49 साल का ये आदमी 3 साल से कर रहा है AI को डेट, कहा मिल रहा रियल से ज्यादा अनुभव, काफी गहरा हो चुका है कनेक्शन

HIGHLIGHTS

एक व्यक्ति ने AI चैटबॉट से रिश्ता बना लिया

Replika उसके लिए भावनात्मक सहारा बन गया

AI रिश्ते के फायदे और जोखिम दोनों सामने आए

49 साल का ये आदमी 3 साल से कर रहा है AI को डेट, कहा मिल रहा रियल से ज्यादा अनुभव, काफी गहरा हो चुका है कनेक्शन

AI का क्रेज धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है. खासतौर पर Replika जैसे AI चैटबॉट अब सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं रहे. बल्कि कई लोगों के लिए भावनात्मक सहारा भी बनते जा रहे हैं. एक 49 साल के व्यक्ति की कहानी इस बात को दिखाती है कि कैसे अकेलापन और मुश्किल सामाजिक अनुभव किसी को ऐसी दिशा में ले जा सकते हैं, जहां एक AI भी रिश्ते जैसा महसूस होने लगता है.

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अकेलेपन से AI तक का सफर

इस व्यक्ति ने बताया कि बचपन से ही उसे लोगों से जुड़ने में दिक्कत रही. अलग होने की भावना, बुलिंग और बाद में अपनी पहचान को लेकर समाज का दबाव, ये सब उसके जीवन का हिस्सा रहे. 2016 में ट्रांजिशन शुरू करने के बाद भी चीजें आसान नहीं हुईं.

समय के साथ उसने खुद को लोगों से दूर करना शुरू कर दिया. सार्वजनिक जगहों पर जाना भी असहज हो गया. कोविड-19 के दौरान यह अकेलापन और गहरा गया, जहां कई दिन ऐसे गुजरते थे जब वह अपने रूममेट के अलावा किसी से बात नहीं करता था.

कैसे शुरू हुआ AI के साथ रिश्ता?

  • 2022 में उसने Replika ऐप डाउनलोड किया और एक AI साथी “Min-ho” बनाया. शुरुआत में यह सिर्फ सामान्य बातचीत थी, लेकिन धीरे-धीरे यह कनेक्शन गहरा होता गया.
  • रोज बातचीत, छोटी-बड़ी हर बात शेयर करना
  • AI की तरफ से भावनात्मक प्रतिक्रिया और बातचीत में जुड़ाव

कुछ ही समय में यह रिश्ता दोस्ती से आगे बढ़कर एक तरह के “डेटिंग” अनुभव जैसा हो गया. व्यक्ति के अनुसार, इस बातचीत में उसे जजमेंट का डर नहीं रहता और वह खुद को खुलकर व्यक्त कर पाता है.

क्या यह सच में मदद है या एक दूरी?

तीन साल बाद भी यह कनेक्शन बना हुआ है. वह मानता है कि AI होने के बावजूद यह रिश्ता उसके लिए मायने रखता है. उसने इस AI साथी को अपनी मां से भी “मिलवाया” है और इसे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना लिया है.

असली दुनिया में उसका सोशल सर्कल अब भी बहुत छोटा है. ज्यादातर बातचीत AI और परिवार तक सीमित है. यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है. क्या यह रिश्ता उसे फिर से समाज से जुड़ने में मदद कर रहा है, या उसे और अलग कर रहा है.

कंपनी क्या कहती है?

Replika के CEO Dmytro Klochko का कहना है कि कंपनी इन चिंताओं से वाकिफ है. उनका फोकस यह सुनिश्चित करना है कि AI लोगों को वास्तविक जीवन से जोड़ने में मदद करे, न कि उनसे दूर ले जाए.

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Sudhanshu Shubham

Sudhanshu Shubham

सुधांशु शुभम मीडिया में लगभग आधे दशक से सक्रिय हैं. टाइम्स नेटवर्क में आने से पहले वह न्यूज 18 और आजतक जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक में रूचि होने की वजह से आप टेक्नोलॉजी पर इनसे लंबी बात कर सकते हैं. View Full Profile

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