iPhone vs Android: Apple का फोन मतलब सेफ्टी? नई स्टडी में चौंकाने वाले खुलासे, जानें साल 2025 में कौन हैं ज्यादा सेफ
Apple लंबे समय से अपने प्राइवेसी और सिक्योरिटी को लेकर मशहूर रहा है लेकिन एक नए ग्लोबल स्टडी ने इस धारणा को चुनौती दी है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए इस सर्वे के नतीजे बताते हैं कि iPhone उतना सुरक्षित नहीं है जितना यूजर सोचते हैं. दरअसल, iPhone यूजर्स को Android यूजर्स के मुकाबले कहीं अधिक स्कैम और स्पैम मैसेज मिल रहे हैं, जिससे उनकी ऑनलाइन सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है.
Surveyअध्ययन में चौंकाने वाले नतीजे
भारत, अमेरिका और ब्राजील समेत कई देशों में किए गए इस संयुक्त अध्ययन में करीब 5,000 स्मार्टफोन यूजर्स ने हिस्सा लिया. सर्वे में सामने आया कि Android यूजर्स 58% अधिक संभावना रखते हैं कि उन्हें कोई स्कैम मैसेज न मिले. वहीं iPhone यूजर्स 65% अधिक संभावना रखते हैं कि उन्हें एक हफ्ते में तीन या उससे ज्यादा स्पैम मैसेज मिलें.
औसतन iPhone यूजर्स को Android की तुलना में 96% अधिक स्कैम टेक्स्ट मिलते हैं. रिसर्चर्स ने यह भी बताया कि iPhone यूजर्स फिशिंग अटैक और फेक लिंक के जरिए डेटा चोरी या पहचान की जालसाजी (identity fraud) का आसान शिकार बनते हैं.
क्यों झेल रहे हैं iPhone यूजर्स ज्यादा स्पैम?
इसका मुख्य कारण Apple और Google की AI सुरक्षा प्रणाली में फर्क है. Google अपने मैसेजिंग सिस्टम में AI-पावर्ड स्पैम डिटेक्शन का इस्तेमाल करता है, जो किसी संदिग्ध लिंक या संदेश को पहले ही ब्लॉक कर देता है. इसका मतलब कई हार्मफुल मैसेज यूजर्स तक पहुंचते ही नहीं.
Apple का iMessage फिल्टर कमजोर
Apple का iMessage और SMS फिल्टरिंग सिस्टम अभी भी काफी लिमिटेड और कम आक्रामक है. इससे कई स्पैम मैसेज यूजर की स्क्रीन तक पहुंच जाते हैं, और कुछ मामलों में फिशिंग लिंक पर क्लिक करने से डेटा चोरी या वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है. रिपोर्ट ने यह भी कहा कि Apple ने iOS 26 और बाद के अपडेट्स में सुरक्षा फीचर्स जोड़े हैं, लेकिन AI-आधारित फ्रॉड डिटेक्शन की कमी अब भी एक बड़ा अंतर पैदा कर रही है.
AI बना नई साइबर सिक्योरिटी का पहरेदार
Google के शोधकर्ताओं के अनुसार, अब साइबर क्राइम का सबसे बड़ा हथियार AI ही बन चुका है और इसका जवाब भी AI ही है. हर साल AI-एनेबल्ड फ्रॉड और स्कैम के कारण दुनिया भर में लगभग 400 अरब डॉलर (USD 400 billion) का नुकसान हो रहा है. इसी वजह से बड़ी टेक कंपनियां अब Machine Learning और Predictive Algorithms में भारी निवेश कर रही हैं ताकि फ्रॉड को पहले ही रोका जा सके.
इस मामले में Android फिलहाल Apple से कई कदम आगे नजर आ रहा है. Google के AI Message Shield और फ्रॉड डिटेक्शन इंजन सिस्टम अब वैश्विक स्तर पर मैसेज फिल्टरिंग का नया मानक बना रहे हैं.
Apple को अब क्या सुधार करने की जरूरत?
साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि Apple को अपने iMessage और SMS सुरक्षा प्रोटोकॉल को और ज्यादा स्मार्ट और डायनामिक बनाना होगा. एक्सपर्ट्स सुझाव देते हैं कि Apple को अपने फिल्टरिंग एल्गोरिद्म में AI इंटीग्रेशन बढ़ाना चाहिए. यूजर्स को कस्टमाइज्ड प्राइवेसी कंट्रोल देने चाहिए ताकि वे खुद तय कर सकें कौन-से संदेश ब्लॉक हों. स्पैम रिपोर्टिंग फीचर को Android की तरह अधिक इंटरैक्टिव बनाया जाए.
वहीं, यूजर्स के लिए जरूरी है कि वे अनजान नंबरों से आए किसी भी लिंक या OTP रिक्वेस्ट पर क्लिक न करें, चाहे वह “Apple ID verification” जैसा भरोसेमंद मैसेज ही क्यों न लगे.
यह रिपोर्ट एक बात साफ कर देती है Apple का “Privacy First” टैगलाइन अब उतना अभेद्य नहीं रहा जितना यूजर्स मानते हैं. जहां Android लगातार AI-ड्रिवन सिक्योरिटी को उन्नत कर रहा है, वहीं Apple अब भी अपनी पारंपरिक प्रोटेक्शन रणनीति में फंसा दिखता है. भारत जैसे देशों में जहां हर दिन करोड़ों संदेश भेजे जाते हैं, वहां यह अंतर और भी अहम हो जाता है.
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Sudhanshu Shubham
सुधांशु शुभम मीडिया में लगभग आधे दशक से सक्रिय हैं. टाइम्स नेटवर्क में आने से पहले वह न्यूज 18 और आजतक जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक में रूचि होने की वजह से आप टेक्नोलॉजी पर इनसे लंबी बात कर सकते हैं. View Full Profile