Zomato के फाउंडर के सिर पर चिपकी चिप का सच, क्या रोक देगी बुढ़ापा? 225 करोड़ लगा चुके हैं Deepinder Goyal
दीपिंदर गोयल का नया 'टेंपल' डिवाइस
दिमाग का ब्लड फ्लो ट्रैक करेगा
इसके लिए 225 करोड़ का पर्सनल निवेश किया
क्या आपने ज़ोमैटो (Zomato) के CEO दीपिंदर गोयल को हाल ही में राज शमानी के पॉडकास्ट में देखा है? अगर हां, तो शायद आपका ध्यान उनकी बातों से ज्यादा उनके कान के पास चिपकी एक छोटी सी ‘सिल्वर डिवाइस’ पर गया होगा. इसको लेकर इंटरनेट पर लोग कन्फ्यूज हो गए.
Surveyकिसी ने इसे “फैशन” बताया तो किसी ने मजाक में “एक्सटर्नल एसएसडी” (SSD) बता दिया. लेकिन हकीकत यह है कि वह छोटी सी चिप कोई फैशन एक्सेसरी नहीं, बल्कि एक क्रांतिकारी हेल्थ गैजेट है. इसका नाम Temple है और इसके पीछे दीपिंदर गोयल ने अपनी जेब से 225 करोड़ रुपये ($25 Million) का निवेश किया है. आखिर यह डिवाइस क्या करती है और क्या दीपिंदर गोयल उम्र बढ़ने को रोकने का तरीका ढूंढ रहे हैं? आइए डिटेल्स में जानते हैं.
आखिर क्या है Temple?
यह मैटेलिक रंग का क्लिप जैसा डिवाइस वास्तव में एक एक्सपेरिमेंटल वियरेबल है. इसका नाम Temple रखा गया है, क्योंकि यह कनपटी (Temple) के पास लगाया जाता है. यह रीयल-टाइम में दिमाग के ब्लड फ्लो को ट्रैक करता है. साइंस में माना जाता है कि दिमाग में ब्लड का संचार न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य और उम्र बढ़ने का एक प्रमुख संकेत है. यह डिवाइस लगातार मॉनिटर करती है कि आपके दिमाग में खून कैसे दौड़ रहा है.
‘ग्रेविटी एजिंग हाइपोथीसिस’: विज्ञान या कल्पना?
दीपिंदर गोयल सिर्फ शौक के लिए इसे नहीं पहन रहे हैं; वह पिछले एक साल से इसकी टेस्टिंग कर रहे हैं. इसके पीछे उनकी टीम की एक थ्योरी है जिसे “Gravity Ageing Hypothesis” कहा जाता है. दीपिंदर का मानना है कि दशकों तक ग्रेविटी का खिंचाव हमारे शरीर पर असर डालता है. समय के साथ, यह खिंचाव मस्तिष्क तक रक्त के प्रवाह को धीमा कर सकता है, जो बुढ़ापे और स्वास्थ्य में गिरावट का कारण बनता है.

इस डिवाइस के जरिए डेटा इकट्ठा करके, रिसर्चर्स यह समझना चाहते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ हमारे सिर के अंदर क्या बदलाव होते हैं और क्या ग्रेविटी के असर को कम करके उम्र को बढ़ाया जा सकता है?
225 करोड़ का पर्सनल निवेश
यह प्रोजेक्ट ज़ोमैटो (Zomato) का हिस्सा नहीं है. यह दीपिंदर गोयल की पर्सनल रिसर्च पहल, ‘Continue Research’ (जो उनकी कंपनी ‘Eternal’ के अंतर्गत आती है) का हिस्सा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने इस रिसर्च को आगे बढ़ाने के लिए लगभग 2.5 करोड़ डॉलर (करीब 225 करोड़ रुपये) का निवेश किया है. उनके साथ वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स की एक टीम काम कर रही है जो इस डेटा का एनालिसिस करती है.
क्या आप इसे खरीद सकते हैं?
फिलहाल जवाब है-नहीं. Temple अभी पूरी तरह से एक्सपेरिमेंटल स्टेज में है. यह आम जनता या बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं है. इसे अभी केवल रिसर्च के उद्देश्य से डेवलप और टेस्ट किया जा रहा है.
एक्सपर्ट्स की राय
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ब्रेन स्वास्थ्य की निगरानी करने वाले वियरेबल सेंसर रिसर्च का एक एक्टिव एरिया हैं, लेकिन ऐसे डिवाइस आमतौर पर लैब तक सीमित होते हैं. दीपिंदर गोयल इसे लैब से बाहर लाकर वास्तविक दुनिया में टेस्ट कर रहे हैं, जो एक बड़ा कदम है. हालांकि, ‘ग्रेविटी एजिंग’ थ्योरी पर अभी भी वैज्ञानिक समुदाय में बहस जारी है और इसे साबित करने के लिए ठोस सबूतों की जरूरत होगी.
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Sudhanshu Shubham
सुधांशु शुभम मीडिया में लगभग आधे दशक से सक्रिय हैं. टाइम्स नेटवर्क में आने से पहले वह न्यूज 18 और आजतक जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक में रूचि होने की वजह से आप टेक्नोलॉजी पर इनसे लंबी बात कर सकते हैं. View Full Profile