WhatsApp Username पर सरकार ने कसा शिकंजा, जानिए क्या हैं इस फीचर के 5 नुकसान
WhatsApp अपने एक आगामी फीचर को लेकर अचानक विवादों के बीच घिर गई है। Meta के स्वामित्व वाली कंपनी ने अपने नए यूज़रनेम फीचर को रोलआउट करने की पूरी तैयारी कर ली थी। इसी बीच, अचानक यह खबर सामने आई कि सरकार ने इस फीचर के खिलाफ WhatsApp को नोटिस भेज दिया है, जिस पर कंपनी से 3 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है।
Surveyसरकार ने बुधवार को Meta को भेजे गए नोटिस में आदेश किया कि जब तक इस फीचर को लेकर सरकार और कंपनी के बीच चर्चा और परामर्श की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक ‘व्हाट्सएप यूज़रनेम’ फीचर को भारत में लागू नहीं किया जाना चाहिए।
केंद्र सरकार का मानना है कि इस फीचर का गलत इस्तेमाल होने की आशंका है। अधिकारियों के अनुसार, यूजरनेम की सुविधा आने के बाद पहचान की चोरी और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसी कारण Meta को फिलहाल भारत में इस फीचर की लॉन्चिंग रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने अपने नोटिस में यह भी कहा कि व्हाट्सएप एक Significant Social Media Intermediary (SSMI) है। ऐसे में कंपनी पर IT एक्ट और IT नियमों के तहत निर्धारित सभी कानूनी जिम्मेदारियां और आवश्यक सावधानियां लागू होती हैं।
WhatsApp का क्या कहना है?
WhatsApp के प्रवक्ता के मुताबिक, यूजरनेम फीचर अभी तक किसी भी यूजर के लिए लाइव नहीं किया गया है। कंपनी की योजना इसे इस साल के अंत तक रोलआउट करने की है।

कंपनी ने यह भी बताया कि फर्जी पहचान से बचाव के लिए सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थानों, सेलिब्रिटीज और मेटा वेरिफाइड अकाउंट्स से जुड़े यूजरनेम पहले से रिज़र्व रखे गए हैं। इसके अलावा, उनसे मिलते-जुलते कई अन्य नाम भी रिजर्व किए गए हैं ताकि कोई उनकी नकल न कर सके।
भारत में WhatsApp Username फीचर से जुड़े संभावित खतरे
फर्जी पहचान बनाना हो सकता है आसान
साइबर अपराधी किसी बैंक, सरकारी विभाग, बड़ी कंपनी या लोकप्रिय व्यक्ति से मिलता-जुलता यूजरनेम बनाकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि कंपनी का कहना है कि कई प्रमुख नाम पहले से रिजर्व रखे गए हैं।
ऑनलाइन फ्रॉड बढ़ने की आशंका
अगर फोन नंबर छिपाकर केवल यूजरनेम के जरिए संपर्क किया जाएगा, तो स्कैमर्स के लिए लोगों तक पहुंचना आसान हो सकता है। इससे निवेश स्कैम, फिशिंग और नौकरी से जुड़े फर्जी ऑफर जैसे साइबर अपराध बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
असली और नकली अकाउंट में फर्क करना होगा मुश्किल
फिलहाल WhatsApp पर मोबाइल नंबर दिखाई देता है, जिससे किसी भी व्यक्ति की पहचान आसानी से हो जाती है। लेकिन यूजरनेम आधारित सिस्टम आने के बाद यह समझना कठिन हो सकता है कि सामने वाला व्यक्ति वही है या नहीं। ऐसे में अनजान अकाउंट्स पर भरोसा करना और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौती
अभी किसी साइबर ठगी के मामले में मोबाइल नंबर के आधार पर शुरुआती जांच करना तुलनात्मक रूप से आसान रहता है। लेकिन अगर बातचीत यूजरनेम के जरिए होगी, तो शुरुआती स्तर पर संदिग्ध व्यक्ति तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकता है।
ब्रांड और बिजनेस की नकल का खतरा
बड़े ब्रांड या कंपनियों से मिलते-जुलते यूजरनेम बनाकर ग्राहकों को गुमराह किया जा सकता है। ऐसे मामलों में आर्थिक नुकसान सिर्फ ग्राहकों को ही नहीं बल्कि संबंधित ब्रांड और बिजनेस को भी उठाना पड़ सकता है।
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फाईज़ा परवीन डिजिट हिंदी में एक कॉपी एडिटर हैं। वह 2023 से डिजिट में काम कर रही हैं और इससे पहले वह 6 महीने डिजिट में फ्रीलांसर जर्नलिस्ट के तौर पर भी काम कर चुकी हैं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं, और उनके पसंदीदा तकनीकी विषयों में स्मार्टफोन, टेलिकॉम और ओटीटी शामिल हैं। उन्हें हमारे हिंदी पाठकों को वेब पर किसी डिवाइस या सेवा का उपयोग करने का तरीका सीखने में मदद करने के लिए लेख लिखने में आनंद आता है। सोशल मीडिया की दीवानी फाईज़ा को अक्सर अपने छोटे वीडियो की लत के कारण स्क्रॉलिंग करते हुए देखा जाता है। वह थ्रिलर फ्लिक्स देखना भी काफी पसंद करती हैं। View Full Profile
