5 मिथक जो भारत को इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की ओर ले जाने से रोक रहे हैं

Digit Hindi | पब्लिश किया गया 19 Apr 2021
5 मिथक जो भारत को इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की ओर ले जाने से रोक रहे हैं

पिछले न जाने कितने वर्षों से आप जब भी सड़क पर निकलते हैं तो शुरुआत पेट्रोल और डीजल की बेतहाशा बढ़ी हुई कीमतों (कुछ शहरों में तो एक लीटर पेट्रोल के लिए 96 रुपए तक देने पड़ रहे हैं) की शिकायत किए बिना एक मील भी नहीं चल पाते। टेस्ला के भारतीय बाजार में आने के बाद से इलेक्ट्रिक वाहनों को परफेक्ट सॉल्युशन की तरह देखा जा रहा है। लेकिन ऐसा क्या है जो लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने से क्या रोक रहा है?

मानव इतिहास के पिछले दशक में सभी मोर्चों पर टिकाऊ विकास के लिए प्रभावी कोशिशें हुई हैं और पर्यावरणीय प्रदूषण के खिलाफ भी उतने ही ताकतवर प्रयास देखे गए हैं। इसी की वजह से हाल ही में इलेक्ट्रिकल वाहनों (ईवी) को अपनाने को भी रफ्तार मिली है, जो मानव समाज के लिए परिवहन की अगली पीढ़ी के वाहन होने वाले हैं। हालांकि, सभी नई तकनीकों की तरह इसे अपनाने से कूदने से पहले सामान्य संदेह और सवालों का जवाब देना महत्वपूर्ण है। यहां हम चर्चा कर रहे हैं और इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर बने सामान्य मिथकों में से 5 को खत्म कर रहे हैं। 

मिथक 1: इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज होने में वक्त लगता है 

इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का विचार कर रहे लोगों की सबसे आम चिंताओं में से एक यह है कि जब वे ईंधन भरने के लिए जाते हैं तो कुछ ही मिनट में उनकी गाड़ी रीफ्यूल हो जाती है, पर जब बात इलेक्ट्रिक वाहनों की आती है तो उन्हें चार्ज करने में घंटों लग सकते हैं। यह तर्क इलेक्ट्रिक वाहनों के कारण ईंधन के पैटर्न में होने पर बदलाव पर ध्यान नहीं देता है। यदि आपके पास एक पार्किंग ज़ोन या गैराज हैं, तो बुनियादी 240 वोल्ट पावर आउटलेट के साथ इलेक्ट्रिक वाहन को अक्सर रात या यहां तक कि हर कुछ रातों में चार्ज किया जा सकता है। इसका मतलब है कि आप पेट्रोल पंप या सीएनजी स्टेशनों पर लंबी लाइनों से बच सकते हैं। इसी तरह, भारतीय राजमार्गों पर बुनियादी ढांचा विकसित करने के बाद लंबी दूरी तय करना आसान हो जाएगा। वर्तमान सुपरचार्ज आपको 30 से 60 मिनट में एक फुल चार्ज प्रदान करता है; आप इतनी देर में एक स्टॉप पर लंच कर सकते हैं। कई कंपनियां अपने पार्किंग स्थानों में चार्जिंग स्टेशन लगाने पर विचार कर रही हैं और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा बनाने की दिशा में काम कर रही हैं।

एमजी की फास्ट चार्जिंग जेडएस ईवी (ZS EV) को 50 मिनट में 0% -80% तक चार्ज किया जा सकता है। दिल्ली स्थित ईचार्जबेज (eChargeBays) के साथ एमजी के सहयोग से ग्राहक अपने घरों / कार्यालयों में एक एसी फास्ट चार्जर स्थापित कर सकते हैं। एमजी ने चुनिंदा एमजी शोरूम में 10 डीसी 50 किलोवॉट के सुपर-फास्ट चार्जिंग स्टेशनों की लाइन बनाने के लिए फोर्टम चार्ज एंड ड्राइव इंडिया के साथ साझेदारी की है।

मिथक 2: इलेक्ट्रिक वाहन आर्थिक तौर पर अव्यवहारिक है

इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए क्योंकि जब भी कई नई टेक्नोलॉजी आती है तो ऐसा ही कर्व दिखता है। अधिकांश इलेक्ट्रिक वाहन लक्जरी बाजारों में महंगी हैं, पर यह हालात तेजी से बदल रहे हैं- विशेष रूप से भारत में जहां सब्सिडी के माध्यम से लागत में कमी लाई जा रही है और इलेक्ट्रिक वाहनों को अधिक सुलभ बनाया जा रहा है। इसके अलावा, अमेरिका के एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि विशिष्ट रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत पेट्रोल से चलने वाली कारों से आधी है। इलेक्ट्रिक वाहनों में मूव करने वाले हिस्से काफी कम है, जिससे प्रभावी कूलिंग सिस्टम होता है और तेल की जरूरत ही नहीं है।  

सरलतम स्वामित्व अनुभव प्रदान करने के लिए एमजी ने एमजी ईशील्ड पेश किया है, जो निजी तौर पर पंजीकृत ग्राहकों को कार पर असीमित किलोमीटर के लिए 5 साल की मैन्युफैक्चरिंग वारंटी और बैटरी पर आठ साल / 150 हजार किमी की वारंटी प्रदान करता है। यह निजी तौर पर पंजीकृत कारों के लिए 5 साल की अवधि के लिए राउंड-द-क्लॉक रोड साइड असिस्टेंस (RSA) प्रदान करता है, साथ ही साथ 5 लेबर-फ्री सर्विसेस भी प्रदान करता है।
एमजी ईशील्ड पेश करने के अलावा जेडएस ईवी ग्राहकों के लिए वन-स्टॉप सॉल्युशन, एमजी ने कारदेखो.कॉम (CarDekho.com) के साथ एक स्ट्रैटजिक अलायंस बनाया है जो कि अग्रणी 3-50 योजना की पेशकश करता है। यह रीसेल वैल्यू आश्वस्त करता है और ग्राहक जेडएस ईवी की खरीद के समय निर्धारित राशि का भुगतान करके इसका लाभ उठा सकते हैं। कारदेखो.कॉम (CarDekho.com) तीन साल का स्वामित्व पूरा होने पर 50% के बचे हुए मूल्य पर जेडएस ईवी ग्राहकों को गारंटी बायबैक प्रदान करेगा।

मिथक 3: इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी महंगी है और आपको बार-बार बदलनी होगी

लिथियम-आयन (Li-ion) बैटरी रीचार्जेबल बैटरी है जो इलेक्ट्रिक वाहनों और कई पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल होती है। लिथियम-आयन बैटरी उसके कई विकल्पों के मुकाबल सुरक्षित होती है और बैटरी फैल्युर की स्थिति में कंज्यूमर को सुरक्षा प्रदान करने के लिए बैटरी निर्माताओं को सेफ्टी उपाय करना आवश्यक है। 

लिथियम-आयन बैटरी की लागत में लगातार कमी आ रही है और भारत हाई परफॉर्मंस वाली बैटरी में गंभीर निवेश कर रहा है। वर्तमान में, इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी, उदाहरण के लिए, 241,000 किलोमीटर की ड्राइविंग के बाद 90% तक क्षमता रखती है। आम भारतीय ड्राइवर इतनी ड्राइविंग भी नहीं कर पाता। इतना ही नहीं इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियां बैटरी के लिए आठ साल की गारंटी देता है। बैटरी पैक पर वारंटी के लिए, व्यक्तिगत ग्राहकों के लिए एमजी जेडएस ईवी 8 साल / 1,50,000 किमी की वारंटी प्रदान करेगा।  

मिथक 4ः इलेक्ट्रिक वाहन लंबी दूरी की यात्रा के लिए ठीक नहीं है  

इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की कम दर के लिए यह मिथक भी दोषी है कि इन वाहनों की रेंज कम है और एक शहर से दूसरे शहर तक या शहर के बाहर यात्रा करने के लिए भी पर्याप्त नहीं होगी। हालांकि, अत्यंत सक्षम बैटरी वाले इलेक्ट्रिक वाहनों की नई-पीढ़ी की ग्लोबल लाइन यह सुनिश्चित करती है कि वाहनों की रेंज में 300 किमी से ऊपर की यात्रा करने की क्षमता हो। दुनियाभर के ईवी लीडर्स के बाजार में प्रवेश से मौजूदा मार्केट डाइनामिक्स बदलने का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है क्योंकि वे अपने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित ईवी ऑफरिंग्स का लोकलाइजेशन करेंगे और यह भारत में स्थानीय कंज्यूमर-बेस की जरूरतों के अनुकूल होंगे। चार्जिंग स्टेशनों पर सरकार के बढ़ते जोर के साथ जल्द ही एक समय आएगा जब एक निजी इलेक्ट्रिक वाहन दिल्ली से चंडीगढ़ तक की यात्रा कर सकेगा और रास्ते में अधिकतम चार्जिंग स्टेशन भी मिल जाएंगे। हालांकि, एमजी जेडएस ईवी 340 किलोमीटर रेंज को एक बार में कवर कर सकता है और ऑल-इलेक्ट्रिक एमजी साइबरस्टर कॉन्सेप्ट की 800 किमी की अनुमानित रेंज है।

मिथक 5ः इलेक्ट्रिक वाहनों की स्पीड कम है 

यह अतीत में अधिकांश इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर एक विशिष्ट धारणा रही है, पर आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इलेक्ट्रिक रेस कारें भी मौजूद हैं! इलेक्ट्रिक कारों के अधिकांश निर्माता बैटरी चार्ज को संरक्षित करने के लिए टॉप स्पीड को सीमित करते हैं। यही कारण है कि अधिकांश ईवी को इलेक्ट्रिक मोटर की गति को कम करने के उद्देश्य से केवल एक निश्चित अनुपात के साथ डिज़ाइन किया गया है, जो कि आमतौर पर 8000 और 10,000 आरपीएम के बीच होता है, इससे पहले कि यह पहियों पर प्रसारित हो। ईवी पूरे टोर्क को परिवर्तित कर सकते हैं जो उन्हें तुरंत प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जिससे तेजी से स्पीड मिलती है। उपभोक्ता वाहनों में भी इलेक्ट्रिक वाहन 2.5 सेकंड में 0-96 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकते हैं! एक उदाहरण के रूप में, एमजी जेडएस ईवी 8.5 सेकंड में 0-100 किमी / घंटा को कवर कर सकती है: और यह तेज़ है! एमजी भी अपने ऑल-इलेक्ट्रिक एमजी साइबरस्टर के लिए 3 सेकंड से कम के 0-100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार का दावा करता है।

2021 में कई नए इलेक्ट्रिक वाहन लॉन्च हो रहे हैं, जिनमें उच्च प्रत्याशित ऑडी ई-ट्रॉन, वोल्वो एक्ससी40 रिचार्ज, मर्सिडीज-बेंज ईक्यूएस, महिंद्रा ईकेयूवी100, और टाटा अल्ट्रोज़ ईवी- दोनों किफायती और लक्जरी विकल्प शामिल हैं। 

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Web Title: 5 myths that are preventing you from moving India towards electric vehicles
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