आज के समय में लगभग हर घर में स्मार्टफोन और लैपटॉप का इस्तेमाल होता है. इन डिवाइस को चार्ज करने के लिए चार्जर हमेशा बिजली के सॉकेट में लगा रहता है. कई लोग सुविधा के लिए चार्जर को लगातार प्लग में ही छोड़ देते हैं और जरूरत पड़ने पर बस फोन या लैपटॉप कनेक्ट कर लेते हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या चार्जर को 24 घंटे सॉकेट में लगाए रखना सुरक्षित है या इससे कोई नुकसान हो सकता है.
आधुनिक स्मार्टफोन और लैपटॉप चार्जर पहले की तुलना में काफी स्मार्ट बनाए जाते हैं. जब डिवाइस पूरी तरह चार्ज हो जाती है, तो चार्जर करंट को कम कर देता है या चार्जिंग को लगभग रोक देता है. इसके अलावा आज के डिवाइस में बैटरी को ओवरचार्ज होने से बचाने के लिए विशेष सर्किट भी लगाए जाते हैं.
इस वजह से अगर चार्जर सॉकेट में लगा हुआ है तो इसका मतलब यह नहीं कि आपका फोन या लैपटॉप लगातार चार्ज होता रहेगा या बैटरी खराब हो जाएगी. आम तौर पर आधुनिक डिवाइस इस स्थिति को सुरक्षित तरीके से संभाल लेते हैं.
भले ही चार्जर से कोई डिवाइस जुड़ा न हो, लेकिन अगर वह सॉकेट में लगा है तो थोड़ी मात्रा में बिजली का इस्तेमाल करता रहता है. इसे “वैंपायर एनर्जी” या स्टैंडबाय पावर कहा जाता है.
यह मात्रा बहुत कम होती है, आमतौर पर कुछ ही वाट बिजली खर्च होती है. हालांकि यह खर्च बहुत बड़ा नहीं होता, लेकिन अगर लंबे समय तक चार्जर लगातार प्लग में लगा रहे तो धीरे-धीरे बिजली के बिल में थोड़ा फर्क पड़ सकता है.
चार्जर प्लग में लगे रहने पर हल्का गर्म हो सकता है, खासकर अगर वह पुराना या कम गुणवत्ता वाला हो. लंबे समय तक लगातार गर्म रहने से चार्जर की उम्र कम हो सकती है.
कुछ दुर्लभ मामलों में खराब या सस्ते चार्जर लंबे समय तक प्लग में लगे रहने पर सुरक्षा जोखिम भी पैदा कर सकते हैं. इसलिए खास तौर पर नॉन-ब्रांडेड या खराब स्थिति वाले चार्जर को उपयोग के बाद निकाल देना बेहतर माना जाता है.
चार्जर को हमेशा ऐसे स्थान पर लगाना चाहिए जहां पानी, ज्वलनशील चीजें या ढीले सॉकेट न हों. अगर घर में छोटे बच्चे या पालतू जानवर हैं, तो लगातार प्लग में लगा चार्जर दुर्घटना का कारण बन सकता है. हालांकि, अच्छी गुणवत्ता वाले चार्जर के साथ जोखिम बहुत कम होता है, फिर भी सावधानी रखना बेहतर होता है.
अगर कभी-कभी चार्जर प्लग में लगा रह जाए तो इससे तुरंत कोई नुकसान नहीं होता. आधुनिक डिवाइस और चार्जर इस स्थिति को संभालने के लिए डिजाइन किए जाते हैं.
लेकिन ऊर्जा बचाने, चार्जर की उम्र बढ़ाने और संभावित जोखिम से बचने के लिए यह अच्छी आदत है कि जब चार्जर का उपयोग न हो तो उसे सॉकेट से निकाल दिया जाए. यह एक छोटा सा कदम है, लेकिन इससे बिजली की बचत हो सकती है और घर की सुरक्षा भी थोड़ी बेहतर हो सकती है.
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