आपने सोचा टी-शर्ट या शूज..और दिखने लगे उसके ऐड, क्या फोन सुनता रहता है आपकी बात? जान लीजिए सच्चाई

HIGHLIGHTS

ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला कि स्मार्टफोन विज्ञापन दिखाने के लिए आपकी बातचीत रिकॉर्ड कर रहे हैं.

विज्ञापन मुख्य रूप से आपकी सर्च हिस्ट्री, लोकेशन और ऑनलाइन गतिविधियों के आधार पर दिखाए जाते हैं.

माइक्रोफोन और विज्ञापन ट्रैकिंग सेटिंग्स की जांच करके आप अपनी प्राइवेसी बेहतर बना सकते हैं.

आपने सोचा टी-शर्ट या शूज..और दिखने लगे उसके ऐड, क्या फोन सुनता रहता है आपकी बात? जान लीजिए सच्चाई

भारत समेत दुनिया भर में करोड़ों स्मार्टफोन यूजर्स ने कभी न कभी एक अजीब चीज जरूर नोटिस की होगी. आपने किसी दोस्त या परिवार के सदस्य से किसी प्रोडक्ट के बारे में बात की और कुछ ही घंटों बाद उसी प्रोडक्ट के विज्ञापन आपके सोशल मीडिया फीड पर दिखाई देने लगे. ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही आता है कि क्या स्मार्टफोन हमारी बातें सुन रहा है?

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इस सवाल का सीधा जवाब तकनीकी कंपनियों और शोधकर्ताओं के अनुसार “नहीं” है. लेकिन इसके पीछे की असली कहानी कहीं ज्यादा दिलचस्प और कई लोगों के लिए चिंताजनक भी हो सकती है. अच्छी बात यह है कि आपके फोन में कुछ ऐसे सेटिंग्स मौजूद हैं जिन्हें अभी जांचकर आप अपनी प्राइवेसी को बेहतर बना सकते हैं.

क्या सच में आपकी बातचीत सुनते हैं Google और Meta?

Meta कई बार सार्वजनिक रूप से यह साफ कर चुका है कि वह विज्ञापन दिखाने के लिए माइक्रोफोन से रिकॉर्ड की गई आवाज का इस्तेमाल नहीं करता.

Meta के सीईओ Mark Zuckerberg ने अमेरिकी कांग्रेस में गवाही के दौरान भी यही बात कही थी. वहीं Google का कहना है कि उसका वॉयस असिस्टेंट केवल “Hey Google” जैसे वेक वर्ड्स को पहचानने के लिए सुनता है और बाकी ऑडियो को विज्ञापन के लिए प्रोसेस नहीं किया जाता.

एक महत्वपूर्ण अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 17,000 से अधिक Android ऐप्स का विश्लेषण किया और उन्हें ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला कि ऐप्स बिना अनुमति के माइक्रोफोन चालू करके बातचीत रिकॉर्ड कर रहे हों. यानी वैज्ञानिक जांच के अनुसार “फोन चोरी-छिपे आपकी बातें सुनकर विज्ञापन दिखाता है” वाली थ्योरी सही साबित नहीं हुई है.

फिर इतने सटीक विज्ञापन कैसे दिखाई देते हैं?

यही वह हिस्सा है जो कई लोगों को हैरान कर सकता है.

असल में आपके फोन को आपकी बातचीत रिकॉर्ड करने की जरूरत ही नहीं पड़ती. आधुनिक एल्गोरिदम पहले से ही आपके व्यवहार का अनुमान लगाने में बेहद सक्षम हो चुके हैं. आपने पिछले सप्ताह किसी जूते की जानकारी सर्च की होगी, सोशल मीडिया पर किसी जूते वाली वीडियो पर कुछ सेकंड ज्यादा रुके होंगे या फिर जिस व्यक्ति से आप बात कर रहे थे उसने पहले ही उस प्रोडक्ट को खोजा होगा.

आपकी लोकेशन, सर्च हिस्ट्री, स्क्रॉलिंग पैटर्न, ऐप उपयोग और हजारों अन्य डिजिटल संकेतों को जोड़कर एल्गोरिदम यह अंदाजा लगा लेते हैं कि आपको किस तरह के विज्ञापन दिखाए जाएं. यही वजह है कि कई बार विज्ञापन इतने सटीक लगते हैं कि ऐसा महसूस होता है जैसे फोन आपकी बातचीत सुन रहा हो.

आपके फोन में हमेशा सक्रिय रहता है माइक्रोफोन

भले ही विज्ञापन के लिए बातचीत रिकॉर्ड नहीं की जाती, लेकिन वॉयस असिस्टेंट फीचर्स की वजह से माइक्रोफोन बैकग्राउंड में सक्रिय रह सकता है.

iPhone में Siri और Android फोन में Google Assistant जैसे फीचर्स “Hey Siri” या “OK Google” जैसे वेक वर्ड्स सुनने के लिए लगातार निगरानी करते रहते हैं. जब सिस्टम को लगता है कि वेक वर्ड बोला गया है, तब एक छोटा ऑडियो क्लिप प्रोसेस किया जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार गलती से भी ये फीचर्स सक्रिय हो सकते हैं.

iPhone यूजर्स ये सेटिंग जरूर जांचें

अगर आप iPhone इस्तेमाल करते हैं तो Settings में जाएं और Privacy & Security सेक्शन खोलें.

इसके बाद Microphone विकल्प पर टैप करें. यहां आपको उन सभी ऐप्स की सूची दिखाई देगी जिन्होंने माइक्रोफोन की अनुमति मांगी है.

जिन ऐप्स को माइक्रोफोन की जरूरत नहीं है, उनकी अनुमति बंद कर सकते हैं.

इसके अलावा Settings में Siri & Search सेक्शन में जाकर “Listen for Hey Siri” विकल्प को भी बंद किया जा सकता है, खासकर अगर आप Siri का ज्यादा उपयोग नहीं करते.

Android यूजर्स क्या करें?

Android फोन में Settings खोलकर Privacy सेक्शन में जाएं.

इसके बाद Permission Manager में Microphone विकल्प चुनें.

यहां आप देख सकते हैं कि कौन-कौन से ऐप्स माइक्रोफोन का उपयोग कर रहे हैं और जरूरत न होने पर उनकी अनुमति हटा सकते हैं.

नए Android वर्जन में Auto Remove Permissions फीचर भी मिलता है. यह लंबे समय से उपयोग नहीं किए गए ऐप्स से संवेदनशील परमिशन अपने आप हटा देता है.

विज्ञापन कम करने के लिए यह सेटिंग भी बदलें

माइक्रोफोन से ज्यादा महत्वपूर्ण विज्ञापन ट्रैकिंग होती है.

iPhone यूजर्स Settings > Privacy & Security > Tracking में जाकर “Allow Apps to Request to Track” विकल्प को बंद कर सकते हैं.

Android यूजर्स Settings > Google > Ads में जाकर अपना Advertising ID डिलीट कर सकते हैं.

इससे कंपनियों के लिए आपकी गतिविधियों के आधार पर विज्ञापन दिखाना कुछ हद तक मुश्किल हो सकता है.

असली खतरा बातचीत नहीं, डेटा ट्रैकिंग है

सच्चाई यह है कि आपका स्मार्टफोन विज्ञापन दिखाने के लिए आपकी हर बातचीत नहीं सुन रहा है. लेकिन वह आपकी ऑनलाइन गतिविधियों, लोकेशन, ऐप उपयोग और कई अन्य डिजिटल संकेतों के जरिए आपके बारे में काफी कुछ जानता है. ऐसे में प्राइवेसी सेटिंग्स की नियमित जांच करना और अनावश्यक परमिशन हटाना आपकी डिजिटल सुरक्षा के लिए एक अच्छा कदम साबित हो सकता है.

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Sudhanshu Shubham

Sudhanshu Shubham

सुधांशु शुभम (Sudhanshu Shubham) डिजिटल मीडिया में पिछले 6 साल से सक्रिय हैं. टाइम्स ग्रुप (Times Group) में आने से पहले वह न्यूज18 (News18) और आजतक (Aaj Tak) जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक के अलावा इन्होंने हाइपर लोकल बीट, डेटा एनालिसिस का भी काम किया है. View Full Profile