केवल 300 रुपये में खरीदा था ये डोमेन, अब 634 करोड़ में कर दिया सौदा, लोगों ने बताया दुनिया का सबसे बड़ा मुनाफा
एक मलेशियाई उद्यमी ने डोमेन दुनिया की सबसे चर्चित डील्स में से एक को अंजाम दिया है. अरस्यन इस्माइल ने 1993 में महज 10 साल की उम्र में AI.com डोमेन सिर्फ 100 डॉलर में खरीदा था. उस समय यह रकम करीब 300 रुपये के आसपास थी. उन्होंने अपनी मां के क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर यह डोमेन लिया था. उस वक्त उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य का अंदाजा नहीं था, बल्कि उन्हें सिर्फ यह अच्छा लगा कि यह नाम उनके इनिशियल्स से मेल खाता है.
Surveyकई दशकों तक यह डोमेन खास चर्चा में नहीं आया. वह इंटरनेट का शुरुआती दौर था और मलेशिया के ज्यादातर घरों में तब इंटरनेट तक पहुंच भी नहीं थी. लेकिन जैसे जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वैश्विक उद्योग के रूप में तेजी से बढ़ा, AI.com दुनिया के सबसे कीमती डिजिटल एड्रेस में से एक बन गया. दो अक्षरों वाले डोमेन बेहद दुर्लभ होते हैं और AI.com इंटरनेट रियल एस्टेट की सबसे स्पेशल क्लास में गिना जाता है.
634 करोड़ रुपये में बिका डोमेन
पिछले साल अप्रैल में इस्माइल ने यह डोमेन Crypto.com के सीईओ Kris Marszalek को 70 मिलियन डॉलर यानी करीब 634 करोड़ रुपये में बेच दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह सौदा पूरी तरह क्रिप्टोकरेंसी में पूरा हुआ. कई स्रोतों ने इस रकम की पुष्टि की है, जिससे यह सार्वजनिक रूप से घोषित अब तक की सबसे बड़ी डोमेन बिक्री बन गई. इससे पहले 2010 में CarInsurance.com को 49.7 मिलियन डॉलर में बेचा गया था, जो रिकॉर्ड पर था.
Super Bowl LX के दौरान यह डोमेन फिर सुर्खियों में आया, जब Crypto.com ने AI.com के बैनर तले अपना नया agentic AI प्लेटफॉर्म लॉन्च किया. इस प्लेटफॉर्म के तहत पर्सनल AI एजेंट्स मैसेज भेजने, स्टॉक्स ट्रेड करने और अलग अलग ऐप्स में टास्क संभालने में सक्षम बताए गए.
मार्सजालेक ने कहा कि AI.com जैसा नाम हासिल करना जरूरी था ताकि उनकी कंपनी तेजी से बढ़ती AI रेस में साधारण न बन जाए. दूसरी ओर, इस्माइल लंबे समय से मलेशिया के टेक इकोसिस्टम का हिस्सा रहे हैं. उन्होंने शुरुआती सोशल नेटवर्किंग वेंचर्स में काम किया, Nuffnang और Friendster जैसी कंपनियों से जुड़े और बाद में 1337 Tech की स्थापना की. वह Bitcoin और डिजिटल एसेट्स के शुरुआती समर्थकों में भी शामिल रहे.
100 मिलियन तक का मिला था ऑफर
दिलचस्प बात यह है कि 2025 में जब उन्होंने डोमेन बिक्री के लिए रखा, तब उन्हें 100 मिलियन डॉलर तक के ऑफर मिले थे. इसके बावजूद उन्होंने 70 मिलियन डॉलर पर डील पूरी की. बाद में उन्होंने सलाह दी कि किसी अरबपति के साथ जरूरत से ज्यादा मोलभाव नहीं करना चाहिए.
यह कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई. लोगों ने बहस शुरू कर दी कि यह दूरदर्शिता थी या किस्मत. एक यूजर ने लिखा कि क्या यह संयोग था या दूर की सोच, लेकिन 300 रुपये खर्च कर 30 साल तक डोमेन संभालकर रखना भी धैर्य का उदाहरण है. दूसरे यूजर ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट बताया. किसी ने कहा कि यह किस्मत नहीं बल्कि विजन है. वहीं एक और टिप्पणी में लिखा गया कि या तो वह 1993 में ही भविष्य देख रहे थे या फिर यह सिर्फ एक साहसी दांव था.
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Sudhanshu Shubham
सुधांशु शुभम मीडिया में लगभग आधे दशक से सक्रिय हैं. टाइम्स नेटवर्क में आने से पहले वह न्यूज 18 और आजतक जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक में रूचि होने की वजह से आप टेक्नोलॉजी पर इनसे लंबी बात कर सकते हैं. View Full Profile