भारत में इंटरनेट कनेक्टिविटी अब सिर्फ मोबाइल टावर और फाइबर केबल तक सीमित नहीं रह गई है। एक तरफ AirFiber जैसी 5G Fixed Wireless Access सर्विस तेजी से घरों तक पहुंच रही है, तो दूसरी तरफ SpaceX की Starlink भारत में सैटेलाइट इंटरनेट शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा Singtel और Tata Group की Nelco जैसी कंपनियां भी सैटेलाइट कम्युनिकेशन और Direct-to-Device कनेक्टिविटी के क्षेत्र में कदम बढ़ा रही हैं। ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि भारत में Starlink कब शुरू होगा, बल्कि यह भी है कि आखिर इसकी जरूरत कितनी होगी और क्या यह मौजूदा इंटरनेट सेवाओं को टक्कर दे पाएगा? आज इस आर्टिकल में हम इसी मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करने वाले हैं।
SpaceX के स्वामित्व वाली Starlink पिछले पांच साल से ज्यादा समय से भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू करने की कोशिश कर रही है। कंपनी को सरकार से जरूरी मंजूरियां मिलने में सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण लंबा इंतजार करना पड़ा है। अब कंपनी ने Gen 2 के अपने लगभग 30,000 सैटेलाइट्स कॉन्स्टेलेशन के लिए भी मंजूरी मांगी है। इन सैटेलाइट्स को Low Earth Orbit यानी LEO में 340 से 615 किलोमीटर की ऊंचाई पर लगाने की योजना है।
इससे पहले कॉन्स्टेलेशन के लिए किए गए आवेदन को भारत में अस्वीकार कर कर दिया गया है, जिसका कारण कुछ सुविधाओं और स्पेक्ट्रम बैंड्स की पुष्टि न होना था। जबकि IN-SPACe ने जुलाई 2025 में Starlink के 4,408 सैटेलाइट्स के Gen 1 कॉन्स्टेलेशन को मंजूरी दे दी थी।
भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन बाजार में अब सिर्फ Starlink ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य कंपनियों की भी दिलचस्पी दिखाई दे रही है। Singapore Telecommunications यानी Singtel ने भारत में सीधे सैटेलाइट सर्विस देने की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी अपनी स्वामित्व वाली इकाई Singapore Telecom India (STIPL) के जरिए सरकारी और निजी उद्यमों को सैटकॉम सेवाएं देने की योजना बना रही है और इसके लिए FDI की मंजूरी भी मांगी है।
वहीं, Tata Group की सैटकॉम कंपनी Nelco की नजर Direct-to-Device यानी D2D सैटेलाइट कनेक्टिविटी पर है। कंपनी का लक्ष्य 2027 के अंत तक ट्रायल शुरू करना और 2028 की शुरुआत में भारत समेत दक्षिण एशिया के बाजारों में कमर्शियल सर्विस शुरू करना है। हालांकि, इसका रोलआउट रेगुलेटरी मंजूरियों पर निर्भर करेगा।
इन तकनीकों को देखते हुए ऐसा कहा जा सकता है कि आने वाले समय में भारत में सैटेलाइट इंटरनेट और सैटेलाइट कनेक्टिविटी का बाजार काफी बड़ा हो सकता है।
Reliance Jio और Bharti Airtel जैसी प्रमुख टेलिकॉम कंपनियां भारत में ग्राहकों को AirFiber सुविधा उपलब्ध कराती हैं। यह सेवा 5G Fixed Wireless Access तकनीक पर आधारित है और फाइबर केबल के बजाय 5G नेटवर्क के जरिए घर तक इंटरनेट पहुंचाता है। AirFiber में घर के बाहर एक डिवाइस लगाया जाता है, जो 5G नेटवर्क से वायरलेस तरीके से कनेक्ट होता है। इसके बाद राउटर के जरिए घर के स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी और दूसरे डिवाइस इंटरनेट से जुड़ते हैं।
AirFiber का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। Analysys Mason की रिपोर्ट के मुताबिक FY2026 तक इसके करीब 1.29 करोड़ ग्राहक हो चुके हैं। हालांकि Jio अपने आंकड़ों में AirFiber और JioFiber को एक साथ रिपोर्ट करता है।
Jio AirFiber के प्लान 599 रुपये प्रति महीने से शुरू होते हैं, जबकि AirFiber Max के प्लान 1,499 रुपये से 3,999 रुपये प्रति महीने तक जाते हैं। AirFiber Max में 1Gbps तक की स्पीड मिलती है। इसके अलावा 550 से ज्यादा डिजिटल चैनल और 14 OTT ऐप्स का एक्सेस भी मिलता है।
दूसरी तरफ Starlink का भारत में रेजिडेंशियल प्लान 8,600 रुपये प्रति महीने का है। हालांकि, इसे एक्टिवेट करने के लिए हार्डवेयर किट अलग से खरीदनी होगी, जिसकी कीमत 34,000 रुपये है। Starlink अनलिमिटेड डेटा और 30 दिन का ट्रायल भी देगी। कंपनी 99.9 प्रतिशत से ज्यादा अपटाइम का दावा करती है और कहती है कि सर्विस को प्लग इन करके इस्तेमाल किया जा सकेगा।
इस कीमत के अंतर को देखते हुए शहरों में रहने वाले ऐसे यूजर्स, जहां AirFiber या फाइबर ब्रॉडबैंड आसानी से किफायती दामों पर उपलब्ध है, उनके लिए Starlink का महंगा प्लान आकर्षक विकल्प नहीं लगता।
Starlink की सबसे बड़ी ताकत उसकी कीमत या OTT बेनिफिट नहीं, बल्कि कनेक्टिविटी की पहुंच है। भारत में अभी भी ऐसे दूरदराज, पहाड़ी और ग्रामीण इलाके हैं जहां फाइबर नेटवर्क या 5G आधारित Fixed Wireless Access की कवरेज या तो उपलब्ध ही नहीं है या पर्याप्त नहीं है। ऐसी जगहों पर Starlink का सैटेलाइट नेटवर्क बड़ा बदलाव ला सकता है। इसके लिए जमीन पर हर घर तक फाइबर केबल पहुंचाने या आसपास मोबाइल टावर लगाने की जरूरत नहीं होगी। सैटेलाइट के जरिए सीधे कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जा सकती है।
Starlink को भारत में एक और चुनौती मौजूदा मोबाइल नेटवर्क से मिलेगी। देश में 4G की पहुंच काफी बड़ी है और 5G नेटवर्क का विस्तार भी तेजी से हुआ है। वहीं वॉयस कॉलिंग और फीचर फोन यूजर्स के लिए कहीं न कहीं 2G अभी भी मौजूद है, जबकि ज्यादातर बड़े ऑपरेटर्स 3G को बंद कर चुके हैं।
जुलाई 2026 तक करीब 50 करोड़ यूजर्स के 5G से जुड़ने की जानकारी सामने आई थी। इसका मतलब है कि भारत में बड़ी संख्या में लोगों को पहले से ही फास्ट मोबाइल इंटरनेट मिल रहा है। ऐसे में Starlink उन लोगों के लिए मददगार बन सकता है जिन्हें मौजूदा मोबाइल नेटवर्क से भरोसेमंद हाई-स्पीड कनेक्टिविटी नहीं मिल रही है।
हालांकि AirFiber की पहुंच और कीमत इसे मजबूत विकल्प बनाती है, लेकिन सर्विस को लेकर कुछ उपभोक्ताओं की शिकायतें भी सामने आई हैं। इनमें कम इंटरनेट स्पीड, कनेक्शन की समस्या, इंस्टॉलेशन में देरी, सर्विस रिक्वेस्ट का समय पर समाधान न होना और रिफंड में देरी जैसी शिकायतें शामिल हैं। हालांकि, ये कुछ यूज़र्स की व्यक्तिगत शिकायतें हैं और इनके आधार पर पूरे 1.29 करोड़ AirFiber यूजर बेस की स्थिति का अंदाज़ा लगाना सही नहीं होगा।
इसका जवाब हर यूजर के लिए एक जैसा नहीं है। अगर आपके घर में AirFiber या फाइबर ब्रॉडबैंड अच्छी स्पीड और स्थिर कनेक्शन दे रहा है, तो सिर्फ Starlink के नाम या सैटेलाइट इंटरनेट की नई टेक्नोलॉजी के लिए 8,600 रुपये प्रति महीने खर्च करना फिलहाल ज्यादा समझदारी भरा फैसला नहीं लगता।
लेकिन अगर आप ऐसे इलाके में रहते हैं जहां फाइबर नहीं पहुंचा है, 5G FWA उपलब्ध नहीं है या मौजूदा इंटरनेट कनेक्शन स्पीड नहीं देता, तो Starlink की सैटेलाइट आधारित कनेक्टिविटी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है।
दरअसल, Starlink की असली सफलता इस बात से तय नहीं होगी कि वह AirFiber से कितने ग्राहक छीनता है, बल्कि इससे होगी कि वह उन करोड़ों लोगों और उन इलाकों तक कितनी अच्छी कनेक्टिविटी पहुंचा पाता है, जहां आज भी तेज इंटरनेट एक चुनौती है।
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