Airplane Mode ऑन करते ही रेडिएशन का खतरा हो जाता है खत्म? आज जान लीजिए सच्चाई
Airplane Mode ऑन करने से मोबाइल नेटवर्क, Wi-Fi और Bluetooth सिग्नल काफी हद तक बंद हो जाते हैं.
यह फोन से निकलने वाले RF रेडिएशन को कम करता है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं करता.
सोते समय Airplane Mode इस्तेमाल करने से बैटरी बच सकती है और वायरलेस सिग्नल एक्सपोजर कम हो सकता है.
भारत समेत दुनिया भर में करोड़ों स्मार्टफोन यूजर्स अक्सर यह सवाल पूछते हैं कि क्या Airplane Mode ऑन करने से फोन का रेडिएशन पूरी तरह बंद हो जाता है? खासकर फ्लाइट के दौरान, रात में सोते समय या लंबे समय तक फोन इस्तेमाल करने वाले लोग इस बारे में जानना चाहते हैं. 2026 में भी मोबाइल फोन रेडिएशन को लेकर इंटरनेट पर काफी चर्चा हो रही है.
Surveyविशेषज्ञों के अनुसार Airplane Mode फोन से निकलने वाले रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) सिग्नल को काफी हद तक कम कर देता है, लेकिन यह हर तरह के रेडिएशन को पूरी तरह बंद नहीं करता.
अक्सर लोग “रेडिएशन” शब्द सुनकर घबरा जाते हैं, जबकि इसके अलग-अलग प्रकार होते हैं और सभी एक जैसे नहीं होते.
जब आप अपने स्मार्टफोन में Airplane Mode ऑन करते हैं, तो फोन के वायरलेस ट्रांसमीटर बंद हो जाते हैं. इसका मतलब है कि मोबाइल नेटवर्क, मोबाइल डेटा, Wi-Fi और Bluetooth जैसी सुविधाएं आमतौर पर बंद हो जाती हैं, जब तक कि आप उन्हें दोबारा मैन्युअली चालू न करें.
यही वायरलेस कनेक्शन रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल का मुख्य स्रोत होते हैं. फोन इन्हीं सिग्नल्स की मदद से मोबाइल टावर और नेटवर्क से संपर्क करता है. अमेरिकी Federal Communications Commission (FCC) के अनुसार जब वायरलेस कम्युनिकेशन बंद होता है, तब स्मार्टफोन बहुत कम RF सिग्नल उत्सर्जित करता है. वहीं World Health Organization (WHO) का भी कहना है कि मोबाइल फोन इस्तेमाल के दौरान यूजर्स RF फील्ड्स के संपर्क में आते हैं, खासकर तब जब डिवाइस नेटवर्क से जुड़ा होता है.

सरल शब्दों में कहें तो Airplane Mode ऑन करने के बाद आपका फोन नजदीकी मोबाइल टावरों से बातचीत करना बंद कर देता है, जिससे RF सिग्नल में बड़ी कमी आ जाती है.
क्या Airplane Mode रेडिएशन को पूरी तरह खत्म कर देता है?
इसका सीधा जवाब है, नहीं.
Airplane Mode ऑन होने के बाद भी आपका स्मार्टफोन पूरी तरह निष्क्रिय नहीं होता. फोन की स्क्रीन, बैटरी और अंदर मौजूद इलेक्ट्रॉनिक सर्किट्स काम करते रहते हैं. इनके कारण थोड़ी मात्रा में ऊर्जा का उत्सर्जन होता है, लेकिन यह मोबाइल नेटवर्क से जुड़े RF सिग्नल जैसा नहीं होता.
विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे ज्यादा कमी कम्युनिकेशन आधारित उत्सर्जन में आती है. यदि Airplane Mode के साथ Wi-Fi और Bluetooth भी बंद रहें, तो रेडियो फ्रीक्वेंसी एक्सपोजर और अधिक कम हो जाता है.
हालांकि यदि आप Airplane Mode ऑन करने के बाद Wi-Fi या Bluetooth दोबारा चालू कर देते हैं, तो फोन फिर से वायरलेस सिग्नल भेजना शुरू कर देता है.
यानी Airplane Mode रेडिएशन को काफी हद तक कम करता है, लेकिन फोन को पूरी तरह सिग्नल-फ्री डिवाइस नहीं बनाता.
रात में लोग Airplane Mode क्यों इस्तेमाल करते हैं?
कई लोग सोने से पहले Airplane Mode ऑन कर देते हैं. इसके पीछे अलग-अलग कारण होते हैं. कुछ लोग बैटरी बचाने के लिए ऐसा करते हैं, कुछ नोटिफिकेशन और कॉल्स से बचने के लिए, जबकि कुछ लोग RF सिग्नल के संपर्क को कम करना चाहते हैं, खासकर जब फोन उनके बिस्तर के पास रखा हो.
Airplane Mode इस्तेमाल करने से बैटरी की खपत भी कम हो सकती है क्योंकि फोन लगातार नेटवर्क सर्च नहीं करता.

घबराने की जरूरत नहीं
अगर आप Airplane Mode का इस्तेमाल रेडिएशन कम करने के लिए करते हैं, तो यह वास्तव में मददगार है. हालांकि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर किए जाने वाले कई दावे इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं.
सच्चाई यह है कि Airplane Mode वायरलेस सिग्नल से होने वाले उत्सर्जन को काफी कम कर देता है, लेकिन फोन तब भी एक सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बना रहता है. इसलिए इसे पूरी तरह रेडिएशन-फ्री कहना सही नहीं होगा.
फोन की सेटिंग्स और तकनीक को सही तरीके से समझकर आप बिना किसी बेवजह की चिंता के बेहतर और सुरक्षित तरीके से स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर सकते हैं.
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सुधांशु शुभम (Sudhanshu Shubham) डिजिटल मीडिया में पिछले 6 साल से सक्रिय हैं. टाइम्स ग्रुप (Times Group) में आने से पहले वह न्यूज18 (News18) और आजतक (Aaj Tak) जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं. टेक के अलावा इन्होंने हाइपर लोकल बीट, डेटा एनालिसिस का भी काम किया है. View Full Profile
