भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस शुरू करने की दिशा में Starlink को एक और बड़ी बढ़त मिलती नजर आ रही है। Moneycontrol और Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक, Digital Communication Commission (DCC) ने सैटेलाइट स्पेक्ट्रम को लेकर Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) की ज्यादातर सिफारिशों को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद भारत में सैटकॉम कंपनियों को कमर्शियल सर्विसेज के लिए स्पेक्ट्रम आवंटित करने का रास्ता साफ हो सकता है।
SurveyDCC, Department of Telecommunications (DoT) की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। अब DoT इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट के सामने रख सकता है। हालांकि, Starlink के अलावा Amazon Leo, Jio Satellite Communications और Eutelsat OneWeb जैसी सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनियों को देश में अपनी सेवाएं शुरू करने से पहले अभी सिक्योरिटी क्लियरेंस हासिल करना बाकी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फैसले में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विसेज के लिए Adjusted Gross Revenue (AGR) का 5 प्रतिशत स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज तय किया गया है। वहीं, निर्धारित ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में सेवाएं देने वाले ऑपरेटर्स के लिए यह प्रभावी चार्ज 4 प्रतिशत रखा गया है।
DCC का यह फैसला TRAI द्वारा दिसंबर 2025 में DoT की ओर से उठाए गए सवालों पर अपना जवाब भेजने के करीब आठ महीने बाद आया है। TRAI ने सैटेलाइट स्पेक्ट्रम को लेकर अपनी शुरुआती सिफारिशें मई 2025 में दी थीं।
TRAI ने क्या सिफारिश की थी?
TRAI ने अपनी शुरुआती सिफारिशों में सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के लिए AGR का 4 प्रतिशत स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज सुझाया था। इसके साथ ही Non-Geostationary Orbit (NGSO) सैटेलाइट सर्विसेज के लिए प्रति शहरी सब्सक्राइबर हर साल 500 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव भी दिया गया था।
इस मामले से जुड़ी रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया था कि GSO और NGSO दोनों तरह के ऑपरेटर्स के लिए TRAI द्वारा प्रस्तावित 4 प्रतिशत AGR चार्ज पर हर साल प्रति MHz कम से कम 3,500 रुपये का स्पेक्ट्रम चार्ज लागू किया जाना था।
DoT ने किन प्रस्तावों को खारिज किया?
DoT ने TRAI की ओर से सुझाए गए प्रति-सब्सक्राइबर शुल्क को स्वीकार नहीं किया। विभाग का कहना था कि ग्रामीण और शहरी यूजर्स के बीच अंतर करना मुश्किल होगा।
इसके अलावा, DoT ने लक्षित ग्रामीण और दूरदराज के ग्राहकों के लिए Digital Bharat Nidhi के जरिए Fixed Satellite Terminals पर सब्सिडी देने के प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया। TRAI ने इसके पक्ष में तर्क देते हुए कहा था कि सैटेलाइट कनेक्शन के लिए जरूरी हार्डवेयर की एकमुश्त कीमत 20,000 रुपये से 50,000 रुपये के बीच हो सकती है, जो अभी तक बिना सेवा वाले और कम सेवा वाले इलाकों में यूजर्स के लिए एक बड़ी बाधा बन सकती है।
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फाईज़ा परवीन डिजिट हिंदी में एक कॉपी एडिटर हैं। वह 2023 से डिजिट में काम कर रही हैं और इससे पहले वह 6 महीने डिजिट में फ्रीलांसर जर्नलिस्ट के तौर पर भी काम कर चुकी हैं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं, और उनके पसंदीदा तकनीकी विषयों में स्मार्टफोन, टेलिकॉम और ओटीटी शामिल हैं। उन्हें हमारे हिंदी पाठकों को वेब पर किसी डिवाइस या सेवा का उपयोग करने का तरीका सीखने में मदद करने के लिए लेख लिखने में आनंद आता है। सोशल मीडिया की दीवानी फाईज़ा को अक्सर अपने छोटे वीडियो की लत के कारण स्क्रॉलिंग करते हुए देखा जाता है। वह थ्रिलर फ्लिक्स देखना भी काफी पसंद करती हैं। View Full Profile
