iPhone और iCloud था लॉक..मरने के बाद परिवार ने मांगा एक्सेस, Apple ने किया मना, फिर गुजरात कोर्ट ने सुना दिया ये फैसला
गुजरात कोर्ट ने iCloud डेटा को कानूनी संपत्ति माना
परिवार को कोर्ट के आदेश के बाद डिजिटल डेटा एक्सेस मिला
मृत्यु के बाद प्राइवेसी अधिकार समाप्त माना गया
डिजिटल दुनिया में एक बड़ा सवाल अब तेजी से सामने आ रहा है, किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसके ऑनलाइन डेटा का क्या होगा. गुजरात की एक अदालत ने इस मुद्दे पर अहम फैसला देकर इस बहस को और तेज कर दिया है.
Surveyगांधीनगर सिविल कोर्ट ने अपने हालिया फैसले में iCloud में मौजूद डेटा को मृत व्यक्ति की संपत्ति यानी एस्टेट का हिस्सा माना है. यह मामला एक परिवार का था जो अपने दिवंगत सदस्य के लॉक्ड iPhone और iCloud अकाउंट तक पहुंच चाहता था, जिसमें फोटो, वीडियो, वॉयस नोट्स और जरूरी दस्तावेज मौजूद थे.
कंपनी के मना करने के बाद कोर्ट का रूख
परिवार ने पहले Apple से संपर्क किया, लेकिन कंपनी ने साफ किया कि डेटा एक्सेस केवल उसके Digital Legacy सिस्टम के जरिए और कोर्ट के आदेश के बाद ही संभव है. इसके बाद मृतक की पत्नी और बेटी ने Indian Succession Act 1925 के तहत अदालत का रुख किया, क्योंकि कोई वसीयत नहीं छोड़ी गई थी.

जज हिमांशु चौधरी ने इस मामले में बेटी को एस्टेट का एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया और Apple को निर्देश दिया कि वह तकनीकी रूप से संभव हद तक डेटा रिकवर करने में मदद करे.
डिजिटल डेटा कानूनी रूप से संपत्ति
इस फैसले की सबसे बड़ी बात यह है कि अदालत ने डिजिटल डेटा को कानूनी रूप से “संपत्ति” माना. कोर्ट ने कहा कि डिजिटल डेटा भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कोई भौतिक संपत्ति, क्योंकि इसमें भावनात्मक और व्यावहारिक दोनों तरह की वैल्यू होती है.
अदालत ने अपने फैसले में General Clauses Act, Bharatiya Nyaya Sanhita और Prevention of Money Laundering Act जैसे कानूनों का हवाला दिया, जो “प्रॉपर्टी” को व्यापक रूप में परिभाषित करते हैं. इसके अलावा इनकम टैक्स एक्ट में क्रिप्टो और NFT जैसे डिजिटल एसेट्स को भी मान्यता मिलने का जिक्र किया गया.

प्राइवेसी को मुद्दा खत्म
अब सबसे संवेदनशील मुद्दा आता है प्राइवेसी का. कोर्ट ने माना कि डिजिटल अकाउंट में निजी बातें, मैसेज और यादें होती हैं, जिन्हें व्यक्ति शायद किसी से साझा नहीं करना चाहता. लेकिन अदालत ने यह भी साफ किया कि प्राइवेसी एक व्यक्तिगत अधिकार है, जो व्यक्ति की मृत्यु के साथ समाप्त हो जाता है. इसलिए कानूनी वारिसों को डेटा तक पहुंच से रोका नहीं जा सकता.
यह फैसला एक बड़े बदलाव की शुरुआत है, क्योंकि भारत में अभी तक डिजिटल विरासत (digital inheritance) को लेकर कोई स्पष्ट कानून नहीं है. हालांकि Digital Personal Data Protection Act 2023 में यह प्रावधान जरूर है कि व्यक्ति अपने डेटा के लिए किसी को नामित कर सकता है, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया गया हो तो क्या होगा, यह अब भी पूरी तरह साफ नहीं है.
सीधी बात यह है कि अब आपका डिजिटल डेटा सिर्फ डेटा नहीं रहा, यह आपकी संपत्ति बन चुका है. और अगर आपने पहले से कोई प्लान नहीं बनाया, तो आपके परिवार को उसे पाने के लिए कोर्ट का सहारा लेना पड़ सकता है.
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सुधांशु शुभम (Sudhanshu Shubham) डिजिटल मीडिया में पिछले 6 साल से सक्रिय हैं. टाइम्स ग्रुप (Times Group) में आने से पहले वह न्यूज18 (News18) और आजतक (Aaj Tak) जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक के अलावा इन्होंने हाइपर लोकल बीट, डेटा एनालिसिस का भी काम किया है. View Full Profile