मेडिकल सेक्टर में आने वाला है भूचाल! कब होगी आपकी मौत? सही-सही बता सकता है ये AI

मेडिकल सेक्टर में आने वाला है भूचाल! कब होगी आपकी मौत? सही-सही बता सकता है ये AI

AI का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. लगभग हर फील्ड में AI के आ जाने से काफी काम आसान हो गया है. कई काम ऐसे भी AI की मदद से होने लगे हैं जो हमें मुश्किल लगते थे. अब रिसर्चर ने एक नया AI-एनेबल्ड डेथ कैलकुलेटर तैयार किया है. इसको लेकर दावा किया गया है कि यह इंसान की मौत की तारीख के बारे में सटीकता से अनुमान लगा सकता है.

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Lancet Digital Health में पब्लिश हुए इस स्टडी में बताया गया कि AI से चलने वाले इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम्स (ECGs) भविष्य की स्वास्थ्य दिक्कतें और मृत्यु जोखिम की भविष्यवाणी कैसे कर सकता है. हालांकि, अभी इस टेक्नोलॉजी को मेडिकल प्रैक्टिस के स्टैंडर्ड का हिस्सा नहीं माना जा सकता है.

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AI-ECG Risk Estimator या AIRE वर्तमान में उपलब्ध AI मॉडल्स की कमी को दूर करने के लिए तैयार किया गया है. ये मॉडल्स अभी पेशेंट्स के लिए क्लियर गाइडेंस उपलब्ध नही करवा पाते हैं. कई बार ऐसे मॉडल्स ज्यादा कॉम्पिलिकेटेड होते हैं और क्लियर एक्सप्लेनेशन नहीं दे पाते हैं. बॉयोलॉजिकल रियलिटी के साथ भी ये मॉडल्स कई बार मैच नहीं कर पाते हैं.

AIRE के रिसर्चर ने इन लिमिटेशन को दूर करने के लिए एक नया टूल तैयार किया है. मृत्यु की भविष्यवाणी के अलावा, AIRE भविष्य में हार्ट फेल्योर की भविष्यवाणी करने में सक्षम है. हार्ट फेल्योर तब होता है जब हार्ट सही से पंप नहीं कर पाता है.

10 में से 8 मामलों में सटीक भविष्यवाणी

रिसर्चर का दावा है कि यह सिस्टम 10 में से 8 मामलों में सटीक भविष्यवाणी कर सकता है. रिसर्चर ने आगे लिखा है कि पिछले AI-ECG की लिमिटेशन को दूर करने के लिए AIRE प्लेटफॉर्म डेवलप किया गया है. फिलहाल इसको टेस्ट किया जाएगा.

इसके लिए साल 2025 में यूके की नेशनल हेल्थ सर्विस के अंतर्गत दो अस्पतालों में टेस्टिंग से गुजरेगा. एक्सपर्ट का मानना है कि यग 5 सालों के अंदर हेल्थ सर्विस में एक स्टैंडर्ड टूल बन सकता है. इससे हेल्थ सर्विस देने वाले अधिक पर्सनल देखभाल पेश कर सकते हैं.

बड़े डेटाबेस का करता है इस्तेमाल

AIRE अपनी भविष्यवाणी के लिए 189,539 मरीजों के 1.16 मिलियन ECG टेस्ट रिजल्ट के एक बड़े डेटासेट का इस्तेमाल करता है. इसकी ट्रेनिंग की वजह से यह 70% मामलों में एथेरोस्क्लेरोटिक हार्ट डिजीज को पहचान सकता है. इससे अगर सिस्टम से संकेत मिलेगा कि कोई पेशेंट ज्यादा जोखिम पर है तो डॉक्टर उस हिसाब से उसका ट्रीटमेंट कर सकते हैं.

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सुधांशु शुभम (Sudhanshu Shubham) डिजिटल मीडिया में पिछले 6 साल से सक्रिय हैं. टाइम्स ग्रुप (Times Group) में आने से पहले वह न्यूज18 (News18) और आजतक (Aaj Tak) जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक के अलावा इन्होंने हाइपर लोकल बीट, डेटा एनालिसिस का भी काम किया है. View Full Profile