एक ऐसे माहौल को सोचकर देखिए, जिसमें आप एक ऐसी जगह पर हैं, जहां इंटरनेट का नामों निशान तक नहीं है, हालांकि, इसे ऐसे भी देख सकते हैं कि इंटरनेट यहाँ आ-जा रहा है। इसके अलावा आपके रिचार्ज में देता खत्म होने को है। हालांकि, इसी समय आपको एक ऐसा वीडियो कॉल करना है जो आपकी नौकरी के लिए बेहद ही ज्यादा जरूरी है। अब आप इस कॉल को करेंगे कैसे यह बड़ा सवाल है, क्योंकि आपके पास इंटरनेट है तो वह चल नहीं रहा है और आप इस स्थिति में जल्दी से ऐसे स्थान पर भी नहीं जा सकते हैं, जहां आपको इंटरनेट मिल जाए।
दूसरे उदाहरण को देखा जाए तो आप एक ऐसी जगह पर हैं, जहां ऊपर वाला नहीं माहौल है और आपको इस समय लाइव टीवी पर कुछ चेक करना है, लेकिन वह इंटरनेट न होने की स्थिति में चल ही नहीं रहा है। अब जरा सोचकर देखिए कि अगर इस समय लाइव टीवी चल जाए तो आपकी कितनी बड़ी मुसीबत कम हो सकती है। इसका मतलब है कि इंटरनेट चले या न चले, लाइव टीवी आपके फोन में रेडियो की तरह चल जाने वाले हैं। अभी तक यह कल्पना मात्र थी लेकिन जल्द ही यह सच होने वाला है। इंटरनेट पर सुर्खियों में बनी हुई एक खबर ऐसा ही कहती है कि प्रसार भारती अगले महीने Direct-to-Mobile, यानी D2M ब्रॉडकास्टिंग का कमर्शियल रोलआउट करने वाली है, इसके लिए RFP जारी किया जा सकता है। अब अगर ऐसा होने वाला है तो आइए जानते हैं इसके फायदे नुकसान क्या हो सकते हैं।
D2M उस सेल्युलर नेटवर्क पर निर्भर नहीं करता, जिससे आप कॉल और इंटरनेट चलाते हैं। यह वैसे ही काम करता है जैसे फोन में FM रेडियो, जहां रिसीवर रेडियो फ्रीक्वेंसी पकड़ लेता है। अभी इसका इस्तेमाल आम तौर पर इमरजेंसी अलर्ट भेजने के लिए किया जा रहा है, लेकिन कमर्शियल रोलआउट से लाइव न्यूज, स्पोर्ट्स और मल्टीमीडिया कंटेंट भी आपको अपने फोन पर बिना इंटरनेट और रिचार्ज के देखने को मिल सकता है। यह कमजोर इंटरनेट वाले इलाकों में भी काम करने में सक्षम है, इस सेवा के आने से मोबाइल डेटा नेटवर्क पर दबाव भी घट सकता है।
प्रसार भारती, IIT कानपुर और Saankhya Labs (अब Tejas Networks का हिस्सा) के साथ 19 से ज्यादा शहरों में इसका ट्रायल कर रहा है। इससे पहले दिल्ली और बेंगलुरु के डेमो में दिखाया जा चुका है, इससे मल्टीमीडिया कंटेंट सीधे मोबाइल तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, Tejas Networks के उपकरणों वाले वैलिडेशन टेस्ट सरकारी समीक्षा में पास हुए, जिससे योजना को रफ्तार मिली है। IIT कानपुर की स्टडी में पाया गया कि 470-582 MHz बैंड में D2M से सेल्युलर नेटवर्क में नुकसानदेह दखल नहीं होता और स्मार्टफोन असामान्य रूप से गर्म भी नहीं होते। एक अन्य रिपोर्ट ने देशव्यापी लॉन्च के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल की सिफारिश की है।
सरकार इसे टीवी पहुंच की कमी का संभावित हल भी बता रही है। आधिकारिक अनुमान के मुताबिक देश के करीब 28 करोड़ घरों में से लगभग 19 करोड़ के पास टीवी सर्विस है, यानी करीब 9 करोड़ घर अब भी टीवी सेवाओं का लाभ नहीं ले पाते हैं। अगर यह सेवा आती है तो इससे उन 9 करोड़ घरों को भी बड़ा फायदा होने वाला है।
हालांकि, हम सपना तो देख रहे हैं कि देश में इस सेवा को जल्द ही पेश कर दिया जाएगा और इसके बाद सभी तरह की समस्या, रिचार्ज से मुक्ति और इंटरनेट के बिना भी लाइव टीवी फोन पर चलेंगे, लेकिन यह इतना आसान नहीं है। IIT कानपुर के 2022 के रोडमैप पेपर के मुताबिक ज्यादातर मौजूदा मोबाइल D2M सपोर्ट नहीं करते, क्योंकि इसके लिए ATSC 3.0 स्टैंडर्ड चाहिए। साथ में अलग बेसबैंड प्रोसेसिंग यूनिट, एंटीना, लो-नॉइज एम्प्लीफायर, बेसबैंड फिल्टर और रिसीवर भी लगेंगे। इसे देखते हुए अगर अभी की बात की जाए तो मौजूदा नेटवर्क बड़े पैमाने पर इसके लिए तैयार ही नहीं है। इसके लिए टेरेस्ट्रियल टावरों का ज्यादा घना जाल चाहिए। निजी टेलीकॉम ऑपरेटर भी इसे लेकर चिंता जता चुके हैं क्योंकि इससे उनके कारोबार पर असर पड़ सकता है।
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