AI से बने Content पर चला सरकारी चाबुक..20 फरवरी से नहीं चलेगा ये सब! देखें क्या कहते हैं नए नियम
सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर AI-generated यानी Artificial Intelligence से बने कंटेंट को लेकर नए नियम जारी किए हैं। इन नियमों का मकसद ये सुनिश्चित करना है कि जिस भी कंटेन्ट में AI का इस्तेमाल हुआ है, वह स्पष्ट रूप से लेबल की जाए और उस कंटेन्ट पर किसी भी तरह की भ्रम फैलाने वाली फोटो, वीडियो या टेक्स्ट को आसानी से पहचाना जा सके।
Surveyकब से लागू हो रहे हैं नए नियम
नए नियमों के अनुसार 20 फरवरी 2026 से, Facebook, Instagram, YouTube जैसे प्लेटफ़ॉर्म्स पर AI से बने कंटेंट को clear label (जैसे AI-Generated या Modified by AI) के साथ दिखाया जाना चाहिए, ऐसा भी कह सकते हैं कि इसे अनिवार् कर दिया गया है। इसका सीधा मकसद यह है कि यूज़र को पता चले कि जो भी कंटेन्ट वे देख रहे हैं वह किस तरह से निर्मित है, यानि मशीन से या वास्तविक तौर पर।
सरकार ने सख्त किया ये नियम
सरकार ने यह भी कहा है कि अगर कोई AI या डीपफेक कंटेंट सरकार द्वारा फ्लैग किया जाता है या किसी अदालत का आदेश आता है, तो उसे तीन घंटे के अंदर अंदर प्लेटफॉर्म से हटाना अनिवार्य है। यानी अब प्लेटफ़ॉर्म्स को रोका नहीं जाएगा कि वे कंटेंट को वहीं छोड़ दें। वे इस पर तुरंत कार्रवाई करेंगे। खास बात यह है कि एक बार लागू किए गए AI लेबल या उससे जुड़ा मैटाडेटा प्लेटफ़ॉर्म द्वारा हटाया या दबाया नहीं जा सकता, ताकि कन्फ्यूजन न पैदा हो।

केवल लेबलिंग तक ही सीमित नहीं है ये नियम?
किसी भी तरह के गलत इस्तेमाल आदि को ही मात्र रोकने के लिए ये नियम नहीं बनाए गए हैं, यानि केवल लेबलिंग के लिए ही यह नियम नहीं है। टेक कंपनियों को अब ऑटोमैटेड टूल्स लगाना होगा जो ग़लत, भ्रामक, यौन रूप से शोषणकारी या इनवैलिड AI कंटेंट को खुद पहचान सकें और उसकी सर्कुलेशन को रोक सकें। इसके साथ ही सरकार ने यह भी कहा है कि प्लेटफ़ॉर्म्स को यूज़र्स को नियमित रूप से कम से कम हर तीन महीने में एक बार चेतावनी देनी चाहिए कि AI के दुरुपयोग के क्या परिणाम हो सकते हैं और नियमों का उल्लंघन करने पर क्या सज़ा हो सकती है।
किस उद्देश्य से लागू किए गए हैं नए नियम?
ये दिशा-निर्देश हाल ही में Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) द्वारा पेश किए गए ड्राफ्ट के आधार पर आए हैं, जिनका उद्देश्य 2021 के Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules को और अधिक स्पष्ट बनाना है। ड्राफ्ट नियम यूज़र्स को भी निर्देश देता है कि वे AI-generated या AI-modified कंटेंट पोस्ट करते समय उसको सही प्रकार से बताएं कि आपने यह कंटेन्ट किस तरह से बनाया है। ऐसा भी कह सकते है कि यह नियम AI कंटेन्ट की पहचान के उद्देश्य से लागू किए गए हैं।
इस कदम से न सिर्फ AI-फेक और misleading कंटेंट के फायदे उठाने वाली गतिविधियों पर रोक लगेगी, बल्कि यूज़र्स को भी यह समझने में मदद मिलेगी कि वे जो देख/पढ़/सुन रहे हैं वह वास्तविक है या मशीन द्वारा बनाया गया कंटेन्ट। सरकार की नज़र अब ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स पर भरोसेमंद जानकारी और डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने पर और अधिक सख्ती से बनी हुई है।
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Ashwani Kumar
Ashwani Kumar has been the heart of Digit Hindi for nearly nine years, now serving as Senior Editor and leading the Vernac team with passion. He’s known for making complex tech simple and relatable, helping millions discover gadgets, reviews, and news in their own language. Ashwani’s approachable writing and commitment have turned Digit Hindi into a trusted tech haven for regional readers across India, bridging the gap between technology and everyday life. View Full Profile