भूल कर भी ऑनलाइन सर्च न करें ये 5 चीजें, सीधे घर पर दस्तक देगी पुलिस, तीसरे केस में तो जमानत भी संभव नहीं!
आज की डिजिटल दुनिया में Google सर्च करना लगभग रोजमर्रा की आदत बन चुका है. मनोरंजन से लेकर पढ़ाई, राजनीति से लेकर हेल्थ तक, हम लगभग हर सवाल का जवाब सर्च इंजन पर ढूंढते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि कुछ तरह की ऑनलाइन सर्च केवल गलत ही नहीं, बल्कि भारतीय कानून के तहत गैरकानूनी भी हो सकती हैं और उन पर सख्त कार्रवाई हो सकती है.
Surveyभारत में साइबर गतिविधियों को मुख्य रूप से Information Technology Act 2000 के तहत नियंत्रित किया जाता है, जबकि बच्चों से जुड़े अपराधों के मामलों में POCSO Act लागू होता है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि किस तरह की सर्च आपको कानूनी मुसीबत में डाल सकती है.
बम बनाने से जुड़ी जानकारी
सबसे पहले, हथियार या बम बनाने से जुड़ी जानकारी सर्च करना बेहद गंभीर मामला है. अगर कोई व्यक्ति बम, बंदूक, विस्फोटक या किसी भी तरह के हथियार बनाने के तरीके खोजता है, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए रेड फ्लैग बन सकता है. ऐसे कीवर्ड ऑटोमेटेड मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए ट्रैक किए जा सकते हैं. बार-बार ऐसी सर्च करने पर पूछताछ, निगरानी या कानूनी कार्रवाई हो सकती है. भारतीय कानून के अनुसार अवैध उद्देश्य से हथियार बनाने, रखने या उससे जुड़ी जानकारी जुटाने का प्रयास भी अपराध की श्रेणी में आ सकता है.
साइबर अपराध से जुड़ी जानकारी
दूसरा, हैकिंग टूल्स या साइबर अपराध से जुड़ी जानकारी खोजना भी जोखिम भरा है. कई लोग जिज्ञासा या मजाक में “सोशल मीडिया अकाउंट कैसे हैक करें” या “पासवर्ड क्रैकिंग टूल” जैसी चीजें सर्च कर लेते हैं. लेकिन IT Act 2000 के तहत अनधिकृत एक्सेस, डेटा चोरी या सिस्टम में घुसपैठ अपराध है. भले ही इरादा सिर्फ सीखने का क्यों न हो, ऐसे सर्च पैटर्न संदिग्ध माने जा सकते हैं. इसके अलावा, ऐसे टूल्स खोजते समय डिवाइस में मैलवेयर या स्पायवेयर आने का भी खतरा रहता है.
चाइल्ड पोर्नोग्राफी या CSAM
तीसरा और सबसे गंभीर अपराध है चाइल्ड पोर्नोग्राफी या CSAM (Child Sexual Abuse Material) से जुड़ी सामग्री खोजना. भारत में इसे लेकर जीरो टॉलरेंस नीति है. IT Act और POCSO Act के तहत ऐसे कंटेंट को सर्च करना, देखना, डाउनलोड करना या शेयर करना सीधे तौर पर दंडनीय अपराध है. इसके लिए जेल, भारी जुर्माना और स्थायी आपराधिक रिकॉर्ड तक हो सकता है. यहां तक कि संदिग्ध या बार-बार की गई सर्च भी जांच का कारण बन सकती है.
ड्रग्स, नशीले पदार्थों या अवैध हथियार खरीदने से जुड़ी जानकारी
इसी तरह ड्रग्स, नशीले पदार्थों या अवैध हथियार खरीदने से जुड़ी सर्च भी आपको कानून के दायरे में ला सकती है. Narcotics Control Bureau और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियां ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखती हैं. अगर कोई व्यक्ति बार-बार ड्रग्स खरीदने के तरीके, ऑनलाइन सप्लायर या अवैध हथियारों की उपलब्धता से जुड़ी जानकारी खोजता है, तो उसकी डिजिटल गतिविधियां ट्रैक की जा सकती हैं.
डार्क वेब का एक्सेस
डार्क वेब से जुड़ी सर्च भी संदेह पैदा कर सकती है. गूगल पर डार्क वेब मार्केटप्लेस, अवैध डेटा ट्रेडिंग, हथियार या ड्रग्स की खरीद-फरोख्त जैसे विषयों की खोज निगरानी को आकर्षित कर सकती है. यदि कोई व्यक्ति अवैध गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसे गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना करना पड़ सकता है.
कुल मिलाकर इंटरनेट एक शक्तिशाली और उपयोगी साधन है, लेकिन इसका दुरुपयोग भारी पड़ सकता है. यह समझना जरूरी है कि हर सर्च केवल एक निजी गतिविधि नहीं होती. कई मामलों में डिजिटल फुटप्रिंट दर्ज होता है और जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों द्वारा देखा जा सकता है. इसलिए ऑनलाइन रहते समय सतर्क रहें. गैरकानूनी, संदिग्ध या संवेदनशील विषयों की सर्च से बचें. अपनी डिजिटल पहचान सुरक्षित रखें और कानून की सीमा के भीतर ही इंटरनेट का उपयोग करें.
Sudhanshu Shubham
सुधांशु शुभम मीडिया में लगभग आधे दशक से सक्रिय हैं. टाइम्स नेटवर्क में आने से पहले वह न्यूज 18 और आजतक जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक में रूचि होने की वजह से आप टेक्नोलॉजी पर इनसे लंबी बात कर सकते हैं. View Full Profile