सोशल मीडिया पर आप भी डालते हैं फोटो? हो जाइए सावधान! ये AI केवल सेल्फी से बता देगा आपके घर का पता
सोशल मीडिया पर तस्वीर पोस्ट करना अब पहले जितना सुरक्षित नहीं रह गया है. एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म GeoSpy AI इस बात पर नई बहस छेड़ रहा है कि ऑनलाइन प्राइवेसी कितनी मजबूत है.
Surveyयह टूल पारंपरिक ट्रैकिंग तरीकों से अलग काम करता है. इसे GPS टैग या फोटो की मेटाडेटा जानकारी की जरूरत नहीं होती. सिर्फ तस्वीर में दिख रहे विजुअल संकेतों के आधार पर यह अनुमान लगा सकता है, और कई मामलों में सटीक रूप से पहचान भी कर सकता है कि फोटो कहां ली गई थी.
कैसे काम करता है GeoSpy AI?
यह सिस्टम फोटो में मौजूद पर्यावरणीय संकेतों का विश्लेषण करता है. इसमें इमारतों की बनावट, सड़क का डिजाइन, पेड़-पौधों का प्रकार, साइनबोर्ड और शहर की संरचना शामिल हो सकते हैं. इन सभी तत्वों की तुलना बड़े विजुअल डाटासेट से की जाती है. इसके बाद AI संभावित लोकेशन तय करता है. यानी अगर आपने लोकेशन सर्विस बंद भी कर रखी हो, तब भी आपकी तस्वीर बहुत कुछ बता सकती है.
एक सेल्फी से भी खुल सकता है पता
AI Post की फाउंडर Poonam Soni ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि एक सामान्य सेल्फी भी अनजाने में आपके घर का पता उजागर कर सकती है. उनकी यह बात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ज्यादातर लोग मानते हैं कि लोकेशन टैग हटाना ही पर्याप्त सुरक्षा है. लेकिन GeoSpy AI जैसे टूल इस धारणा को चुनौती दे रहे हैं.
सिर्फ प्रयोग नहीं, असल इस्तेमाल में है
GeoSpy AI कोई काल्पनिक तकनीक नहीं है. यह पहले से सक्रिय है और रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका में कानून प्रवर्तन एजेंसियां इसका उपयोग कर रही हैं. Miami-Dade Sheriff’s Office और Los Angeles Police Department जैसी एजेंसियां कथित तौर पर जांच के दौरान इसका इस्तेमाल करती हैं, खासकर तब जब किसी मामले में केवल तस्वीरें ही सुराग होती हैं. ऐसे मामलों में यह तकनीक अपराध से जुड़ी जगह की पहचान तेजी से करने में मदद कर सकती है.
प्राइवेसी को लेकर चिंता
हालांकि, प्राइवेसी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस तकनीक की पहुंच सीमित दायरे से बाहर हो गई तो इसका दुरुपयोग भी संभव है. सोशल मीडिया पर शेयर की गई एक सामान्य फोटो को एनालाइज कर यह पता लगाया जा सकता है कि वह कहां ली गई थी. इससे किसी व्यक्ति की मूवमेंट या निवास स्थान के बारे में अनजाने में ज्यादा जानकारी सामने आ सकती है.
स्ट्रीट लेवल तक पहुंच
बताया जा रहा है कि कुछ शहरी इलाकों में यह सिस्टम स्ट्रीट लेवल तक सटीकता दे सकता है. यह प्रॉपर्टी डेटाबेस से तुलना कर सकता है और कई तस्वीरों को क्रॉस-रेफरेंस कर पैटर्न पहचान सकता है. इससे इसकी सटीकता और बढ़ जाती है.
बदल रही है डिजिटल प्राइवेसी की परिभाषा
अब तस्वीरें सिर्फ यादें नहीं रहीं, वे डेटा का स्रोत बन चुकी हैं. बालकनी, कैफे या घर के बाहर ली गई एक साधारण फोटो भी AI के लिए सूचना का खजाना हो सकती है. जैसे-जैसे AI सिस्टम ज्यादा सक्षम हो रहे हैं, यूजर द्वारा साझा की गई जानकारी और उससे निकाली जा सकने वाली जानकारी के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है. GeoSpy AI यह साफ संकेत देता है कि ऑनलाइन प्राइवेसी अब केवल मेटाडेटा कंट्रोल करने तक सीमित नहीं है. असली सवाल यह है कि AI पिक्सल्स से क्या-क्या निकाल सकता है.
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Sudhanshu Shubham
सुधांशु शुभम मीडिया में लगभग आधे दशक से सक्रिय हैं. टाइम्स नेटवर्क में आने से पहले वह न्यूज 18 और आजतक जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक में रूचि होने की वजह से आप टेक्नोलॉजी पर इनसे लंबी बात कर सकते हैं. View Full Profile