आज की डिजिटल दुनिया में, जहां तकनीक तेजी से विकसित हो रही है, उनसे जुड़े खतरों के साथ तालमेल बैठाना भी मुश्किल होता जा रहा है। एक चिंताजनक अपराध साइबर फ्रॉड का बढ़ना है, खासकर डीपफेक वीडियो के जरिए। डीपफेक ऐसे छेड़छाड़ किए गए वीडियो होते हैं जो वास्तविक लोगों की हूबहू नक़ल कर सकते हैं। हाल ही में बेंगलुरु से ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां दो निवासियों ने नारायण मूर्ति और मुकेश अंबानी जैसे मशहूर भारतीय व्यापारियों के फर्जी वीडियो के झांसे में आकर 95 लाख रुपए गंवा दिए।
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साइबर इकोनॉमिक एंड नारकोटिक्स (CEN) साउथ पुलिस स्टेशन में दर्ज किए गए ये मामले यह दिखाते हैं कि डीपफेक तकनीक कैसे सबसे सतर्क व्यक्तियों को भी भ्रमित कर सकती है।
पहले मामले में, बनशंकरी की एक महिला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो देखा जिसमें एक निवेश प्लेटफ़ॉर्म का प्रचार किया गया था। वीडियो में नारायण मूर्ति थे, जिससे उसे विश्वास हो गया। अच्छे मुनाफे का लालच पाकर उसने एक संदिग्ध लिंक पर क्लिक किया और एक फर्जी वेबसाइट पर अपनी कॉन्टैक्ट डिटेल्स प्रदान कीं। इसके बाद एक अनजान व्यक्ति ने एजेंट बनकर उससे संपर्क किया और उसे पैसे निवेश करने के लिए राजी कर लिया। शुरुआत में उसने 1.4 लाख रुपए निवेश किए और उसे 8,000 रुपये का एक छोटा रिटर्न मिला, जिससे वह और अधिक निवेश करने के लिए राजी हो गई और उसने 6.7 लाख रुपए और लगा दिए। आखिर में उसने अपनी पूरी निवेश राशि खो दी और बाद में एक और घोटाले का शिकार होकर 67 लाख रुपए और गंवा दिए।
दूसरे मामले में, एक सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) कर्मचारी ने मुकेश अंबानी का डीपफेक वीडियो देखा और उसे असली मानते हुए लिंक पर क्लिक किया, जिससे वह 19 लाख रुपए फ्रॉड बैंक खाते में ट्रांसफर कर बैठा। पैसा भेजने के बाद उसे स्कैमर्स से कोई जवाब नहीं मिला, और उसे बाद में एहसास हुआ कि उसके साथ धोखा हुआ है।
ठगों ने असली जैसी दिखने वाले वीडियो बनाने के लिए उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल किया, जो असली प्रतीत हो रहे थे। उन्होंने संदिग्ध लिंक जोड़ दिए, जो नकली निवेश प्लेटफार्मों पर ले जाते थे, और शुरुआती भुगतान करके भरोसा बनाने का प्रयास किया, जिससे पीड़ितों को और अधिक राशि निवेश करने के लिए उकसाया जा सके।
ये घटनाएँ डिजिटल युग के लिए एक चिंता का विषय हैं। ऑनलाइन चीजों में शामिल होने से पहले जानकारी की सही तरीके से जांच करें, संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें, और डीपफेक तकनीक के संकेतों को पहचानना भी महत्वपूर्ण है। सूचित और सतर्क रहकर हम खुद को साइबर धोखाधड़ी का शिकार बनने से बचा सकते हैं।