बारिश का मौसम आता है तो अपने साथ सोंधी मिट्टी की खुशबू और गर्मी से राहत तो लाता है, लेकिन इसके अलावा जो इसके साथ आता है, वह आपके फोन खराब होने की समस्या है। अचानक ही फोन में पानी भर जाना, किसी भी समय आसमानी बिजली का खतरा आदि बना ही रहता है। फोन की बाट जहाँ तक आती है तो हम सभी इन दिक्कतों के लिए वही पुराने, घिसे पिटे नुस्खे अपनाते हैं, जो अक्सर काम आते हैं, और कई बार काम करते ही नहीं हैं। लेकिन असल में हमारी जेब में मौजूद टेक्नोलॉजी, यानी हमारा फोन और उसमें मौजूद कुछ ऐप्स, इस समस्या को खुद-बखुद दूर कर देते हैं। बस, इतना सा है कि हम इनका इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं, क्या आप जानते हैं कि फोन को पानी की चपेट में आने के बाद भी ठीक किया जा सकता है, क्या आप ये जानते हैं कि आसमानी बिजली गिरने की जानकारी भी आपको मिल सकती है और इस समय तो गूगल मैप्स पर ही आपको बाढ़ आदि की जानकारी भी मिलने लगी है। अब अगर आपके लिए भी मॉनसून खुशी से ज्यादा टेंशन लेकर आया है तो हम आपको कुछ ऐसे तट्रिक्स बताने वाले हैं जिन्हें जानकर आप अपने आपको एक अलग ही इंसान के तौर पर देखने वाले हैं और दूसरों को भी इसकी जानकारी देने वाले हैं।
हर साल बारिश शुरू होते हमारे पास लोगों के पैसे आना शुरू हो जाते हैं कि उनका फोन भीग गया है, इसके चार्जिंग पोर्ट में पानी चला गया है, अचानक ही रास्ते में पानी इतना बढ़ गया कि बाढ़ जैसी हालात बन गए, ऐसे में क्या किया जाए क्या इन सभी चीजों के लिए कोई तकनीकी हल है। अब जब ये सवाल बढ़ने लगे तो मैंने सोच कि आइए आपको बता ही देते हैं कि आखिर इन समस्याओं के लिए आप क्या कर सकते हैं और कैसे इनसे बच सकते हैं। यहाँ बताई गई कुछ जानकारी तो ऐसी है जिसका आपको इससे पहले कभी अंदाजा भी नहीं था। चलिए शुरू करते हैं और जानते हैं कि कौन सी 4 ट्रिक हैं जो इस मॉनसून आपको टेंशन से दूर रखने वाली हैं।
ज्यादातर लोग गूगल मैप्स को सिर्फ रास्ता दिखाने वाला ऐप के तौर पर देखते हैं, अभी तक हो सकता है कि आप भी ऐसा ही सोचते हों, लेकिन भारत में गूगल का एक AI-बेस्ड फ्लड फोरकास्टिंग सिस्टम भी काम करता है। यह सेंट्रल वाटर कमीशन (CWC) के डेटा के साथ मिलकर काम करता है और नदी किनारे बसे इलाकों के लोगों को पानी बढ़ने से पहले अलर्ट भेजने का काम करता है। इसकी शुरुआत बिहार के पटना से हुई थी, और अब यह पूरे भारत में काम कर रहा है। खास बात यह है कि यह सिर्फ यह नहीं बताता कि बाढ़ आएगी या नहीं, बल्कि यह भी बताता है कि आपके इलाके में पानी कितना ऊपर आ सकता है, और यह जानकारी हिंदी सहित कई भारतीय भाषाओं में भी ली जा सकती है। अब तक अगर आप गूगल मैप्स को केवल रास्ता दिखाने तक के लिए इस्तेमाल करते आए हैं तो अब आपको ऐसा सोचना बंद कर देना चाहिए। यह आपको बाढ़ से भी बचाता है।
बारिश के मौसम में आसमानी बिजली गिरने से हर साल सैकड़ों लोगों की जान चली जाती है, यह काफी समय से चलता आ रहा है और आगे भी चलता रहने वाला है, लेकिन अगर आप थोड़ी सी सतर्कता बरतते हैं तो आप अपना बचाव कर सकते हैं। असल में, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटियोरोलॉजी यानी IITM पुणे ने मौसम विभाग के साथ मिलकर ‘दामिनी’ नाम का एक ऐप बनाया है। यह ऐप आपकी लोकेशन के 20 से 40 किलोमीटर के दायरे में बिजली गिरने की संभावना को पहले से भांप लेता है और कलर कोडेड अलर्ट भेजता है, यानी अगले कुछ मिनटों में बिजली गिरने का खतरा है तो रेड, थोड़ा समय है तो येलो और ब्लू अलर्ट। यह ऐप प्ले स्टोर और ऐप स्टोर दोनों पर मुफ्त में मौजूद है। मॉनसून में आपको इस एप को अपने फोन में जरूर रखना चाहिए।
अब इसे सच तो किसी भी प्रकार से माना नहीं जा सकता है, इसे अगर एक मिथक कहा जाए तो कोई गलत बात भी नहीं होने वाली है। बहुत से लोग फोन के बारिश में भीग जाने के बाद उसे चावल के डब्बे में डाल देने की सलाह देते हैं। इसे लेकर ऐसा कहा जाता है कि इससे चावल नमी को सोख लेता है। है कि फोन भीग जाए तो उसे चावल के डिब्बे में रख दो, नमी अपने आप सूख जाएगी, लेकिन सच यह है कि चावल सिर्फ ऊपरी सतह की नमी थोड़ी बहुत सोखता है, फोन के अंदर गहराई तक जमा पानी उससे नहीं निकलता, और कई बार चावल के बारीक कण चार्जिंग पोर्ट या स्पीकर में फंस भी जाते हैं।
आजकल के ज्यादातर फोन में एक सेंसर होता है जो पोर्ट में नमी आते ही तुरंत चार्जिंग रोक देता है और स्क्रीन पर वॉर्निंग नजर आने लगती है। ऐसे में सही तरीका यही है कि फोन को तुरंत बंद करें, केस और सिम ट्रे निकाल दें, और उसे हवादार जगह पर पोर्ट नीचे की तरफ करके रख दें ताकि पानी खुद बह जाए। इसे सुखाने के लिए हल्की हवा वाला पंखा इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन हेयर ड्रायर या गर्म हवा से बचें, क्योंकि गर्मी नमी को अंदर और गहराई तक धकेल सकती है। इसके अलावा फोन के पूरी तरह तक सूख जाने तक चार्ज करने की सोचें भी नहीं।
आजकल ज्यादातर फोन में पोर्ट कवर नहीं आते, जो पहले जमाने के फोन में हुआ करते थे। इसका मतलब है कि USB-C पोर्ट मानसून में सबसे कमजोर कड़ी बन जाता है। अगर पोर्ट में हल्की सी भी नमी लंबे समय तक बनी रहे, तो अंदर के पिन धीरे-धीरे जंग खा सकते हैं, भले ही फोन बाहर से बिलकुल ठीक दिखे।
बारिश में बाहर निकलने से पहले एक सस्ता पोर्ट प्लग लगाना, या कम से कम पोर्ट को अच्छी तरह पोंछकर सुखाना, एक छोटी सी आदत है जो बड़ी रिपेयरिंग आदि से आपको बचा सकती है। खासकर अगर आप रोज बाइक या ट्रेन से सफर करते हैं, तो यह आदत डाल लेना फायदे का सौदा है।
इन चारों बातों में एक बात कॉमन है, टेक्नोलॉजी अब सिर्फ फोन तक सीमित नहीं रही, वह मानसून के असली खतरों, बाढ़, बिजली और नमी से भी हमें बचाने लगी है। बस जरूरत है इन टूल्स के बारे में जानने और सही वक्त पर इस्तेमाल करने की। अगर आप मॉनसून में इन समस्याओं से बचने के उपाय तलाश रहे थे तो आपको अब सब जानकारी मिल चुकी है। अब आप मॉनसून में भी खुश रह सकते हैं।
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