ITR Filing 2026: आयकर रिटर्न (Income Tax Return) भरते समय छोटी-सी लापरवाही भी बाद में बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। गलत टैक्स रिजीम चुनना, गलत ITR फॉर्म भरना, आय की पूरी जानकारी न देना या दस्तावेजों का सही तरीके से मैच न करना जैसी गलतियों की वजह से टैक्स रिफंड में देरी हो सकती है। इतना ही नहीं, इनकम टैक्स विभाग की ओर से नोटिस भी मिल सकता है या फिर अतिरिक्त टैक्स चुकाने की नौबत आ सकती है। अगर आप वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए ITR फाइल करने जा रहे हैं, तो रिटर्न सबमिट करने से पहले नीचे दी गई महत्वपूर्ण बातों का ज़रूर ध्यान रखें।
ITR भरने से पहले सबसे पहले यह तय करें कि आपके लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) या नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) में से कौन-सी अधिक फायदेमंद है। दोनों व्यवस्थाओं के तहत मिलने वाली टैक्स छूट, कटौतियों और कुल टैक्स देनदारी की तुलना करें। जिस विकल्प में कम टैक्स देना पड़े, उसी रिजीम का चयन करना बेहतर रहेगा।
भारत में अलग-अलग करदाताओं के लिए 7 तरह के ITR फॉर्म उपलब्ध हैं। कौन-सा फॉर्म आपके लिए लागू होगा, यह आपकी आवासीय स्थिति, आय के स्रोत और कुल आय पर निर्भर करता है। अगर गलती से गलत ITR फॉर्म भर दिया जाता है, तो आयकर विभाग आपके रिटर्न को डिफेक्टिव रिटर्न मान सकता है। इसलिए फॉर्म चुनते समय पूरी सावधानी रखें।
रिटर्न सबमिट करने से पहले Annual Information Statement (AIS) और Form 26AS डाउनलोड करके ध्यान से चेक कर लें। इन दोनों दस्तावेजों में मौजूद जानकारी को अपने बैंक रिकॉर्ड, सैलरी और अन्य आय के दस्तावेजों से मैच करें। अगर कहीं कोई अंतर दिखाई देता है, तो पहले उसे ठीक करें और उसके बाद ही ITR सबमिट करें।
अगर सभी आवश्यक दस्तावेज पहले से आपके पास मौजूद होंगे, तो ITR फाइल करने की प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी। रिटर्न भरने से पहले इन दस्तावेजों को तैयार रखें –
इनकम टैक्स विभाग ITR फॉर्म में कई जानकारियां पहले से भरकर उपलब्ध कराता है, लेकिन इन्हें बिना जांचे स्वीकार करना सही नहीं है। रिटर्न सबमिट करने से पहले अपना नाम, पैन, आधार नंबर, बैंक खाते की जानकारी, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी अच्छी तरह जांच लें। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि पैन और आधार एक-दूसरे से लिंक हों।
अगर आप पुरानी या नई टैक्स व्यवस्था के तहत किसी टैक्स कटौती का लाभ लेने के लिए एलिजिबल हैं, तो उसकी रकम सही-सही दर्ज करें। रिटर्न जमा करने से पहले निवेश और खर्च से जुड़े सभी दस्तावेजों को दोबारा मैच करें। गलत जानकारी देने पर अतिरिक्त टैक्स की मांग आ सकती है या फिर रिटर्न प्रोसेस होने में देरी हो सकती है।
कुछ लोग अधिक टैक्स रिफंड पाने के लिए आय कम दिखाने, गलत कटौतियां जोड़ने या गलत डिटेल्स दर्ज करने की कोशिश करते हैं। ऐसा करना कानून के खिलाफ है। अगर आयकर विभाग को जानकारी में कोई गड़बड़ी मिलती है, तो मामले की जांच हो सकती है और नोटिस भी जारी किया जा सकता है।
आखिरी तारीख का इंतजार करने के बजाय समय रहते ITR जमा करना बेहतर होता है। जल्दी रिटर्न भरने से अगर कोई गलती रह जाती है तो उसे सुधारने का पर्याप्त समय मिल जाता है। साथ ही आखिरी समय में वेबसाइट पर आने वाली तकनीकी समस्या या सर्वर की दिक्कतों से भी बचा जा सकता है।
अगर निर्धारित समय सीमा के बाद ITR फाइल किया जाता है, तो करदाता को लेट फाइलिंग फीस, बकाया टैक्स पर ब्याज और कुछ मामलों में कुछ टैक्स लाभों से भी वंचित होना पड़ सकता है।
सिर्फ ITR जमा कर देना ही पर्याप्त नहीं होता। रिटर्न जमा करने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन करना भी अनिवार्य है। अगर समय पर ई-वेरिफिकेशन नहीं किया गया, तो जमा किया गया ITR वैलिड नहीं माना जाएगा। इसलिए रिटर्न सबमिट करने के बाद इस अंतिम प्रक्रिया को पूरा करना भी उतना ही जरूरी है।
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