क्या है CSEL डिवाइस? जिससे अमेरिका ने खोजा निकाला अपना पायलट, जानें छोटे डिवाइस की खूबियां

HIGHLIGHTS

CSEL डिवाइस ने अमेरिकी पायलट के रेस्क्यू में अहम भूमिका निभाई

यह डिवाइस सैटेलाइट के जरिए एन्क्रिप्टेड लोकेशन भेजता है

फ्रीक्वेंसी बदलने के कारण इसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल होता है

क्या है CSEL डिवाइस? जिससे अमेरिका ने खोजा निकाला अपना पायलट, जानें छोटे डिवाइस की खूबियां

ईरान, United States और Israel के बीच चल रहे संघर्ष में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका लगातार बढ़ती दिख रही है. हाल ही में एक अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल के नेविगेटर को रेस्क्यू करने की घटना में एक खास डिवाइस ने अहम भूमिका निभाई है. इसे Combat Survivor Evader Locator कहा जाता है. आपने भी CSEL का नाम जरूर सुना होगा, आइए आपको बताते हैं इसका काम और क्या है यह डिवाइस.

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क्या है CSEL डिवाइस?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी नेविगेटर ईरान के दक्षिण-पश्चिम इलाके में दो दिनों तक छिपा रहा और इस दौरान उसने एक सैटेलाइट से जुड़े छोटे डिवाइस के जरिए एन्क्रिप्टेड सिग्नल भेजे. यह डिवाइस Boeing द्वारा बनाया गया है और इसे आमतौर पर पायलट की सर्वाइवल जैकेट में लगाया जाता है.

यह डिवाइस बिना दुश्मन को पता चले लोकेशन ट्रैक करने में मदद करता है और लगातार एन्क्रिप्टेड डेटा भेजता रहता है. इसमें पहले से सेव मैसेज भी होते हैं, जैसे “injured”, जिन्हें जरूरत पड़ने पर तुरंत भेजा जा सकता है.

यह डिवाइस कैसे काम करता है

CSEL एक हाई-टेक कम्युनिकेशन सिस्टम है, जिसे बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए तैयार किया गया है.

  • यह डिवाइस सैटेलाइट के जरिए लोकेशन और मैसेज एन्क्रिप्टेड तरीके से भेजता है
  • फ्रीक्वेंसी बार-बार बदलती रहती है, जिससे दुश्मन के लिए ट्रैक करना मुश्किल होता है
  • 10 मीटर पानी में डूबने के बाद भी काम कर सकता है
  • बैटरी स्टैंडबाय मोड में लगभग 21 दिन तक चल सकती है

इसके अलावा, इसमें लो-लाइट और हाई-प्रेशर परिस्थितियों में काम करने की क्षमता भी होती है.

ऐसे हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन

अमेरिकी सेना ने इस डिवाइस की मदद से नेविगेटर की लोकेशन लगातार ट्रैक की. वह समय-समय पर एन्क्रिप्टेड अपडेट भेजता रहा और पहले से तय सुरक्षित जगहों का उपयोग करता रहा ताकि दुश्मन से बचा जा सके.

जब रेस्क्यू हेलीकॉप्टर पहुंचे, तब डिवाइस ने एक खास मोड में जाकर सटीक लोकेशन लॉक कर दी. इसके बाद मिलिट्री सैटेलाइट्स ने यह जानकारी कमांड सेंटर तक पहुंचाई, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन सफल हो सका.

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Sudhanshu Shubham

Sudhanshu Shubham

सुधांशु शुभम मीडिया में लगभग आधे दशक से सक्रिय हैं. टाइम्स नेटवर्क में आने से पहले वह न्यूज 18 और आजतक जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक में रूचि होने की वजह से आप टेक्नोलॉजी पर इनसे लंबी बात कर सकते हैं. View Full Profile

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