क्या आपको भी अनजान नंबर की जगह दिख रहे नाम? जानें क्यों हो रहा है ऐसा, क्या बदलनी होगी कोई सेटिंग?

क्या आपको भी अनजान नंबर की जगह दिख रहे नाम? जानें क्यों हो रहा है ऐसा, क्या बदलनी होगी कोई सेटिंग?

आपने हाल ही में नोटिस किया है कि जब कोई अनजान नंबर से कॉल करता है, तो स्क्रीन पर उसका नाम भी लिखा आता है. जबकि आपने वह नंबर सेव भी नहीं किया है. घबराइए मत, यह कोई जासूसी नहीं हो रही. यह भारत में शुरू हुआ एक नया ‘डिजिटल बदलाव’ है. अब आपको यह जानने के लिए Truecaller जैसे ऐप्स की जरूरत नहीं पड़ेगी कि “कौन बोल रहा है?”. सरकार और टेलीकॉम कंपनियों ने मिलकर एक ऐसा सिस्टम लागू किया है जो सीधे नेटवर्क से कॉलर की असली पहचान बता रहा है.

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चुपचाप हो रहा है बड़ा बदलाव

अगर आपने हाल ही में अपने फोन स्क्रीन पर अनजान नंबर के साथ नाम पॉप-अप होते देखा है, तो यह आपकी कल्पना नहीं है. यह बदलाव पिछले कुछ हफ्तों में पूरे भारत में चुपचाप (Quietly) रोल आउट किया जा रहा है और कई यूजर्स इसे पहली बार देख रहे हैं.

कॉन्टैक्ट्स में नंबर सेव न होने पर भी कॉलर का नाम अब दिखाई दे रहा है. यह बदलाव Calling Name Presentation (CNAP) के धीरे-धीरे लागू होने से जुड़ा है. यह एक नया टेलीकॉम फीचर है जिसे दूरसंचार विभाग (DoT) और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के निर्देशों के बाद पेश किया जा रहा है.

क्या है CNAP और यह कैसे काम करता है?

CNAP कोई ऐप नहीं है और यह इंटरनेट पर निर्भर नहीं करता है. इसके बजाय, यह सीधे टेलीकॉम नेटवर्क स्तर पर काम करता है. यूरोपियन टेलीकम्युनिकेशंस स्टैंडर्ड्स इंस्टीट्यूट (ETSI) ने इस अवधारणा को परिभाषित किया है. उनके अनुसार, CNAP एक ऐसी सेवा है जो रिसीवर के फोन पर कॉल करने वाली पार्टी का ‘रजिस्टर्ड नाम’ प्रदर्शित करती है.

आसान शब्दों में कहें तो जब कोई आपको कॉल करता है, तो आपका टेलीकॉम ऑपरेटर वह नाम लेता है जो सिम रजिस्ट्रेशन के दौरान आधिकारिक KYC दस्तावेजों का उपयोग करके जमा किया गया था. वही नाम आपकी स्क्रीन पर दिखाया जाता है. यदि कॉलर ने अपनी पहचान छिपाने का विकल्प चुना है, या यदि नाम उपलब्ध नहीं है, तो सिस्टम बस उसी को रिफ्लेक्ट करेगा. ध्यान दें कि CNAP केवल वॉयस कॉल (Voice Calls) पर लागू होता है और एसएमएस या मैसेजिंग सेवाओं तक लागू नहीं होता है.

CLIP vs CNAP: पुराने सिस्टम में क्या कमी थी?

अब तक, भारतीय टेलीकॉम नेटवर्क Calling Line Identification Presentation (CLIP) पर निर्भर थे, जो केवल कॉलर का नंबर दिखाता था. ट्राई के अनुसार, वह पुराना सिस्टम अब यूजर्स की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता था. स्पैम कॉल, रोबोकॉल और धोखाधड़ी (Fraud) के प्रयासों में वृद्धि के साथ, कई लोग अनजान नंबरों को पूरी तरह से अनदेखा कर देते हैं. इसका मतलब यह है कि अक्सर जरूरी कॉल भी मिस हो जाते हैं.

Truecaller से यह कैसे अलग है?

CNAP आपको Truecaller जैसे ऐप्स के समान लग सकता है, लेकिन फर्क यह है कि जानकारी कहां से आ रही है. CNAP सिम जारी करते समय एकत्र किए गए सत्यापित (Verified) टेलीकॉम रिकॉर्ड का उपयोग करता है. इसमें कोई क्राउडसोर्सिंग नहीं है, कोई कॉन्टैक्ट स्क्रैपिंग नहीं है, और कोई ऐप इंस्टॉल करने की आवश्यकता नहीं है.

Truecaller का तरीका: दूसरी ओर, Truecaller काफी हद तक यूजर द्वारा सबमिट किए गए डेटा और ऑनलाइन एक्सेस पर निर्भर करता है. हालांकि यह स्पैम टैगिंग और कम्युनिटी रिपोर्ट्स प्रदान करता है, लेकिन जो नाम यह दिखाता है वे हमेशा सटीक या आधिकारिक रूप से सत्यापित नहीं होते हैं.

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Sudhanshu Shubham

Sudhanshu Shubham

सुधांशु शुभम मीडिया में लगभग आधे दशक से सक्रिय हैं. टाइम्स नेटवर्क में आने से पहले वह न्यूज 18 और आजतक जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक में रूचि होने की वजह से आप टेक्नोलॉजी पर इनसे लंबी बात कर सकते हैं. View Full Profile

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