सालों नहीं देना होगा ‘बिजली बिल’..फ्री मिलेगी शिमला वाली कूलिंग, जामफाड़ है ये तकनीकी

HIGHLIGHTS

क्या आप फ्री में शिमला वाली कूलिंग चाहते हैं?

इस नई तकनीकी ने कूलर-एसी को फेल कर दिया है।

इस तकनीकी से सालों साल बिजली का बिल नहीं देना होता है!

सालों नहीं देना होगा ‘बिजली बिल’..फ्री मिलेगी शिमला वाली कूलिंग, जामफाड़ है ये तकनीकी

गर्मी से राहत पाने के लिए एसी (AC) के अलावा कोई ढंग का ऑप्शन नहीं है, हालांकि अगर आप सस्ते में अच्छा ऑप्शन चाहते हैं तो आप कूलर को भी खरीदते हैं, लेकिन इन दोनों को मात देने वाली एक तकनीकी बाजार में जल्द ही कदम रख सकती है। Saudi Arabia के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो इस यानि गर्मी और एसी-कूलर को चलाने से बढ़ने वाले बिजली की समस्या को जड़ से खत्म कर सकती है। इस तकनीक का नाम है Nescod जिसका पूरा अर्थ है बिना बिजली के और टिकाऊ तरीके से जरूरत के अनुसार कूलिंग। यह तकनीक इन दिनों पूरी दुनिया में चर्चा में है और Google पर भी खूब सर्च भी की जा रही है। आइए जानते हैं कि यह काम कैसे करती है।

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Nescod तकनीक काम कैसे करती है?

यह तकनीक Endothermic Dissolution नाम की एक रासायनिक प्रक्रिया पर आधारित है। इसमें Ammonium Nitrate नाम के एक नमक को पानी में मिलाया जाता है। जब यह नमक पानी में घुलता है तो आसपास की गर्मी को अपने अंदर खींच लेता है। जितनी ज्यादा गर्मी खिंचती है उतना ज्यादा तापमान नीचे आता है। इसमें न कोई मशीन चाहिए न कोई इंजन बस एक रासायनिक प्रतिक्रिया के माध्यम से इस तकनीकी में कमरे और घर को कूल किया जाता है।

परीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि यह तकनीक 25 डिग्री सेल्सियस के वातावरण को सिर्फ 20 मिनट में 3.6 डिग्री सेल्सियस तक ले आने में सक्षम है। यह नमक दूसरे ठंडक देने वाले नमकों के मुकाबले करीब चार गुना ज्यादा असरदार साबित हुआ।

  • इस तकनीकी की सबसे खास बात यह है कि यह खुद को दोबारा तैयार हो जाती और अपने काम को जारी रखती है।

यह वो बात है जो Nescod को बाकी सब से बिल्कुल अलग बनाती है। जब Ammonium Nitrate गर्मी सोखकर पानी में पूरी तरह घुल जाता है तो सूरज की ऊर्जा की मदद से उस पानी को दोबारा भाप में बदला जाता है। इससे नमक फिर से अपने पुराने रूप में तैयार हो जाता है और दोबारा इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाता है। यानि दिन में सूरज इसे दोबारा तैयार कर देता है और रात को बिना बिजली के एसी जैसी ठंडक मिलना शुरू हो जाती है।

पानी की बचत भी करती है ये तकनीकी

गर्म और सूखे इलाकों में पानी की कमी बड़ी समस्या है। वैज्ञानिकों ने इस तकनीक को इस तरह बनाया है कि भाप बना पानी बर्बाद न हो बल्कि उसे दोबारा इकट्ठा करके फिर से इस्तेमाल किया जा सके। यानि यह तकनीक ठंडक भी देगी और पानी की बड़े पैमाने पर बचत भी करने वाली है।

इतनी चर्चा में क्यों है ये तकनीकी?

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संस्था के अनुसार दुनिया की कुल बिजली खपत का करीब दस प्रतिशत हिस्सा सिर्फ ठंडक देने वाली मशीनों में जाता है। भारत जैसे देश में जहाँ गर्मी अपने चरम पर है और बिजली का बिल देखकर लोग सिर पकड़ लेते हैं वहाँ यह तकनीक एक बड़ी राहत बन सकती है। इसके अलावा जिन इलाकों में बिजली की आपूर्ति ठीक नहीं है या पहुँचती ही नहीं वहाँ भी यह तकनीक वरदान साबित हो सकती है।

क्या कूलर-AC को फेल कर सकती है ये तकनीकी?

अभी के लिए यह तकनीकी शोध और जाँच के दौर में है लेकिन जिस तरह के नतीजे सामने आए हैं वो बहुत उम्मीद जगाते हैं। अगर यह तकनीक आम बाजार में आ जाए तो न बिजली का बिल होगा न मशीन यानि कूलर-एसी का झंझट और न ही पर्यावरण पर कोई बुरा असर। अब देखना यह है कि यह तकनीक कब तक आम लोगों तक पहुँचती है। अगर आने वाले समय में इस तकनीकी ने दुनिया में कदम रखा तो जाहिर तौर पर कूलर-एसी फेल हो जाने वाले हैं?

आर्टिकल में AI से निर्मित इमेज इस्तेमाल हुई है।

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Ashwani Kumar

Ashwani Kumar

Ashwani Kumar has been the heart of Digit Hindi for nearly nine years, now serving as Senior Editor and leading the Vernac team with passion. He’s known for making complex tech simple and relatable, helping millions discover gadgets, reviews, and news in their own language. Ashwani’s approachable writing and commitment have turned Digit Hindi into a trusted tech haven for regional readers across India, bridging the gap between technology and everyday life. View Full Profile