‘रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया’ ने लोन रिकवरी प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और ग्राहकों के हित में बनाने के लिए नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। 20 मई को जारी इन प्रस्तावित दिशानिर्देशों में बैंकों और रिकवरी एजेंटों की कार्यप्रणाली को लेकर कई सख्त प्रावधान शामिल किए गए हैं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य लोन लेने वालों को उत्पीड़न से बचाना और रिकवरी प्रक्रिया में जवाबदेही तय करना है। RBI के ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, किसी ग्राहक के लोन की किस्त चूकने पर बैंक या फाइनेंस कंपनियां तुरंत फाइनेंस किए गए मोबाइल फोन को ब्लॉक या डिसेबल नहीं कर सकेंगी। इसके लिए केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट शर्तें तय की हैं।
ड्राफ्ट फ्रेमवर्क में कहा गया है कि बैंक और अन्य रेगुलेटेड संस्थाओं को बोर्ड से मंजूर एक रिकवरी पॉलिसी तैयार करनी होगी, जिसमें रिकवरी प्रक्रिया और ग्राहकों से व्यवहार के सभी नियम शामिल हों। अगर अनुचित या गलत रिकवरी तरीकों की वजह से ग्राहक को नुकसान होता है, तो संबंधित संस्था को मुआवजा देना पड़ सकता है।
RBI ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि रिकवरी एजेंटों के लिए ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस’ से सर्टिफिकेशन अनिवार्य किया जाए। इसके अलावा बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अपने अधिकृत रिकवरी एजेंसियों की जानकारी आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर सार्वजनिक करनी होगी।
नियमों के मुताबिक, किसी भी रिकवरी विजिट से पहले उधारकर्ता को इसकी सूचना देना जरूरी होगा। साथ ही अगर ग्राहक की शिकायत पेंडिंग है, तो बैंक उस रिकवरी केस को आगे ट्रांसफर नहीं कर पाएंगे।
RBI ने ड्राफ्ट नियमों में साफ किया है कि रिकवरी एजेंट और बैंक अधिकारी किसी भी प्रकार की धमकी, दबाव या अपमानजनक व्यवहार नहीं कर सकते। रिकवरी एजेंटों द्वारा की जाने वाली कॉल्स को रिकॉर्ड करना और कम से कम छह महीने तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। इसके अलावा ऐसे इंसेंटिव स्ट्रक्चर पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव है जो एजेंटों को आक्रामक या जबरदस्ती वाली रिकवरी के लिए प्रेरित करते हैं।
नए नियमों के अनुसार, रिकवरी एजेंट केवल सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही उधारकर्ताओं से संपर्क कर सकेंगे। किसी भी मुलाकात के दौरान एजेंट के पास वैलिड आइडेंटिटी कार्ड और ऑफिशियल लेटर होना जरूरी होगा। RBI ने यह भी कहा है कि शादी, शोक या अन्य संवेदनशील परिस्थितियों के दौरान ग्राहकों से संपर्क नहीं किया जाना चाहिए।
ड्राफ्ट नियमों में स्मार्टफोन जैसे फाइनेंस किए गए डिवाइस को ब्लॉक करने के लिए भी कई शर्तें तय की गई हैं। बैंक या लेंडर तभी डिवाइस डिसेबल कर सकेंगे जब लोन खाता कम से कम 90 दिनों तक ओवरड्यू रहे। इसके बाद भी ग्राहक को पहले 21 दिन का नोटिस देना होगा और फिर अतिरिक्त 7 दिन की चेतावनी देनी होगी। अगर किसी ग्राहक का डिवाइस गलत तरीके से ब्लॉक किया जाता है, तो उसे प्रति घंटे 250 रुपये का मुआवजा देने का प्रावधान रखा गया है।
RBI ने पहली बार फरवरी में इन प्रस्तावित दिशानिर्देशों का ड्राफ्ट जारी किया था। उस समय केंद्रीय बैंक ने कहा था कि उधारकर्ताओं को डराना, सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना या अपमानजनक व्यवहार करना “कठोर रिकवरी तरीकों” की श्रेणी में आएगा। साथ ही रिकवरी एजेंटों को धमकी भरी भाषा, अपमानजनक मैसेज, सोशल मीडिया पर अनुचित मैसेज भेजने या बार-बार कॉल करके परेशान करने से भी रोका गया है।
RBI का कहना है कि इन नए नियमों का उद्देश्य जिम्मेदार लेंडिंग को बढ़ावा देना और सभी वित्तीय संस्थानों में रिकवरी प्रक्रिया को ज्यादा निष्पक्ष और व्यवस्थित बनाना है।
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