वेनेजुएला में भूकंप से भारी तबाही…लेकिन एंड्रॉयड फोन ने पहले ही दे दिया था अलर्ट, गूगल को पहले कैसे लग गई भनक?

HIGHLIGHTS

Google का Earthquake Alert सिस्टम Android फोन की मदद से काम करता है.

स्मार्टफोन का Accelerometer भूकंप की शुरुआती तरंगों को पहचान लेता है.

भारत में भी 2023 से Android Earthquake Alerts उपलब्ध हैं.

वेनेजुएला में भूकंप से भारी तबाही…लेकिन एंड्रॉयड फोन ने पहले ही दे दिया था अलर्ट, गूगल को पहले कैसे लग गई भनक?

बुधवार को वेनेजुएला में लगातार दो शक्तिशाली भूकंप आए, जिनकी तीव्रता 7.1 और 7.5 मापी गई. इन भूकंपों के कारण कई इमारतें ढह गईं और बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ. बताया जा रहा है कि पिछले सौ वर्षों में वेनेजुएला में आए यह सबसे शक्तिशाली भूकंप थे.

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हालांकि इस घटना के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई यूजर्स ने दावा किया कि उन्हें भूकंप महसूस होने से पहले ही Google का अलर्ट मिल गया था.

एक यूजर ने Google से मिले Earthquake Alert का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया, जिसमें लगभग 6.2 तीव्रता के भूकंप का अनुमान लगाया गया था. नोटिफिकेशन में यह भी बताया गया था कि भूकंप का केंद्र करीब 212.3 मील यानी लगभग 341 किलोमीटर दूर है.

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर Google को भूकंप आने से पहले इसकी जानकारी कैसे मिल जाती है? इसका जवाब आपके Android स्मार्टफोन में छिपा है.

आपका स्मार्टफोन ही बन जाता है भूकंप का सेंसर

हर आधुनिक स्मार्टफोन में Accelerometer नाम का एक सेंसर होता है. आमतौर पर यही सेंसर फोन को Landscape Mode में घुमाने का काम करता है, लेकिन इसका एक और महत्वपूर्ण उपयोग भी है. यह सेंसर कंपन यानी Vibrations को पहचान सकता है.

जब आपका स्मार्टफोन ऐसे कंपन महसूस करता है, जो भूकंप से जुड़े हो सकते हैं, तब वह Android Earthquake Alerts System को अपनी अनुमानित लोकेशन के साथ एक सिग्नल भेज देता है. इसके बाद Google के सर्वर आसपास मौजूद कई दूसरे Android फोन्स से भी जानकारी जुटाते हैं.

अगर पर्याप्त संख्या में स्मार्टफोन एक जैसे कंपन दर्ज करते हैं, तो Google समझ जाता है कि भूकंप आ रहा है और तुरंत अलर्ट भेज देता है. Google के मुताबिक इस नेटवर्क से दुनिया भर में 2 अरब से ज्यादा Android स्मार्टफोन जुड़े हुए हैं. यही वजह है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा Distributed Seismograph यानी भूकंप पहचानने वाला नेटवर्क माना जाता है.

भूकंप से पहले अलर्ट कैसे मिल जाता है?

कई लोगों के मन में सवाल आता है कि जब भूकंप अभी आया ही नहीं, तो Google पहले अलर्ट कैसे भेज देता है.असल में भूकंप एक झटके में नहीं आता, बल्कि कई तरह की तरंगों के रूप में फैलता है. सबसे पहले Primary Waves यानी P-Waves निकलती हैं, जो लगभग 6 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से चलती हैं. हालांकि इनसे ज्यादा नुकसान नहीं होता.

इसके बाद Secondary Waves यानी S-Waves आती हैं, जो लगभग 3 से 4 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से चलती हैं और सबसे ज्यादा तबाही मचाती हैं. आपका स्मार्टफोन सबसे पहले P-Waves को पहचान लेता है और तुरंत Google के सर्वर को सिग्नल भेज देता है. फोन से भेजा गया यह सिग्नल प्रकाश की गति से यात्रा करता है, जो भूकंप की तरंगों से कई लाख गुना तेज होती है.

Google का कहना है “हम मूल रूप से प्रकाश की गति और भूकंप की गति के बीच दौड़ लगा रहे होते हैं. हमारे लिए अच्छी बात यह है कि प्रकाश की गति भूकंप की तरंगों से कहीं ज्यादा तेज होती है.” जानकारी के लिए बता दें कि प्रकाश की गति लगभग 2,99,792 किलोमीटर प्रति सेकंड होती है.

अगर भूकंप का केंद्र 341 किलोमीटर दूर हो, जैसा कि वेनेजुएला की घटना में बताया गया, तो Google के सर्वर भूकंप की जानकारी जुटाकर लोगों तक अलर्ट भेज सकते हैं, इससे पहले कि भूकंप की तेज तरंगें वहां पहुंचें.

Android में मिलते हैं दो तरह के Earthquake Alerts

Android Earthquake Alerts System में भूकंप की तीव्रता के आधार पर दो तरह के अलर्ट दिए जाते हैं.

  • पहला Be Aware Alert होता है, जो हल्के झटकों की स्थिति में लोगों को पहले से सतर्क करता है.
  • दूसरा Take Action Alert होता है, जिसे मध्यम या तेज झटकों से पहले भेजा जाता है ताकि लोग सुरक्षित जगह पर जा सकें.

इन अलर्ट पर टैप करने पर यूजर्स को भूकंप से बचाव से जुड़ी जानकारी भी मिलती है. इसके साथ ही भूकंप के केंद्र और उसकी अनुमानित तीव्रता का विस्तृत मैप भी दिखाई देता है.

भारत में भी उपलब्ध है यह फीचर

Android Earthquake Alerts System भारत में 2023 से उपलब्ध है. यह फीचर Android 5 और उससे ऊपर के वर्जन वाले स्मार्टफोन्स पर काम करता है. हालांकि Earthquake Alert प्राप्त करने के लिए फोन में Wi-Fi या Mobile Data कनेक्शन एक्टिव होना जरूरी है. अगर कोई यूजर ऐसे अलर्ट नहीं पाना चाहता, तो वह अपने फोन की Settings में जाकर Earthquake Alerts फीचर को बंद भी कर सकता है.

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Sudhanshu Shubham

Sudhanshu Shubham

सुधांशु शुभम (Sudhanshu Shubham) डिजिटल मीडिया में पिछले 6 साल से सक्रिय हैं. टाइम्स ग्रुप (Times Group) में आने से पहले वह न्यूज18 (News18) और आजतक (Aaj Tak) जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक के अलावा इन्होंने हाइपर लोकल बीट, डेटा एनालिसिस का भी काम किया है. View Full Profile