स्मार्टफोन के स्पीकर में इतने सारे छेद क्यों होते हैं? लेकिन फिर भी सबसे क्यों नहीं आती आवाज, जान लीजिए कारण

HIGHLIGHTS

स्मार्टफोन के सभी स्पीकर होल आवाज नहीं निकालते.

कई छोटे छेद माइक्रोफोन और एयर वेंट का काम करते हैं.

यही डिजाइन कॉल क्वालिटी और वाटर रेजिस्टेंस को बेहतर बनाता है.

स्मार्टफोन के स्पीकर में इतने सारे छेद क्यों होते हैं? लेकिन फिर भी सबसे क्यों नहीं आती आवाज, जान लीजिए कारण

अगर आपने कभी अपने स्मार्टफोन के स्पीकर ग्रिल को ध्यान से देखा होगा, तो उसमें कई छोटे-छोटे छेद नजर आए होंगे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनमें से हर छेद से आवाज नहीं निकलती? यह कोई डिजाइन की गलती या मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट नहीं है, बल्कि स्मार्टफोन कंपनियां इन्हें खास तकनीकी वजहों से देती हैं.

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असल में इन छोटे छेदों का इस्तेमाल सिर्फ स्पीकर के लिए नहीं, बल्कि माइक्रोफोन, एयर वेंट और फोन की सुरक्षा जैसी कई अहम जरूरतों के लिए किया जाता है.

हर छेद स्पीकर नहीं होता

ज्यादातर लोगों को लगता है कि स्पीकर ग्रिल में बने सभी छेद स्पीकर के लिए होते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. कई छेद वास्तव में माइक्रोफोन पोर्ट होते हैं. आज के स्मार्टफोन में एक नहीं, बल्कि कई माइक्रोफोन दिए जाते हैं. इनमें एक नीचे चार्जिंग पोर्ट के पास, एक ऊपर और कुछ मॉडल्स में कैमरा मॉड्यूल के आसपास भी माइक्रोफोन मौजूद होता है.

इनका काम आवाज निकालना नहीं, बल्कि आपकी आवाज को बेहतर तरीके से रिकॉर्ड करना होता है.

कई माइक्रोफोन होने से कॉल क्यों होती है साफ?

मॉडर्न स्मार्टफोन में कई माइक्रोफोन होने का सबसे बड़ा फायदा Noise Cancellation है. एक माइक्रोफोन आपकी आवाज रिकॉर्ड करता है, जबकि बाकी माइक्रोफोन आसपास के शोर को कैप्चर करते हैं. इसके बाद फोन का सॉफ्टवेयर बैकग्राउंड नॉइज को कम करके सामने वाले व्यक्ति तक आपकी आवाज ज्यादा साफ पहुंचाता है.

यही वजह है कि ट्रैफिक, बाजार या भीड़भाड़ वाली जगहों पर भी कॉल क्वालिटी पहले के मुकाबले काफी बेहतर रहती है.

कुछ छेद का आवाज से कोई लेना-देना नहीं

स्पीकर या माइक्रोफोन के पास बने कुछ छेद सिर्फ एयर वेंट का काम करते हैं. इनके जरिए फोन के अंदर और बाहर हवा का दबाव संतुलित रहता है. कई कंपनियां इन छेदों के पीछे खास वाटरप्रूफ मेम्ब्रेन लगाती हैं, जो हवा को गुजरने देती है लेकिन पानी को अंदर नहीं जाने देती. इसी वजह से कई स्मार्टफोन बेहतर Water Resistance और टिकाऊपन प्रदान करते हैं.

स्पीकर ग्रिल भी करती है सुरक्षा

असल स्पीकर के ऊपर बनी ग्रिल सिर्फ डिजाइन के लिए नहीं होती. इसके छोटे-छोटे छेद आवाज को बाहर निकलने देते हैं, लेकिन धूल, उंगलियों और अन्य कणों को अंदर जाने से रोकते हैं. इससे स्पीकर की पतली मेम्ब्रेन सुरक्षित रहती है और लंबे समय तक ऑडियो क्वालिटी बेहतर बनी रहती है.

अगर आवाज कम आने लगे तो क्या करें?

अगर आपके फोन के स्पीकर की आवाज धीमी या मफल्ड सुनाई देने लगे, तो जरूरी नहीं कि स्पीकर खराब हो गया हो.

कई बार इन छोटे छेदों में धूल, जेब की रुई या गंदगी जमा हो जाती है, जिससे आवाज प्रभावित होती है. ऐसे में पहले स्पीकर ग्रिल को सावधानी से साफ करें. कई मामलों में सिर्फ सफाई करने से ही ऑडियो पहले जैसा हो जाता है. स्मार्टफोन में दिखने वाले ये छोटे-छोटे छेद भले ही मामूली लगें, लेकिन कॉल क्वालिटी, ऑडियो, वाटर रेजिस्टेंस और डिवाइस की सुरक्षा में इनकी बड़ी भूमिका होती है.

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Sudhanshu Shubham

Sudhanshu Shubham

सुधांशु शुभम (Sudhanshu Shubham) डिजिटल मीडिया में पिछले 6 साल से सक्रिय हैं. टाइम्स ग्रुप (Times Group) में आने से पहले वह न्यूज18 (News18) और आजतक (Aaj Tak) जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक के अलावा इन्होंने हाइपर लोकल बीट, डेटा एनालिसिस का भी काम किया है. View Full Profile