iPhone बन रहा बर्थ कंट्रोल डिवाइस..ज्यादा फोन होने से कम होते हैं बच्चे, रिपोर्ट में हैरान कर देने वाला दावा
स्मार्टफोन और iPhone के बढ़ते इस्तेमाल को जन्म दर में गिरावट से जोड़ने वाली नई रिसर्च सामने आई है.
अमेरिका और 128 देशों के आंकड़ों में स्मार्टफोन लोकप्रिय होने के बाद जन्म दर घटने का ट्रेंड देखा गया.
शोधकर्ताओं का मानना है कि सामाजिक व्यवहार में बदलाव और डिजिटल जीवनशैली इसके संभावित कारण हो सकते हैं.
दुनियाभर में घटती जन्म दर लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है. आमतौर पर माना जाता है कि जैसे-जैसे किसी देश की आर्थिक स्थिति बेहतर होती है, वहां जन्म दर कम होने लगती है. लेकिन पिछले दो दशकों में वैज्ञानिकों ने एक अलग ट्रेंड देखा है. दुनिया के कई देशों में आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियां अलग होने के बावजूद जन्म दर लगभग एक जैसी रफ्तार से गिर रही है. अब दो नई रिसर्च में दावा किया गया है कि इस बदलाव के पीछे स्मार्टफोन, खासकर iPhone की भी अहम भूमिका हो सकती है.
Surveyअमेरिका की National Bureau of Economic Research की एक स्टडी के अनुसार 1980 से 2007 तक अमेरिका में सामान्य प्रजनन दर लगभग स्थिर रही. लेकिन 2007 के बाद इसमें लगातार गिरावट शुरू हो गई. 2024 तक यह दर करीब 22 प्रतिशत तक घट गई. शोधकर्ताओं ने इस दौरान iPhone के प्रसार और जन्म दर में गिरावट के बीच संबंध खोजने की कोशिश की.
AT&T नेटवर्क वाले इलाकों में ज्यादा गिरी जन्म दर
iPhone की शुरुआत जून 2007 में हुई थी और फरवरी 2011 तक अमेरिका में यह केवल AT&T नेटवर्क के जरिए उपलब्ध था. इसी वजह से शोधकर्ताओं को एक अनोखा मौका मिला. उन्होंने उन इलाकों की तुलना की जहां AT&T का नेटवर्क मजबूत था और जहां इसकी पहुंच बहुत कम थी.

रिसर्च में पाया गया कि जिन क्षेत्रों में iPhone की पहुंच ज्यादा थी, वहां 15 से 19 साल की महिलाओं में जन्म दर 4.5 से 8 प्रतिशत तक और 20 से 24 साल की महिलाओं में 3.2 से 6.6 प्रतिशत तक कम हुई. शोधकर्ताओं का अनुमान है कि 2007 से 2011 के बीच जन्म दर में आई गिरावट का 33 से 52 प्रतिशत हिस्सा iPhone के प्रसार से जुड़ा हो सकता है.
आखिर स्मार्टफोन से जन्म दर पर कैसे पड़ सकता है असर?
शोधकर्ताओं का कहना है कि स्मार्टफोन आने के बाद लोगों के सामाजिक व्यवहार में बड़ा बदलाव आया. लोग दोस्तों और परिवार के साथ आमने-सामने कम मिलने लगे और ज्यादा समय ऑनलाइन बिताने लगे. इसके साथ ही यौन गतिविधियों में कमी और ऑनलाइन वयस्क सामग्री की खपत में बढ़ोतरी भी देखी गई. रिसर्च के मुताबिक कई लोगों के लिए डिजिटल मनोरंजन ने वास्तविक सामाजिक संपर्क की जगह लेना शुरू कर दिया.
स्टडी में यह भी कहा गया है कि स्मार्टफोन ने युवाओं को गर्भनिरोधक उपायों, गर्भावस्था से बचाव और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी तक आसान पहुंच दी. इससे अनचाही गर्भावस्था के मामलों में भी कमी आई हो सकती है.
सिर्फ अमेरिका नहीं, दुनिया के कई देशों में दिखा समान ट्रेंड
University of Cincinnati के अर्थशास्त्रियों द्वारा की गई दूसरी स्टडी में 128 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया. इसमें पाया गया कि अलग-अलग स्वास्थ्य व्यवस्थाओं, धर्म, कानून और आर्थिक स्थितियों वाले देशों में भी स्मार्टफोन के बड़े पैमाने पर लोकप्रिय होने के बाद किशोर जन्म दर में तेज गिरावट दर्ज की गई.

ईरान, चिली, मेक्सिको, तुर्किये, ग्वाटेमाला और कोस्टा रिका जैसे देशों में स्मार्टफोन के व्यापक इस्तेमाल के बाद किशोर जन्म दर में गिरावट की रफ्तार बढ़ गई. शोधकर्ताओं ने इसे “ग्लोबल टेक्नोलॉजी शॉक” का नाम दिया है.
लोगों की जिंदगी में आया बड़ा बदलाव
रिसर्च के अनुसार 2003 में लोग औसतन 68 मिनट प्रतिदिन आमने-सामने बातचीत और सामाजिक गतिविधियों में बिताते थे. 2019 तक यह समय घटकर 38 मिनट रह गया. वहीं कंप्यूटर और डिजिटल डिवाइस पर बिताया जाने वाला समय 22 मिनट से बढ़कर 96 मिनट प्रतिदिन पहुंच गया.
क्या सिर्फ iPhone ही जिम्मेदार है?
शोधकर्ता खुद मानते हैं कि जन्म दर में गिरावट के लिए केवल iPhone या स्मार्टफोन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. आर्थिक परिस्थितियां, शिक्षा का स्तर, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, विवाह में देरी और बदलती जीवनशैली जैसे कई अन्य कारण भी इसमें योगदान दे रहे हैं. हालांकि दोनों रिसर्च इस बात की ओर इशारा करती हैं कि स्मार्टफोन ने सामाजिक व्यवहार में इतना बड़ा बदलाव किया है कि उसका असर जन्म दर पर भी दिखाई दे सकता है.
आज अमेरिका, कनाडा, जापान, दक्षिण कोरिया, चीन, भारत और ब्राजील जैसे कई देशों में जन्म दर लगातार गिर रही है. ऐसे में वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि तकनीक और समाज के बदलते रिश्ते आने वाले वर्षों में जनसंख्या पर किस तरह का प्रभाव डालेंगे.
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सुधांशु शुभम (Sudhanshu Shubham) डिजिटल मीडिया में पिछले 6 साल से सक्रिय हैं. टाइम्स ग्रुप (Times Group) में आने से पहले वह न्यूज18 (News18) और आजतक (Aaj Tak) जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक के अलावा इन्होंने हाइपर लोकल बीट, डेटा एनालिसिस का भी काम किया है. View Full Profile
