डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के इस दौर में साइबर धोखाधड़ी के मामले बहुत अधिक और बड़ी ही तेजी से बढ़ते ही जा रहे हैं। फर्जी लिंक, ओटीपी स्कैम या अनजान कॉल्स के जरिए पलक झपकते ही लोगों की मेहनत की कमाई पर सेंध लगाई जा रही है। पलक झपकते ही लोगों के अकाउंट से पैसा फुर्र हो जा रहा है। ऐसे किसी भी फ्रॉड का शिकार होने के बाद पीड़ित के दिमाग में सबसे बड़ा सवाल यही आता है कि क्या खाते से कटा हुआ पैसा कभी वापस मिल सकता है? अगर आप भी इस सवाल को लेकर चिंता में हैं और आपके साथ कैसे भी करके कोई साइबर फ्रॉड हुआ है और आपने इसमें पैसा गंवाया है तो आपके लिए यह जानकारी बेहद ही महत्त्वपूर्ण है। असल में, इस सवाल का जवाब अब सीधे सरकार की ओर से ही आ चुका है, गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के आधिकारिक जागरूकता हैंडल CyberDost ने स्पष्ट किया है कि सही समय पर सही कदम उठाने से साइबर फ्रॉड में गँवाए गए पैसे वापिस प्राप्त किए जा सकते हैं। जी आपने सही पढ़ा है, ऐसा संभव है, लेकिन इसके लिए आपको क्या करना चाहिए, आइए जानते हैं।
ऑनलाइन फ्रॉड या ठगी की स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका समय की होती है। साइबर दोस्त के अनुसार, फ्रॉड का अहसास होते ही बिना एक मिनट भी गंवाए पीड़ित को सबसे पहले राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए या फिर नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) की आधिकारिक वेबसाइट cybercrime.gov.in पर उसी समय शिकायत दर्ज करानी चाहिए। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, उतनी ही तेजी से पुलिस और बैंक फ्रॉड की रकम को ठगों के खातों में होल्ड या फ्रीज करने में कामयाब हो सकेंगे।
Your money has been put on hold after a cyber fraud complaint. What happens next? pic.twitter.com/9hn2ckoDJB
— CyberDost I4C (@Cyberdost) September 24, 2026
साइबर फ्रॉड में गंवाए पैसे वापस दिलाने के लिए जांच एजेंसियां और बैंक मिलकर मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल (Money Restoration Module: MRM) का इस्तेमाल करते हैं। यह एक अत्याधुनिक डिजिटल सिस्टम है जो योग्य मामलों में ठगे गए फंड्स को पीड़ित के असली अकाउंट में वापस रिस्टोर करने की प्रक्रिया को ऑटोमेट और फास्ट बनाता है।
जैसे ही पीड़ित 1930 पर कॉल करता है, संबंधित बैंक नोडल अधिकारी अलर्ट हो जाते हैं और पैसे के डिजिटल ट्रेल को ट्रैक करना शुरू कर देते हैं। इस प्रक्रिया के जरिए ठगों द्वारा जिस बैंक खाते या वॉलेट में पैसा भेजा गया होता है, वहां उस अमाउंट पर तुरंत ‘डेबिट फ्रीज’ लगा दिया जाता है। इसके बाद कानूनी औपचारिकताएं पूरी होते ही MRM फ्रेमवर्क के जरिए होल्ड की गई राशि को पीड़ित के खाते में वापस ट्रांसफर करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।
यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि रिफंड की यह सुविधा केवल उन्हीं मामलों में पूरी तरह काम करती है जहां शिकायत समय रहते दर्ज करा दी गई हो और बैंक ठगों के खाते से पैसे निकलने से पहले उस पर रोक लगाने में कामयाब हो जाए।
यदि शिकायत दर्ज करने में घंटों या दिनों की देरी हो जाती है और शातिर ठग पैसे को एटीएम से कैश निकाल लेते हैं या उसे कई लेयर्स वाले फर्जी खातों में ट्रांसफर कर देते हैं, तो पैसे की रिकवरी काफी जटिल हो जाती है। इसलिए साइबर फ्रॉड का शिकार होने पर घबराने या बैंक की शाखा जाने में समय बर्बाद करने के बजाय सबसे पहले अपने फोन से 1930 डायल करें या साइबर पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं। समय पर उठाया गया यही एक कदम आपके पैसे को डूबने से बचा सकता है।
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