Chandra Grahan 2026 Live: चंद्र ग्रहण भारत में इस समय से होगा शुरू, नोट कर लें सही टाइम, जानें क्यों कहा जाता है ब्लड मून

Chandra Grahan 2026 Live: चंद्र ग्रहण भारत में इस समय से होगा शुरू, नोट कर लें सही टाइम, जानें क्यों कहा जाता है ब्लड मून

Chandra Grahan 2026: 3-4 मार्च 2026 की रात खगोल प्रेमियों के लिए बेहद खास रहने वाली है. इस दिन पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखाई देगा, और यह 2028 के अंत तक आखिरी पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा. यही वजह है कि यह खगोलीय घटना खास मानी जा रही है. इस दौरान पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच सीध में आ जाएगी. पृथ्वी की छाया चंद्रमा की सतह पर पड़ेगी और चंद्रमा तांबे जैसे लाल रंग का दिखाई देगा. यह रंग पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरने वाली सूर्य की रोशनी के कारण बनता है.

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कहां और कब दिखेगा ग्रहण?

रिपोर्ट्स के अनुसार, पूर्वी एशिया और ऑस्ट्रेलिया में लोग 3 मार्च की शाम को चंद्रमा को पृथ्वी की छाया में प्रवेश करते देख सकेंगे. जापान, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के बड़े हिस्सों में जब पूर्ण चंद्रमा क्षितिज के ऊपर उठेगा, तब वह आंशिक रूप से ग्रहणग्रस्त होगा.

मध्य एशिया में लोग चंद्रमा के अस्त होने के समय केवल आंशिक ग्रहण देख पाएंगे. वहीं उत्तर और मध्य अमेरिका में यह ग्रहण 3 मार्च की तड़के सुबह दिखाई देगा, जब चंद्रमा पश्चिम दिशा में ढल रहा होगा. दक्षिण अमेरिका के सुदूर पश्चिमी हिस्से में लोग ग्रहण का केवल अंतिम चरण देख सकेंगे. इसके विपरीत, यूरोप और अफ्रीका के अधिकांश हिस्सों में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा.

भारत की बात करें तो चंद्रमा का उदय शाम लगभग 6:26 से 6:32 बजे के बीच होगा और उसी समय ग्रहण का अंतिम चरण चल रहा होगा. ग्रहण करीब 6:46 तक समाप्त हो जाएगा. यानी भारत में यह चंद्र ग्रहण केवल 15 से 20 मिनट के लिए ही दिखाई देगा.

चंद्रमा लाल क्यों दिखता है?

चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा के दिन ही होता है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है. ग्रहण के दौरान चंद्रमा कभी-कभी गहरे तांबे या लाल रंग का दिखाई देता है, जिसे आमतौर पर “ब्लड मून” कहा जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सूर्य की रोशनी जब पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरती है, तो नीली रोशनी बिखर जाती है और लाल रोशनी मुड़कर चंद्रमा तक पहुंचती है. यही लाल रोशनी चंद्रमा को प्रकाशित करती है.

इस घटना को देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं है. ग्रहण को नंगी आंखों से सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है. प्राचीन समय में लाल चंद्रमा को अपशकुन माना जाता था, लेकिन आधुनिक विज्ञान इस “ब्लड मून” की स्पष्ट व्याख्या करता है.

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Sudhanshu Shubham

Sudhanshu Shubham

सुधांशु शुभम मीडिया में लगभग आधे दशक से सक्रिय हैं. टाइम्स नेटवर्क में आने से पहले वह न्यूज 18 और आजतक जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक में रूचि होने की वजह से आप टेक्नोलॉजी पर इनसे लंबी बात कर सकते हैं. View Full Profile

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