आ गया ‘AC का बाप’, बिना बिजली के शिमला वाली कूलिंग, गर्मियों के लिए वरदान है ये तकनीकी

HIGHLIGHTS

अगर आप चाहते हैं कि आपको एसी वाली कूलिंग भी मिलती रहे।

इसके बाद भी आपका बिजली का बिल ज़ीरो ही रहे तो ये सपना अब पूरा हो सकता है।

दुनिया में एक ऐसी तकनीकी विकसित हो चुकी है जो बिना बिजली के एसी वाली कूलिंग देने में सक्षम है।

आ गया ‘AC का बाप’, बिना बिजली के शिमला वाली कूलिंग, गर्मियों के लिए वरदान है ये तकनीकी

दुनिया में Nescod Tecnology के तौर पर आई एक नई उम्मीद: गर्मी से राहत पाने के लिए AC के अलावा कोई ऑप्शन अगर इंडिया के बाजार में है तो गांवों में उसे जुगाड़ के तौर पर लोग इस्तेमाल करते हैं और शहरों में एक सस्ते उपाय के तौर पर कूलर का इस्तेमाल भी किया जाता है। हालांकि, अगर आप कूलर और गाँव के जुगाड़ के इस्तेमाल के स्थान पर केवल AC पर ही निर्भर हैं तो आपका बिजली का बिल आसमान छूता है, आप इस बात को भली भांति जानते हैं। हालांकि, अगर आप भी अपने एसी चलाने के बाद आने वाले बिल की चपेट में आते जा रहे हैं तो आपके लिए एक खुशखबरी आ चुकी है। असल में, Saudi Arabia के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीकी निर्मित कर ली है जो आपकी इस समय को जड़ से खत्म कर देने वाली है। इसका मतलब है कि आपको एसी की कूलिंग मिलती रहने वाली है, लेकिन आपका बिजली का खर्च कम हो जाने वाला है। इस तकनीकी को इस समय दुनिया भर में Nescod के तौर पर देखा जा रहा है, और यह इस समय गूगल पर ट्रेंड भी कर रही है, अगर इसके पूरे नाम को देखा जाए तो यह No Electricity and Sustainable Cooling on Demand के तौर पर देखी जा सकती है। इसका यह मतलब है कि आपको बिना बिजली के एसी वाली कूलिंग मिलने वाली है। आइए जानते हैं कि यह तकनीकी कैसे काम करती है।

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Nescod Technology कैसे काम करती है?

यह technology Endothermic Dissolution नाम की एक chemical process पर आधारित बताई जा रही है। इसमें Ammonium Nitrate नाम के एक साल्ट को पानी में मिलाया जाता है। जब यह साल्ट पानी में घुलता है तो आसपास की गर्मी को अपने अंदर खींच लेता है। जितनी ज्यादा गर्मी खिंचती है उतना ज्यादा तापमान नीचे आता है। इसके लिए किसी भी कंप्रेसर की जरूरत नहीं होती है, इसके अलावा कोई भी मशीन भी इसके लिए आपको नहीं चाहिए। यह एक chemical reaction है जो आपको कूलिंग देने का काम करता है।

इस तकनीकी के परीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि यह system 25 degree Celsius के वातावरण को सिर्फ 20 मिनट में 3.6 degree Celsius तक ले आने में सक्षम है। Ammonium Nitrate दूसरे cooling salts के मुकाबले करीब चार गुना ज्यादा effective साबित हुआ।

  • सबसे खास बात इस तकनीकी की यह है कि यह सिस्टम खुद को दोबारा तैयार कर लेता है।

यह वो फीचर है जो Nescod को बाकी सब से अलग बनाता है। जब Ammonium Nitrate गर्मी सोखकर पानी में पूरी तरह घुल जाता है तो solar energy यानि सूरज की ऊर्जा की मदद से पानी को दोबारा vapour में बदला जाता है। इससे साल्ट फिर से crystal के रूप में तैयार हो जाता है और दोबारा इस्तेमाल के लिए रेडी हो जाता है। यानि यह सिस्टम सूरज की energy से खुद को reset कर सकता है। दिन में sun recharge करे और इसके बाद रात में कूलिंग वो भी एसी वाली बिना बिजली के।

पानी की भी बचत करती है ये तकनीकी

गर्म और सूखे इलाकों में पानी की कमी एक बड़ी समस्या है। वैज्ञानिकों ने इस तकनीकी को इस तरह डिजाइन किया है कि vapour बना पानी बर्बाद न हो बल्कि उसे दोबारा collect करके फिर से इस्तेमाल किया जा सके। यानि यह सिस्टम कूलिंग भी देगा और पानी भी बचाएगा।

क्यों इतनी जरूरी है ये तकनीकी?

International Energy Agency के मुताबिक दुनिया की कुल बिजली खपत का करीब 10% हिस्सा सिर्फ cooling systems में जाता है। Saudi Arabia जैसे देशों में गर्मियों में बिल्डिंग आदि को ठंडा रखने में भारी बिजली खर्च होती है। Nescod जैसी तकनीकी इस खपत को काफी हद तक कम कर सकती है।

इसके अलावा यह तकनीकी भारत जैसे देश के लिए भी काफी उपयोगी साबित हो सकती है, क्योंकि इसमें बिजली की खपत कम होती है, ऐसे में भारत में बिजली के बिल को देखकर अपना सिर पकड़ने वाले लोगों को भी यह तकनीकी राहत देने का काम कर सकती है। इसके अलावा यह उन इलाकों के लिए भी बेस्ट मानी जा सकती है, जहाँ बिजली की supply stable नहीं है या पहुँचती ही नहीं। भारत के कई rural areas और दुनिया के दूरदराज इलाकों में यह तकनीकी गर्मी के लिए वरदान साबित हो सकती है।

क्या AC की जगह ले सकती है यह तकनीकी?

अभी यह रिसर्च और टेस्टिंग फेज में है लेकिन जिस तरह के results सामने आए हैं वो बहुत अलग और एक अलग ही दिशा की ओर इशारा कर रहे हैं। अगर यह technology commercially available हो जाए तो न बिजली का बिल होगा न compressor की झंझट और न ही environment पर इसका कोई बुरा असर होने वाला है। अब देखना है कि क्या वाकई यह तकनीकी आने वाले समय में AC का ऑल्टरनेटिव बन सकती है, या अभी इसे ऐसा करने में समय लग सकता है।

आर्टिकल में AI से निर्मित इमेज इस्तेमाल हुई हैं।

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Ashwani Kumar

Ashwani Kumar

Ashwani Kumar has been the heart of Digit Hindi for nearly nine years, now serving as Senior Editor and leading the Vernac team with passion. He’s known for making complex tech simple and relatable, helping millions discover gadgets, reviews, and news in their own language. Ashwani’s approachable writing and commitment have turned Digit Hindi into a trusted tech haven for regional readers across India, bridging the gap between technology and everyday life. View Full Profile