AI इंसानों को खत्म कर देगा! Google DeepMind के सेफ्टी रिसर्चर का इस्तीफा, लेटर में लिखा- ‘हमारे पास बहुत कम वक्त बचा है!
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की अनियंत्रित और बेतहाशा रफ्तार क्या वाकई इंसानियत के वजूद के लिए काल बनने जा रही है?
महज चार सालों के भीतर इस तकनीक ने जिस स्पीड से छलांग लगाई है, वह सामान्य से कहीं ज्यादा खतरनाक है।
AI मॉडल्स बिना किसी इंसानी मदद या इनपुट के खुद को ही लगातार अपडेट और ताकतवर बनते जा रहे हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की अनियंत्रित और बेतहाशा रफ्तार क्या वाकई इंसानियत के वजूद के लिए काल बनने जा रही है? यह सवाल अब सिर्फ किसी साइंस-फिक्शन फिल्म की थ्योरी नहीं रहा है, बल्कि दुनिया की सबसे एडवांस्ड एआई लैब्स के अंदर बैठे टॉप रिसर्चर्स के इस्तीफे और उनकी खौफनाक चेतावनियों के मद्देनजर अब सच बनता जा रहा है। हाल ही में एंथ्रोपिक (Anthropic) के पूर्व रिसर्चर जैकब कॉक्सन द्वारा एआई को इंसानी वजूद के खात्मे का जरिया बताकर नौकरी छोड़ने के बाद, अब इस लिस्ट में एक नया नाम गूगल की सबसे प्रतिष्ठित लैब Google DeepMind के प्रमुख सेफ्टी रिसर्चर बिलाल चुगताई (Bilal Chughtai) भी जुड़ गया है। बिलाल ने एआई के अनियंत्रित विकास और एजीआई (AGI) की अंधी दौड़ के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
Surveyइंसानियत के लिए AI को खतरा बता रहे हैं बिलाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किए गए अपने एक लंबे और झकझोर देने वाले पोस्ट में बिलाल चुगताई ने लिखा है कि, “मैंने हाल ही में Google DeepMind से इस्तीफा दे दिया है, जहां मैं AGI (आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस) की सुरक्षा और अलाइनमेंट रिसर्च पर काम कर रहा था। गूगल के अंदर रहकर मैंने एआई के विकास को बहुत करीब से देखा है। यह तकनीक जिस रास्ते पर आगे बढ़ रही है, उसे लेकर मैं बेहद चिंतित हूं। मेरा पक्का मानना है कि AI के भीतर हम सभी (इंसानों) को खत्म करने की पूरी क्षमता है, और इस तबाही से बचने के लिए शायद हमारे पास बहुत कम समय बचा है।”
I recently resigned from Google DeepMind, where I worked on AGI safety and alignment research. At Google, I witnessed AI development first hand. I too am extremely concerned by the default trajectory of this technology. I earnestly believe that AI has the potential to kill us…
— bilal 🔶 (@bilalchughtai_) September 14, 2026
AI का तेजी से बढ़ते जाना बन रहा है बड़ा खतरा
बिलाल ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए बताया कि पिछले महज चार सालों के भीतर इस तकनीक ने जिस स्पीड से छलांग लगाई है, वह सामान्य से कहीं ज्यादा खतरनाक है। उन्होंने याद दिलाया कि जब उन्होंने साल 2022 की शुरुआत में इस फील्ड पर काम शुरू किया था, तब एआई सिस्टम्स काफी बेसिक लेवल के थे। लेकिन आज महज चार वर्षों के भीतर OpenAI और अन्य लैब्स के एआई एजेंट्स सदियों पुरानी जटिल गणितीय पहेलियों को चुटकियों में सुलझा रहे हैं। इससे भी ज्यादा डरावनी बात यह है कि ये सिस्टम्स अब इंसानी नियंत्रण से बाहर निकलकर ऑटोनॉमस बिहेवियर दिखा रहे हैं जैसे कि हाल ही में OpenAI के सिस्टम द्वारा बिना किसी मानवीय निर्देश के थर्ड-पार्टी एआई प्लेटफॉर्म ‘हगिंग फेस’ (Hugging Face) में खुद-ब-खुद सेंध लगा डाली।
आने वाले समय में निर्देश के बिना ही काम करेंगे AI System?
रिसर्चर की सबसे बड़ी चिंता ‘रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूवमेंट’ (Recursive Self-Improvement) को लेकर है। आसान शब्दों में कहें तो यह एआई की वह क्षमता है जहां मॉडल बिना किसी इंसानी मदद या इनपुट के खुद को ही लगातार अपडेट और ताकतवर बनाता रहता है। बिलाल का मानना है कि आने वाले कुछ ही सालों में कंपनियां ऐसे सुपर-इंटेलिजेंट एआई सिस्टम्स तैयार कर लेंगी जो हर क्षेत्र में इंसानी दिमाग से मीलों आगे होंगे। खतरा यह नहीं है कि वे काम नहीं करेंगे, बल्कि खतरा यह है कि वे इंसानी मूल्यों और हमारी मर्जी के खिलाफ जाकर अपने खुद के एजेंडे पर काम करना शुरू कर देंगे।
सर्वनाश से बचने के लिए AI की रफ्तार को कम करना होगा
We Must Pace the Frontier: I’ve written a new essay on why the AI industry should slow down, with a three-part plan for doing so.
— Dario Amodei (@DarioAmodei) September 12, 2026
Anthropic is unilaterally committing to the first of these steps. We’ll provide third-party evaluators with permanent, employee-level access to our…
बिलाल चुगताई के इस इस्तीफे ने नोबेल पुरस्कार विजेता जेफ्री हिंटन (जिन्हें एआई का गॉडफादर कहा जाता है) की उन चेतावनियों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है, जिनमें उन्होंने भी इंसानी विलुप्ति के खतरे की बात कही थी। हालांकि, बिलाल का यह भी मानना है कि अगर अभी भी दुनिया भर की एआई कंपनियां कॉम्पिटिशन की अंधी दौड़ को रोककर एक साथ आएं और विकास की रफ्तार को धीमा करें, तो इस सर्वनाश से बचा जा सकता है। एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई, एलन मस्क और सैम ऑल्टमैन भी हाल के दिनों में सख्त फेडरल नियमों और सुरक्षा उपायों की बात कह चुके हैं। लेकिन सवाल वही खड़ा है। क्या मुनाफे और वर्चस्व की होड़ में जुटी ये दिग्गज टेक कंपनियां समय रहते रफ्तार पर लगाम लगाएंगी, या फिर इंसानियत अनजाने में अपने ही खात्मे का कोड लिख रही है?
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