Apple ने अपने पहले फोल्डेबल स्मार्टफोन iPhone Duo को इंडिया के बाजार में 2,99,900 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च कर दिया है, यह फोन अभी तक का एप्पल का सबसे महंगा फोन है। यह पहली बार है जब कोई आईफोन भारत में आधिकारिक तौर पर 3 लाख रुपये के हाई प्राइस पर लॉन्च हुआ है। इतनी बड़ी रकम देश के अधिकांश मिडल क्लास परिवारों के लिए पहली कार के डाउन पेमेंट या कई टू-व्हीलर्स की कुल ऑन-रोड कीमत से भी कहीं ज्यादा है। जहां कुछ खरीदार 23 अक्टूबर को पहली सेल के दिन पूरे 3 लाख रुपये एक ही बार में चुकाकर इसे खरीदने की स्थिति में होंगे, वहीं अधिकांश टेक लवर्स जेब पर पड़ने वाले इस भारी झटके को कम करने के लिए आसान मासिक किश्तों यानी ईएमआई (EMI) के ऑप्शन तलाशने वाले हैं, लेकिन कागजों पर दिखने वाली सस्ती किस्तों के पीछे का गणित समझ लेना बेहद जरूरी है। आइए जानते है कि 3 लाख रुपये का फोन EMI पर आपको कितने में मिलने वाला है।
अगर आप अमेरिकी और भारतीय कीमतों की तुलना करें, तो यह फर्क सीधे तौर पर आंखें खोलने वाला है. अमेरिका में 256GB बेस वेरिएंट 1,999 डॉलर की कीमत पर आता है, जो मौजूदा करेंसी एक्सचेंज रेट के हिसाब से लगभग 1,90,200 रुपये के आसपास ही बैठता है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि भारतीय ग्राहकों को बिल्कुल उसी फोन के लिए करीब 1.09 लाख रुपये ज्यादा चुकाने पड़ रहे हैं. हालांकि इम्पोर्ट ड्यूटी, जीएसटी और एप्पल का प्रीमियम इंडिया मार्कअप हमेशा से आईफोन को भारत में महंगा बनाता रहा है, लेकिन इस बार का अंतर इतना बड़ा है कि सिर्फ उस एक्स्ट्रा रकम में एक बेहद ताकतवर और प्रीमियम एंड्रॉइड फ्लैगशिप फोन अलग से खरीदा जा सकता है।
यह कीमत iPhone 18 Pro से लगभग दोगुनी और हाल ही में प्राइस हाइक के बाद iPhone 17 के बेस मॉडल से करीब तीन गुना ज्यादा है।
अब बात करते हैं कि एप्पल इंडिया के आधिकारिक ईएमआई कैलकुलेटर के हिसाब से आपकी जेब से हर महीने कितने रुपये जाने वाले हैं। अगर आप 3 महीने या 6 महीने का टेन्योर चुनते हैं, तो एप्पल इस पर नो-कॉस्ट ईएमआई (No Cost EMI) ऑफर कर रहा है। 3 महीने के प्लान में हर महीने लगभग 97,633 रुपये और 6 महीने के प्लान में 48,817 रुपये प्रति माह की किस्त बनती है। अगर इस पर एलिजिबल क्रेडिट कार्ड्स का 7,000 रुपये वाला इंस्टेंट कैशबैक जोड़ दिया जाए तो फोन की कीमत 2,92,900 रुपये से कुछ काम हो जाती है।
ऐसे में अगर आप 6 महीने वाला ऑप्शन चुनता हैं तो आपके लिए बेस्ट हो सकता है, क्योंकि यह आपको चुकाना आसान होने वाला है। लेकिन जैसे ही आप 9 महीने या उससे ज्यादा लंबा टेन्योर चुनते हैं, तो पूरा गणित पूरी तरह उलट जाता है। 9 महीने के बाद बैंक 14 से 15 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज लगाना शुरू कर देते हैं, और मिलने वाला 7,000 रुपये का कैशबैक केवल एक फ्लैट छूट बनकर रह जाता है, कोई ब्याज माफी नहीं। अगर कोई यूजर सबसे लंबे यानी 24 महीने (2 साल) के प्लान को चुनता है, तो उसकी मासिक किस्त देखने में बेहद आसान यानी करीब 14,000 रुपये प्रति माह लगने लगती है। लेकिन दो साल तक यह किस्त चुकाने के बाद फोन की कुल कीमत 2,99,900 रुपये से बढ़कर 3,40,842 रुपये तक पहुंच जाती है.
इसका सीधा मतलब है कि आसान किस्त की सुविधा के बदले ग्राहक अपनी जेब से करीब 41,000 रुपये का सीधा ब्याज बैंक को भरता है।
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