भारत ने लॉन्च किए 3 देसी AI मॉडल! दो बिना इंटरनेट के भी करेंगे काम, हिंदी के साथ 22 भारतीय भाषाओं का सपोर्ट
भारत सरकार ने IndiaAI Mission के तहत देसी AI मॉडल लॉन्च किए हैं।
स्वदेशी AI मॉडल EKA-1, Dhir 2B और Dhir 5B के तौर पर लॉन्च हिये हैं।
EKA-1 में 26.3 बिलियन पैरामीटर्स हैं। यह हिंदी सहित सभी 22 भारतीय भाषाओं का सपोर्ट करते हैं।
आजकल जहां दुनिया भर में AI का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन AI के इस्तेमाल के लिए सबसे पहली जरूरत इंटरनेट है। चाहे किसी डॉक्यूमेंट की समरी बनवानी हो, सवाल का जवाब चाहिए हो, या फिर ऑफिस का कोई काम करना हो, ज्यादातर AI टूल्स क्लाउड सर्वर पर निर्भर हैं। लेकिन अब भारत ने इस दिशा में एक बड़ा बढ़ाया है। सरकार ने तीन स्वदेशी AI मॉडल EKA-1, Dhir 2B और Dhir 5B लॉन्च किए हैं। इनमें से दो ऐसे हैं, जिन्हें कम्पैटिबल मोबाइल या कंप्यूटर पर बिना इंटरनेट कनेक्शन के इस्तेमाल किया जा सकता है। इन मॉडल्स को खासतौर पर भारतीय भाषाओं और देश की जरूरतों को ध्यान में रखकर निर्मित किया गया है।
भारत ने लॉन्च किए तीन नए AI मॉडल
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत चलने वाले IndiaAI Mission ने 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में तीन स्वदेशी AI मॉडल पेश किए। इनमें EKA-1 को बेंगलुरु की कंपनी Soket Labs ने बनाया है, जबकि Dhir 2B और Dhir 5B को ZenteiQ AiTech Innovations की ओर से तैयार किया गया है। इस मौके पर IT मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन भी मौजूद थे। सरकार का मानना है कि इन मॉडल्स से बैंकिंग, शिक्षा, रिसर्च, साइबर सिक्योरिटी और सरकारी विभागों के कामकाज में नई संभावनाएं खुलेंगी।
EKA-1 क्या है और इसमें क्या मिलेगा?
इन तीनों में EKA-1 सबसे बड़ा AI मॉडल है। इसमें 26.3 बिलियन यानी 2,630 करोड़ पैरामीटर्स हैं और इसे लगभग 7.5 ट्रिलियन टोकन के डेटा पर प्रशिक्षित किया गया है। आसान भाषा में समझें तो पैरामीटर्स AI मॉडल के ऐसे हिस्से होते हैं, जिनकी मदद से वह सीखी गई जानकारी के आधार पर जवाब देते हैं। EKA-1 की सबसे बड़ी खूबी इसका भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करना है। यह हिंदी, तमिल, तेलुगु, बंगाली, मराठी समेत संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी में काम कर सकता है।
Dhir 2B और Dhir 5B बिना इंटरनेट कैसे करेंगे काम?
जहां EKA-1 कठिन से कठिन कामों को आसानी से कर सकता है, वहीं Dhir 2B और Dhir 5B को छोटे और कम संसाधनों में काम करने वाले AI मॉडल्स के रूप में पेश किया गया है। ये दोनों ओपन-सोर्स मॉडल हैं, जो अंग्रेजी के साथ 10 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करते हैं। इनकी खासियत यह है कि इन्हें कम्पैटिबल मोबाइल फोन, लैपटॉप या संस्थानों के अपने सर्वर पर चलाया जा सकता है।
बिना इंटरनेट वाले AI से आम लोगों को क्या फायदा होगा?
उदाहरण के लिए सोचिए कि किसी स्कूल में इंटरनेट ठीक से नहीं चलता, लेकिन शिक्षकों को लंबे डॉक्यूमेंट से जरूरी जानकारी निकालनी है। ऐसे में लोकल AI मॉडल मददगार हो सकता है। इसी तरह छोटे कार्यालयों में दस्तावेजों की समरी तैयार करने, जानकारी खोजने और बार-बार दोहराए जाने वाले काम ऑटोमैटिक करने के लिए इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्राइवेसी के मामले में भी ऑफलाइन AI का फायदा हो सकता है। अगर मॉडल पूरी तरह डिवाइस पर चलता है, तो उसकी प्रोसेसिंग के लिए निजी दस्तावेज किसी बाहरी क्लाउड सर्वर पर भेजना जरूरी नहीं होगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर ऑफलाइन AI ऐप अपने आप पूरी तरह सुरक्षित है। डेटा की सुरक्षा उसके सॉफ्टवेयर, परमिशन और इस्तेमाल के तरीके पर भी निर्भर करेगी।
भारत के लिए क्यों खास है यह लॉन्च?
भारत में करोड़ों लोग अलग-अलग भाषाओं में डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में भारतीय भाषाएं समझने वाले AI मॉडल शिक्षा, सरकारी सेवाओं और कारोबार में उपयोगी साबित हो सकते हैं। इसके साथ ऑफलाइन AI उन इलाकों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है।