AI से बनाई गई है फोटो? चुटकियों में करें चेक, ChatGPT या Google Gemini से चल जाएगा पता, जानें आसान स्टेप्स
AI से बनी तस्वीरें पहचानना मुश्किल होता जा रहा है
OpenAI और Google अब वेरिफिकेशन टूल्स ला रहे हैं
Gemini और OpenAI दोनों AI तस्वीरें जांच सकते हैं
AI टूल्स के तेजी से बढ़ने की वजह से अब लोग सिर्फ एक प्रॉम्प्ट लिखकर बेहद असली जैसी तस्वीरें बना पा रहे हैं. Instagram पोस्ट से लेकर राजनीतिक पोस्टर और फर्जी खबरों तक, AI से बनी तस्वीरों ने इंटरनेट को भर दिया है. सच कहें तो अब इनमें से कई तस्वीरें इतनी असली लगती हैं कि सिर्फ आंखों से पहचानना काफी मुश्किल हो गया है.
SurveyAI से बनी मीडिया को लेकर बढ़ती चिंता Google I/O 2026 में भी बड़ा मुद्दा रही. इसी दौरान Google ने OpenAI, Nvidia, ElevenLabs और Kakao जैसी कंपनियों के साथ मिलकर C2PA verification standard पर गहरी साझेदारी का ऐलान किया. इसका मकसद काफी सीधा है लोगों के लिए यह पहचानना आसान बनाना कि कोई तस्वीर AI से बनाई गई है या उसमें बदलाव किया गया है.
घोषणा के तुरंत बाद OpenAI ने भी एक खास वेरिफिकेशन टूल जारी किया, जिसकी मदद से यूजर्स पता लगा सकते हैं कि कोई तस्वीर उसके AI सिस्टम से बनाई गई है या नहीं.

ChatGPT से बनी तस्वीर कैसे पहचानें?
- इसका तरीका काफी आसान है और सिर्फ कुछ सेकंड लेता है.
- अपने कंप्यूटर में कोई भी ब्राउजर खोलें.
- अब “Verify OpenAI-generated images” सर्च करें और आधिकारिक verification पेज खोलें.
- जिस तस्वीर को चेक करना है उसे अपलोड करें.
- इसके बाद सिस्टम SynthID markers और content credentials को स्कैन करेगा.
- जांच पूरी होने के बाद टूल बता देगा कि तस्वीर OpenAI के AI टूल्स से बनाई गई है या उसमें बदलाव किया गया है.
- AI से बनी सामग्री हर महीने ज्यादा असली लगने लगी है, ऐसे में ऐसे टूल्स जल्द ही reverse image search जितने आम हो सकते हैं.
Google Gemini से AI तस्वीर कैसे जांचें?
- Google Gemini भी अब image verification की सुविधा देता है.
- इसके लिए Gemini ऐप खोलें.
- Files या Gallery विकल्प के जरिए तस्वीर अपलोड करें.
- इसके बाद “Was this created with Google AI?” या “Is this AI-generated?” जैसे सवाल टाइप करें.
- Gemini तस्वीर को SynthID detection और अपने AI सिस्टम की मदद से जांचेगा.
- यह टूल यह भी अंदाजा लगा सकता है कि तस्वीर का कितना हिस्सा AI से बनाया गया है.
AI तस्वीरों का खतरा क्यों बढ़ रहा है?
AI-generated तस्वीरों का इस्तेमाल अब सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा. इनका इस्तेमाल फेक न्यूज, फर्जी राजनीतिक प्रचार, डीपफेक और गलत जानकारी फैलाने में भी तेजी से हो रहा है. यही वजह है कि बड़ी टेक कंपनियां अब वेरिफिकेशन सिस्टम को मजबूत करने पर जोर दे रही हैं, ताकि यूजर्स असली और नकली तस्वीरों में फर्क समझ सकें.
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सुधांशु शुभम (Sudhanshu Shubham) डिजिटल मीडिया में पिछले 6 साल से सक्रिय हैं. टाइम्स ग्रुप (Times Group) में आने से पहले वह न्यूज18 (News18) और आजतक (Aaj Tak) जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक के अलावा इन्होंने हाइपर लोकल बीट, डेटा एनालिसिस का भी काम किया है. View Full Profile