गर्मी जब सच में परेशान करने लगती है, तब घर को ठंडा रखना जरूरत बन जाता है. पहले लोग सीधे AC खरीदते थे, लेकिन अब काफी लोग AC किराए पर लेने लगे हैं. खासकर जो लोग बार-बार शहर बदलते हैं या रेंट पर रहते हैं, उनके लिए यह एक प्रैक्टिकल विकल्प बन गया है.
लेकिन यहां एक गलती लोग बार-बार करते हैं. बिना सोचे समझे AC किराए पर ले लेते हैं और बाद में बिल, सर्विस या डिपॉजिट को लेकर परेशान होते हैं. अगर आप भी ऐसा सोच रहे हैं, तो पहले कुछ चीजें साफ कर लें. इससे आपको लोकल वेंडर या ऑनलाइन एसी रेंट पर देने वाले प्लेटफॉर्म चूना नहीं लगा पाएंगे.
अधिकतर लोग कॉन्ट्रैक्ट पढ़े बिना साइन कर देते हैं, और यहीं से दिक्कत शुरू होती है. आपको साफ पता होना चाहिए कि AC कब इंस्टॉल होगा और कब हटेगा. इंस्टॉलेशन और रिमूवल का खर्च कौन देगा, यह पहले ही तय कर लें. अगर ये बातें क्लियर नहीं हैं, तो बाद में एक्स्ट्रा पैसे देने पड़ सकते हैं.
यह सबसे बड़ा ट्रैप है. लोग सस्ता देखकर पुराना AC ले लेते हैं. पुराने यूनिट ज्यादा बिजली खपत करते हैं, कूलिंग भी कम होती है और खराब होने के चांस ज्यादा रहते हैं. सीधी बात, जो पैसा आप किराए में बचाते हो, वो बिजली के बिल में चला जाता है.
हर कमरे के हिसाब से AC चुनना पड़ता है. अगर आपका कमरा 120 से 180 स्क्वायर फीट के बीच है, तो 1.5 टन AC सही रहेगा. इसके साथ स्टार रेटिंग जरूर देखें. कम रेटिंग का मतलब ज्यादा बिजली खर्च. यह छोटी चीज लगती है, लेकिन महीने के बिल में बड़ा फर्क डालती है.
नॉर्मल सिक्योरिटी डिपॉजिट 2000 से 5000 रुपये के बीच होता है. अगर कोई इससे ज्यादा मांग रहा है, तो सीधे मना कर दें. हमेशा भरोसेमंद वेंडर से ही AC लें. सस्ता देखकर कहीं से भी उठा लेंगे तो बाद में पछताना पड़ेगा. साथ ही यह भी चेक करें कि AC सर्विस हुआ है या नहीं और उसमें बेसिक सेफ्टी फीचर्स ठीक से काम कर रहे हैं.
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