रेल मंत्री ने लॉन्च किया Rail Tech Portal..देखें कैसे आम यात्रियों के लिए होगा मददगार, क्या अब तेजी से निपट पाएंगे ये काम?
रेल मंत्रालय ने ’52 Reforms in 52 Weeks’ पहल के तहत दो अहम सुधारों (Rail Tech Policy और e-RCT (Railway Claims Tribunal)) के दूसरे चरण की घोषणा की है। केंद्रीय रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने इन उपायों को तकनीक-आधारित बदलाव और तेज़, पारदर्शी सेवा की दिशा में बड़ा कदम बताया। नीति का फोकस साफ है: रेलवे में नई तकनीक की संगठित एंट्री और क्लेम प्रक्रिया का एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण करना।
SurveyRail Tech Portal: लॉन्च किया गया पोर्टल, कैसे आएगा काम
Rail Tech Policy के तहत 24×7 Rail Tech Portal लॉन्च किया गया है। यह एक डेडिकेटेड प्लेटफॉर्म होगा जहां स्टार्टअप्स, इनोवेटर्स और इंडस्ट्री अपनी तकनीकी प्रस्तावना सीधे रेलवे को भेज सकेंगे। मंत्री ने संकेत दिया कि रेलवे AI-सक्षम और एडवांस टेक्नोलॉजी अपनाने पर जोर दे रहा है। वैष्णव ने यह भी बताया है कि आखिर किस और किन जगहों पर AI की मदद ली जाने वाली है, इनमें शामिल हैं:
🚆 3rd Railway Reform in 2026
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) February 26, 2026
➡️ Rail Tech Policy & Portal launched: Driving innovation in Indian Railways
✅ Simplified single-stage proposals | Open innovation challenges | 3x scale-up grants pic.twitter.com/ihrSS1F5kW
- ड्रोन आधारित टूटी रेल की पहचान प्रणाली
- रेल स्ट्रेस मॉनिटरिंग सिस्टम
- पार्सल वैन (VPU) में सेंसर आधारित लोड कैलकुलेशन
- कोचों पर सोलर पैनल इंस्टॉलेशन
- अन्य सुरक्षा और मेंटेनेंस समाधान
क्या आम लोगों के लिए होगा मददगार?
रेलवे जैसा विशाल नेटवर्क अगर चुनौतियों को ‘ओपन इनोवेशन’ मॉडल से हल करने की कोशिश करता है, तो इससे स्केलेबल और तेजी से लागू होने वाले समाधान मिल सकते हैं। खासकर ड्रोन और AI-आधारित मॉनिटरिंग से सुरक्षा मानकों में व्यावहारिक सुधार दिख सकता है।
सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना चाहता है रेलवे!
रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा से जुड़े स्टार्टअप्स को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद मेंटेनेंस और अन्य परिचालन चुनौतियों पर काम करने वाले प्रस्तावों पर विचार होगा। यह संकेत देता है कि रेलवे दुर्घटना-रोकथाम और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस जैसे क्षेत्रों में गंभीरता से निवेश करना चाहता है।
e-RCT Phase 2: क्लेम प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी
Railway Claims Tribunal के दूसरे चरण में पूरी कंप्यूटरीकरण और डिजिटलीकरण लागू किया गया है।
- अब क्या बदल जाएगा?
- 24×7 ई-फाइलिंग सुविधा
- ऑनलाइन सुनवाई
- आदेशों तक तुरंत डिजिटल पहुंच
- दुर्घटना और अनहोनी मामलों के क्लेम ऑनलाइन जमा
यात्रियों के लिए क्या जरूर और कैसे फायदेमंद?
- लंबी लाइन और कागजी प्रक्रिया से राहत मिलेगी
- समय और यात्रा खर्च में बचत होगी
- केस ट्रैकिंग में पारदर्शिता आएगी
क्या वाकई हम डिजिटल गवर्नेंस की ओर बढ़ रहे हैं?
क्लेम प्रक्रिया का डिजिटलीकरण केवल सुविधा का मामला नहीं है, बल्कि भरोसे का भी है। अगर सुनवाई और दस्तावेज़ मैनेजमेंट समयबद्ध और ऑनलाइन हो जाए, तो पीड़ित परिवारों को राहत तेज़ी से मिल सकती है।
बड़े बदलाव की ओर इशारा
रेल मंत्रालय का यह कदम केवल पोर्टल लॉन्च तक सीमित नहीं दिख रहा है। यह एक संकेत है कि रेलवे अपने पारंपरिक ढांचे से आगे बढ़कर टेक-ड्रिवन गवर्नेंस मॉडल की ओर बढ़ रहा है। अगर Rail Tech Portal पर आने वाले प्रस्तावों का बड़ी तेजी से मूल्यांकन और पायलट परीक्षण सुनिश्चित किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में रेलवे में कई व्यावहारिक और सही दिशा वाले बदलाव नजर आ सकते हैं।
Rail Tech Policy और e-RCT Phase 2 दो अलग सुधार नहीं, बल्कि एक संयुक्त रणनीति का हिस्सा हैं। एक तरफ इनोवेशन को आमंत्रण, दूसरी तरफ प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण होता नजर आ रहा है। अब असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी, कितनी तेजी से तकनीक जमीन पर उतरती है और कितनी सहजता से यात्री नई डिजिटल सुविधाओं का लाभ उठा पाते हैं, यह देखना दिलचस्प होने वाला है।
Ashwani Kumar
Ashwani Kumar has been the heart of Digit Hindi for nearly nine years, now serving as Senior Editor and leading the Vernac team with passion. He’s known for making complex tech simple and relatable, helping millions discover gadgets, reviews, and news in their own language. Ashwani’s approachable writing and commitment have turned Digit Hindi into a trusted tech haven for regional readers across India, bridging the gap between technology and everyday life. View Full Profile