जून का महीना आते ही उत्तर और मध्य भारत में मौसम अलग ही करवट लेता है। सूखी और झुलसाने वाली लू की जगह हवा में एक अजीब सी चिपचिपाहट, यानी उमस (Humidity) आना शुरू हो जाती है। यह गर्मियों का वो दौर होता है जब अच्छे-अच्छे कूलर भी सरेंडर कर देते हैं। इस मौसम में कूलर के सामने बैठना किसी सज़ा से कम नहीं होता। कूलर ऑन करो, तो ठंडी हवा देने के बजाय वह चेहरे पर पानी की छोटी-छोटी बूंदें थूकने लगता है। पूरा कमरा चिपचिपा हो जाता है, बदन का पसीना सूखने का नाम नहीं लेता और ऐसा लगता है जैसे हम किसी गैस चैंबर या उबलते हुए पानी के बर्तन के ऊपर बैठे हैं।
अक्सर लोग इस परेशानी से तंग आकर या तो कूलर का पानी बंद कर देते हैं और सिर्फ सूखा पंखा चलाते हैं (जिससे गर्म हवा का थपेड़ा और बढ़ जाता है), या फिर चिढ़कर नया AC खरीदने का भारी-भरकम बजट बनाने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस घुटन और चिपचिपी हवा के पीछे आपके कूलर की कोई खराबी नहीं होती? असल में यह आपके कमरे के ‘एयर सर्कुलेशन’ (Air Circulation) का एक बड़ा डिफेक्ट है। आज हम आपको मात्र 300 रुपये का एक ऐसा मास्टर स्ट्रोक जुगाड़ बताएंगे, जिसे कमरे के किसी कोने में सेट करते ही आपका कूलर उमस को चूसकर बाहर फेंक देगा और आपका कमरा दोबारा शिमला जैसी सूखी और ठंडी हवा से भर जाएगा।
यह भी पढ़ें: कबाड़ा नहीं गर्मी में वरदान हैं ‘पुरानी बोतल’..Cooler को बना देती हैं AC का बाप!
जुगाड़ की तरफ बढ़ने से पहले यह समझना बहुत ज़रूरी है कि आखिर इस मौसम में कूलर काम करना बंद क्यों कर देता है। कूलर का सीधा सिद्धांत है ‘इवैपोरेटिव कूलिंग (Evaporative Cooling)’। यानी जब बाहर की सूखी हवा कूलर की गीली घास या हनीकॉम्ब पैड से गुज़रती है, तो वह पानी को सोखकर ठंडी हो जाती है और कमरे में आती है।
मगर जब मानसून के आसपास हवा में पहले से ही नमी (Water Vapor) बहुत ज़्यादा होती है, तो कूलर से निकलने वाली गीली हवा कमरे से बाहर नहीं निकल पाती। वह कमरे की दीवारों, कोनों और छत से टकराकर वहीं कैद हो जाती है। जब कमरे के अंदर की हवा पूरी तरह पानी से संतृप्त (Saturate) हो जाती है, तो कूलर की हवा ठंडी लगना बंद हो जाती है और कमरा किसी दलदल जैसा ‘चिपचिपा’ बन जाता है। इस स्थिति में कूलर को जिंदा रखने के लिए भारी मात्रा में क्रॉस-वेंटिलेशन (Cross Ventilation) की ज़रूरत होती है, जो सामान्य तौर पर हमारे कमरों में नहीं होता।
बाज़ार में बड़े-बड़े डीह्यूमिडिफायर (Dehumidifier) मिलते हैं जो कमरे की उमस सोखने का दावा करते हैं, लेकिन उनकी कीमत 10 से 15 हज़ार रुपये के बीच होती है। हमारा देसी जुगाड़ सिर्फ 300 रुपये के एक छोटे प्लास्टिक या लोहे के ‘एग्जॉस्ट फैन’ (Exhaust Fan) से काम करता है, जिसे हम रसोई या टॉयलेट में इस्तेमाल करते हैं। आपको बस नीचे दिए गए स्टेप्स के अनुसार इसे सेट करना है:
सबसे पहले तो कूलर को कमरे के अंदर पूरी तरह बंद करके रखने की भूल कतई न करें। कूलर का कम से कम 80% हिस्सा खिड़की या दरवाज़े के बाहर होना चाहिए ताकि वह सिर्फ और सिर्फ बाहर की ताज़ा और खुली हवा ही अंदर खींचे।
यह भी पढ़ें: Cooler में जाने से पहले ही ठंडी कर दो हवा! उसके बाद मिलेगी ‘सुपर डबल कूलिंग’.. जुगाड़ देखकर दिमाग घूम जाएगा
अब कमरे के उस हिस्से को देखें जो कूलर के ठीक सामने है या कमरे का सबसे दूर वाला कोना है, जहाँ कोई रोशनदान या छोटी खिड़की (Ventilation Window) बनी हो।
इस दूसरी खिड़की या रोशनदान पर 300 रुपये वाला छोटा एग्जॉस्ट फैन इस तरह फिट कर दीजिए कि वह कमरे के अंदर की हवा को बाहर की तरफ फेंके।
जैसे ही आप कूलर के साथ इस छोटे एग्जॉस्ट फैन को ऑन करेंगे, कमरे के अंदर एक ‘एयर कॉरिडोर’ (Air Corridor) यानी हवा का रास्ता बन जाएगा। कूलर भारी दबाव के साथ ताज़ा और ठंडी हवा कमरे के अंदर फेंकेगा। जैसे ही वह हवा कमरे के बीच में पहुंचेगी, सामने के कोने में लगा एग्जॉस्ट फैन अंदर बन रही भारी उमस, चिपचिपाहट और पुरानी गर्म हवा को तुरंत अपनी तरफ खींचकर बाहर वायुमंडल में उड़ा देगा।
इससे कमरे के अंदर हवा का दबाव कभी नहीं बढ़ेगा और हवा को एक ही जगह ठहरकर चिपचिपापन पैदा करने का मौका ही नहीं मिलेगा। इस जबरदस्त क्रॉस-वेंटिलेशन की वजह से कूलर की हवा का थ्रो (Air Throw) भी दोगुना बढ़ जाता है, क्योंकि आगे से हवा को धक्का देने वाले कूलर के साथ-साथ पीछे से हवा खींचने वाला एक बूस्टर भी मिल जाता है।
आर्टिकल में AI से निर्मित इमेज इस्तेमाल हुई हैं।
यह भी पढ़ें: कूलर में छिड़क दें ये 5 रुपये वाला आइटम.. मिनटों में डबल हो जाएगी कूलिंग