भारत के Indian Cyber Crime Coordination Centre ने पर्यटकों को फर्जी ताजमहल टिकट बेचने वाली वेबसाइट्स के खिलाफ चेतावनी जारी की है. यह वेबसाइट खुद को आधिकारिक ताजमहल बुकिंग प्लेटफॉर्म के रूप में पेश कर रही है और पर्यटकों से विजिट के नाम पर पैसे ले रही है. यह एडवाइजरी साइबर जागरूकता पहल CyberDost के आधिकारिक X अकाउंट के जरिए जारी की गई है. अधिकारियों ने हाल ही में ‘ticketstajmahal.com’ डोमेन पर चल रही एक संदिग्ध वेबसाइट को नोटिस किया है.
चेतावनी के अनुसार, यह पोर्टल कथित तौर पर एक असली बुकिंग सर्विस की नकल करता है. यह लोगों को यह विश्वास दिला रहा है कि यह आधिकारिक ताजमहल बुकिंग प्लेटफॉर्म है. पर्यटक इस फर्जी वेबसाइट पर भुगतान कर रहे हैं और अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा कर रहे हैं.
अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की वेबसाइट्स अक्सर असली सरकारी या टूरिज्म पोर्टल जैसी दिखने के लिए डिजाइन की जाती हैं. इससे कई लोगों के लिए इन्हें नकली पहचानना मुश्किल हो जाता है.
साइबर क्राइम विशेषज्ञ बताते हैं कि फर्जी ट्रैवल और टिकट बुकिंग पोर्टल्स का इस्तेमाल तेजी से पर्यटकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है. खासकर छुट्टियों और ट्रैवल सीजन के दौरान ऐसे मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है.
ये वेबसाइट्स न केवल तेज बुकिंग का वादा करती हैं, बल्कि सस्ते टिकट और खास ऑफर भी देती हैं ताकि ग्राहक आकर्षित हों. जैसे ही यूजर्स अपनी पेमेंट डिटेल या पर्सनल जानकारी डालते हैं, स्कैमर उस डेटा का इस्तेमाल फाइनेंशियल फ्रॉड के लिए करने लगते हैं. इससे पहचान चोरी का खतरा भी बढ़ जाता है.
CyberDost ने यूजर्स को इन फर्जी वेबसाइट्स से सावधान रहने और कोई भी ऑनलाइन पेमेंट करने से पहले सतर्क रहने की सलाह दी है. आपको हमेशा वेबसाइट का URL ध्यान से जांचना चाहिए और केवल प्रचार पर भरोसा नहीं करना चाहिए. एजेंसी ने यह भी बताया कि फर्जी बुकिंग वेबसाइट्स आपके पैसे और संवेदनशील डेटा दोनों को गंभीर खतरे में डाल सकती हैं.
CyberDost ने सलाह दी है कि ताजमहल और अन्य स्मारकों के टिकट केवल सरकारी और अधिकृत प्लेटफॉर्म से ही खरीदें. इससे आप फर्जी वेबसाइट्स का शिकार होने से बच सकते हैं.
कभी भी तेज बुकिंग या सस्ते ऑफर देने वाली वेबसाइट्स पर भरोसा न करें. विशेषज्ञों के अनुसार, स्कैमर्स अक्सर कम कीमत और जल्दबाजी का दबाव बनाकर लोगों से पेमेंट करवा लेते हैं. टिकट बुकिंग से जुड़े संदिग्ध विज्ञापन, लिंक या मैसेज से बचें. एडवाइजरी में कहा गया है कि किसी भी प्लेटफॉर्म पर अपनी जानकारी डालने से पहले वेबसाइट का एड्रेस जरूर जांचें.
इस चेतावनी के बाद X पर लोगों की प्रतिक्रिया सामने आई, जहां कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि एडवाइजरी जारी होने के बाद भी यह वेबसाइट अभी तक सक्रिय क्यों है. कई लोगों का कहना है कि सिर्फ जागरूकता काफी नहीं है और अधिकारियों को ऐसे फर्जी डोमेन को तुरंत बंद करना चाहिए ताकि और लोग इसका शिकार न बनें.
लोगों ने अपने ऑनलाइन फ्रॉड के अनुभव भी शेयर किए. चर्चा में एक बड़ा सवाल यह था कि क्या शिकायत करने के बाद फ्रॉड में गया पैसा वापस मिल सकता है. ये प्रतिक्रियाएं ऑनलाइन स्कैम को लेकर बढ़ती चिंता को दिखाती हैं, खासकर ट्रैवल और डिजिटल पेमेंट से जुड़े मामलों में.
CyberDost ने लोगों से कहा है कि अगर वे साइबर फ्रॉड का शिकार होते हैं तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर या National Cybercrime Reporting Portal पर शिकायत करें. अधिकारियों के अनुसार, जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, उतनी ही ज्यादा संभावना होगी कि फ्रॉड को रोका जा सके और अपराधियों तक पहुंचा जा सके.
एजेंसी ने यह भी सलाह दी कि इस जानकारी को अपने दोस्तों और परिवार के साथ जरूर शेयर करें, खासकर उन लोगों के साथ जिन्हें ऑनलाइन फर्जी वेबसाइट पहचानने की जानकारी कम है.
ऑनलाइन बुकिंग और पेमेंट बढ़ने के साथ साइबर एक्सपर्ट्स ने ट्रैवल से जुड़े स्कैम में बड़ी बढ़ोतरी देखी है.
पिछले कुछ सालों में फर्जी एयरलाइन टिकट, होटल वेबसाइट, टूर पैकेज और स्मारक टिकट वेबसाइट्स तेजी से बढ़ी हैं.
अक्सर स्कैमर्स असली वेबसाइट्स की डिजाइन और लोगो की नकल करते हैं ताकि लोग धोखा खा जाएं.
विशेषज्ञों के अनुसार, सुरक्षित रहने का सबसे अच्छा तरीका है कि केवल सरकारी वेबसाइट्स, भरोसेमंद ट्रैवल सर्विस और सुरक्षित पेमेंट सिस्टम का ही इस्तेमाल करें.
अधिकारियों के मुताबिक, साइबर क्राइम से लड़ने के लिए जागरूकता सबसे जरूरी है, खासकर ऐसे समय में जब भारत में डिजिटल टूरिज्म तेजी से बढ़ रहा है.
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