर्स ने सबसे पहले स्टैंडर्ड स्लीप एनालिसिस टास्क पर SleepFM की परफॉरमेंस का आकलन किया, जैसे नींद के अलग-अलग चरणों को क्लासिफाई करना और स्लीप एपनिया की गंभीरता का पता लगाना. इसके बाद, SleepFM का उपयोग भविष्य में बीमारी के रिस्क का प्रेडिक्शन करने के अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य के लिए किया गया. प्रतिभागियों के हेल्थ रिकॉर्ड्स और स्लीप डेटा के आधार पर 1,000 से अधिक प्रकार की बीमारियों का विश्लेषण करने पर पाया गया कि SleepFM उचित ‘एक्यूरेसी’ (Accuracy) के साथ 130 बीमारियों की भविष्यवाणी करने में सक्षम है.
विभिन्न प्रकार के कैंसर, प्रेग्नेंसी में जटिलताओं, सर्कुलेटरी कंडीशन्स और मेंटल डिसऑर्डर्स (Mental Disorders) जैसी बीमारियों की भविष्यवाणी के लिए, SleepFM ने 0.8 से अधिक का औसत ‘सी-इंडेक्स’ (C-index) प्राप्त किया. आसान शब्दों में कहें तो, सी-इंडेक्स का उपयोग यह मापने के लिए किया जाता है कि कोई AI मॉडल यह बताने में कितना सक्षम है कि समूह के किन्हीं दो व्यक्तियों में से किसे पहले कोई बीमारी होगी.
रिसर्चर्स के अनुसार, 0.8 से अधिक का सी-इंडेक्स महत्वपूर्ण है क्योंकि 0.7 के आसपास स्कोर वाले AI मॉडल भी क्लीनिकल सेटिंग्स में उपयोगी साबित हुए हैं. SleepFM ने पार्किंसंस डिजीज के लिए 0.89, डिमेंशिया के लिए 0.85, हाइपरटेंसिव हार्ट डिजीज के लिए 0.84, हार्ट अटैक के लिए 0.81, प्रोस्टेट कैंसर के लिए 0.89, ब्रेस्ट कैंसर के लिए 0.87 और मृत्यु के लिए 0.84 का स्कोर हासिल किया.
भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां
आगे बढ़ते हुए, रिसर्चर्स ने कहा कि वे ट्रेनिंग डेटासेट में ‘वियरेबल्स’ (Wearables) से डेटा जोड़कर SleepFM की प्रेडिक्शन्स की एक्यूरेसी में सुधार करना चाहते हैं. यह समझने के लिए और अधिक रिसर्च की आवश्यकता है कि मॉडल वास्तव में क्या इंटरप्रेट (Interpret) कर रहा है. डॉ. ज़ोउ ने कहा, “यह हमें अंग्रेजी में यह नहीं समझाता है. लेकिन हमने यह पता लगाने के लिए अलग-अलग इंटरप्रिटेशन तकनीकें (Interpretation Techniques) विकसित की हैं कि जब मॉडल किसी विशिष्ट बीमारी की भविष्यवाणी कर रहा होता है तो वह क्या देख रहा होता है.”
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Sudhanshu Shubham
सुधांशु शुभम मीडिया में लगभग आधे दशक से सक्रिय हैं. टाइम्स नेटवर्क में आने से पहले वह न्यूज 18 और आजतक जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक में रूचि होने की वजह से आप टेक्नोलॉजी पर इनसे लंबी बात कर सकते हैं. View Full Profile