UPI से किसी को पेमेंट करते समय कभी आपने सोचा है कि आपका पूरा मोबाइल नंबर ही सामने वाले के पास जाता है? ऐसा लंबे समय से हो रहा है, इसका मतलब है कि जिस जिस को भी अपने पेमेंट किया है, उन सभी के पास आपका नंबर भी है। यह छोटी सी बात ही लगती है, लेकिन छोटी है नहीं। इसे एक बड़े रिस्क के तौर पर देखा जाना चाहिए, क्योंकि इसी तरह से नंबर फ्रॉड करने वालों तक भी पहुंचते हैं। हालांकि, अब लग रहा है कि यह समस्या खत्म होने वाली है, जैसे आधार पर मास्क चढ़ाया गया था, ऐसे ही NPCI यानी National Payments Corporation of India की ओर से अब सभी मोबाइल नंबर पर भी मास्क चढ़ाया जाने वाला है। NPCI ने सभी UPI Apps और Partner Banks को एक जरूरी निर्देश जारी करते हुए कहा है कि ग्राहकों के के Phone Numbers को Mask करना अब जरूरी होगा। इसके लिए 4 सितंबर की डेडलाइन भी तय कर दी है। आइए जानते हैं कि इसका मतलब क्या है।
अभी ज्यादातर UPI लेनदेन में Identification के लिए Mobile Number का इस्तेमाल होता है, और लंबे समय से होता जा रहा है, इसी कारण से अगर आप किसी को भी पेमेंट करते हैं तो आपका पूरा नंबर भी उसके पास पहुँच जाता है। इस नंबर के साथ आपको सभी पर्सनल डिटेल्स भी सामने वाले के पास पहुँच जाती है। अब आप न जाने कहाँ कहाँ UPI Payment करते हैं और यह किसी को भी नहीं पता है कि उसके फोन से आपके डिटेल्स कौन कौन इस्तेमाल कर सकता है। ऐसे इसे Privacy और Security के लिए बड़े खतरे और रिस्क के तौर पर देखा जाना चाहिए। हालांकि, नए Protocol के तहत Apps को सिर्फ ग्राहकों के Mobile Number के आखिरी चार अंक ही दिखाने के लिए कहा गया है, ऐसा करने से आपका पूरा नंबर किसी के पास भी जाने वाला नहीं है।
इसके अलावा QR Code के जरिए की गई Payments में भी Transaction पूरा होने के बाद मोबाइल नंबर दिखाना बंद कर दिया जाने वाला है। यह पूरा कदम Identity Protection और Privacy को लेकर बढ़ती चिंताओं का सीधा जवाब है।
इस पूरे आदेश का एक अहम हिस्सा है Username-Based Virtual Private Addresses यानी VPAs की तरफ रुख करना। अभी बहुत से यूजर्स अपने Mobile Number को ही अपनी Default UPI ID के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। NPCI अब चाहता है कि Apps Users को एक Unique, Username-Based हैन्डल बनाने के लिए प्रेरित करे और इस तरह का ऑप्शन भी उपलब्ध कराए।
यह नई ID Default Identifier की तरह काम करेगी, जिससे नेटवर्क में मौजूद बाकी लोगों से असली Mobile Number पूरी तरह छिपा रहेगा। Mobile-Number-Centric IDs से दूर हटकर NPCI का मकसद एक ज्यादा Secure Interface देना है। किसी भी तरह से Digital Payments की स्पीड और सरलता को किसी भी प्रकार की कोई बंदिश के बिना।
NPCI फिलहाल बैंक और Payment Service Providers के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि उनका Digital Infrastructure 4 सितंबर की डेडलाइन तक अपडेट हो सकें। यह पूरी पहल भारत के Digital Payments Sector की सुरक्षा को मजबूत करने की एक बड़ी पहल कही जा सकती है।