रिस्क पर Android फोन की सिक्योरिटी, क्या आपको इस्तेमाल करना चाहिए एंटी-वायरस? समझ लें मुद्दे की बात
Android में बिल्ट-इन सिक्योरिटी पहले से मौजूद
एंटी-वायरस हर यूजर्स के लिए जरूरी नहीं
रिस्की यूजेज में एंटी-वायरस यूजफुल हो सकता है
Android फोन में मैलवेयर और सिक्योरिटी से जुड़े खतरे होते हैं, लेकिन क्या आपको सच में एंटी-वायरस ऐप की जरूरत है, यह सवाल आज भी लोगों को कंफ्यूज करता है.
Surveyजैसे कंप्यूटर में वायरस से बचने के लिए एंटी-वायरस जरूरी माना जाता है, वैसे फोन में यह उतना कॉमन नहीं है. Android में पहले से ही मजबूत सिक्योरिटी सिस्टम मौजूद है, जिसमें Google Play Protect जैसे फीचर्स शामिल हैं, जो ऐप्स को स्कैन करते हैं और मैलवेयर के खतरे को कम करते हैं.
लेकिन Android का ओपन सिस्टम होने की वजह से, जहां आप Play Store के बाहर से भी ऐप इंस्टॉल कर सकते हैं, यह iPhone जैसे डिवाइस की तुलना में ज्यादा वल्नरेबल बन जाता है. यहीं से सवाल उठता है कि क्या Android यूजर्स को एक्स्ट्रा एंटी-वायरस ऐप इंस्टॉल करना चाहिए या नहीं.

क्या Android फोन में वायरस आता है?
Android फोन में ट्रेडिशनल कंप्यूटर वायरस नहीं आते है, जो खुद फैलते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि फोन पूरी तरह सेफ है. यह मैलवेयर, स्पाईवेयर और डेटा चोरी जैसे खतरों के लिए सस्पेटिकबल रहता है. अगर आप अपने फोन को रूट करते हैं या बार-बार अननॉन सोर्स से ऐप इंस्टॉल करते हैं, तो सिक्योरिटी ब्रीच होने का खतरा काफी बढ़ जाता है.
आजकल ज्यादातर Android फोन में सिक्योरिटी अपडेट्स और पैच मिलते हैं, लेकिन हर ब्रांड एक ही समय पर अपडेट नहीं देता है. इसलिए यूजर्स को हमेशा ऑटो-अपडेट ऑन रखना चाहिए और अपडेट्स आते ही इंस्टॉल कर लेना चाहिए.
कब आपको एंटी-वायरस की जरूरत पड़ सकती है?
अगर आप पब्लिक Wi-Fi या पब्लिक चार्जिंग प्वाइंट (जैसे एयरपोर्ट, कैफे) का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, तो रिस्क बढ़ जाता है. अगर आप अनजान वेबसाइट खोलते हैं या सस्पेशियस लिंक पर क्लिक करते हैं, तो फिशिंग और मैलवेयर का खतरा रहता है. अगर आप Play Store के बाहर से ऐप इंस्टॉल करते हैं, तो इंफैक्शन का चांस और बढ़ जाता है. अगर आपका फोन दूसरे लोग इस्तेमाल करते हैं और वे बिना पूछे ऐप इंस्टॉल कर सकते हैं, तो भी खतरा रहता है.

Android फोन को सेफ कैसे रखें?
Android में पहले से कई सिक्योरिटी फीचर्स होते हैं, जिनका सही इस्तेमाल ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है. Google Play Protect आपके फोन में इंस्टॉल्ड ऐप्स को स्कैन करता है और सस्पेशियस ऐप के बारे में अलर्ट देता है. रेगुलर सिक्योरिटी अपडेट वल्नेरिबिलिटी को फिक्स करते हैं इसलिए इन्हें इग्नोर नहीं करना चाहिए.
सेफ ब्राउजिंग फीचर आपको खतरनाक वेबसाइट के बारे में चेतावनी देता है, खासकर जब आप Google Chrome जैसे ब्राउजर का इस्तेमाल करते हैं. ऐप परमिशन पर ध्यान देना जरूरी है, हर ऐप को सिर्फ वही एक्सेस देना चाहिए जिसकी जरूरत हो.
ज्यादातर लोगों के लिए Android का बिल्ट-इन सिक्योरिटी सिस्टम काफी होता है. अगर आप सिर्फ Play Store से ऐप डाउनलोड करते हैं और सेफ ब्राउजिंग करते हैं, तो आपको अलग से एंटी-वायरस की जरूरत नहीं है. लेकिन अगर आपकी यूजेज रिस्की है, जैसे साइडलोडिंग या पब्लिक नेटवर्क का ज्यादा इस्तेमाल तो एंटी-वायरस एक एक्स्ट्रा लेयर दे सकता है.
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सुधांशु शुभम (Sudhanshu Shubham) डिजिटल मीडिया में पिछले 6 साल से सक्रिय हैं. टाइम्स ग्रुप (Times Group) में आने से पहले वह न्यूज18 (News18) और आजतक (Aaj Tak) जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक के अलावा इन्होंने हाइपर लोकल बीट, डेटा एनालिसिस का भी काम किया है. View Full Profile