अगर आप भी उन आम और घिसी-पिटी मसाला फिल्मों को देखकर तंग आ चुके हैं जिनमें बेवजह के गाने, जबरन ठूंसा गया रोमांस और कॉमेडी के नाम पर बकवास और फूहड़पन परोसा जाता है, तो ओटीटी की दुनिया में एक ऐसा छिपा हुआ रत्न भी मौजूद है, जो आपका वीकेंड पूरी तरह वसूल करा करा देगा। आज हम आपको एक ऐसी धारदार, तेज-तर्रार और दिमाग की बत्ती जला देने वाली क्राइम-इन्वेस्टिगेटिव थ्रिलर के बारे में बताने वाले हैं, जो न केवल 8.2 की शानदार IMDb रेटिंग प्राप्त किए हुए है, इसका कुल रनटाइम भी महज 105 मिनट का है। आइए अब इस कहानी के बारे में कुछ अन्य बातें भी जानते हैं।
यह मास्टरपीस फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म जियोहॉटस्टार (JioHotstar) पर हिंदी डब के साथ स्ट्रीम की जा सकती है। इस सस्पेंस थ्रिलर का नाम डी-16 (D-16) है। मूल रूप से तमिल में धुरुवंगल पथिनारु (Dhuruvangal Pathinaaru) नाम से रिलीज हुई इस फिल्म का मतलब 16 छोर है। इस फिल्म की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसका निर्देशन और इसकी बेहद कसी हुई कहानी किसी मंझे हुए बुज़ुर्ग फिल्ममेकर ने नहीं, बल्कि ये काम महज 22 साल के एक कॉलेज ड्रॉपआउट (कार्तिक नरेन) का है। बिना किसी बड़े सुपरस्टार और बिना किसी भारी-भरकम पीआर प्रमोशन के, इस फिल्म ने सिर्फ और सिर्फ अपनी सॉलिड कहानी और जबर्दस्त माउथ-पब्लिसिटी के दम पर पूरे देश के सिनेमा प्रेमियों को हिलाकर रख दिया था।
कहानी का केंद्र हैं तेज-तर्रार रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर दीपक (रहमान)। एक पुराने और खौफनाक एनकाउंटर के दौरान अपना दाहिना पैर गंवाने के बाद वे पुलिस सेवा से रिटायर हो चुके हैं। रिटायरमेंट के पांच साल बाद, उनके घर एक नया पुलिस कैडेट मार्गदर्शन लेने पहुंचता है। बातों-बातों में दीपक उस कैडेट को अपने करियर के उस सबसे आखिरी, उलझे हुए और अनसुलझे मर्डर केस की दास्तान सुनाना शुरू करते हैं। यह एक ऐसा केस है जिसने उनके करियर के साथ-साथ उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी थी।
आम थ्रिलर फिल्मों की तरह यह फिल्म आपको सीधे-सीधे सुराग नहीं परोसती। दर्शकों के सामने जानकारियां बिल्कुल उसी धीमी और रहस्यमयी रफ्तार में टुकड़ों-टुकड़ों में सामने आती हैं, जैसे किसी असली मर्डर केस की छानबीन के दौरान पुलिस को मिलती हैं। देखते वक्त आप खुद स्क्रीन के सामने एक जासूस की तरह कड़ियां जोड़ते नजर आएंगे। फिल्म के कई अलग-अलग किरदार और अलग-अलग जगहों पर घट रही घटनाएं शुरुआत में पूरी तरह असंबद्ध लगती हैं। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, एक ही तूफानी रात की घटनाएं इन सभी 16 अलग-अलग छोरों को एक बिंदु पर लाकर जोड़ देती हैं।
इस फिल्म की असली जान इसके आखिरी के 15 मिनट हैं। जैसे ही केस अपने एंड की तरफ बढ़ता है, कहानी अचानक से पूरी तरह पलट जाती है। एक के बाद एक खुलने वाले अप्रत्याशित राज दर्शकों को ऐसे तगड़े झटके देते हैं कि स्क्रीन खत्म होने के बाद भी आप सन्नाटे में रह जाएंगे।