SIM के जैसे पोर्ट कर सकेंगे ऑटोमैटिक पेमेंट्स..UPI AutoPay में होने जा रहा ये बड़ा बदलाव, क्या हैं फायदे

HIGHLIGHTS

NCPI की यह पहल ग्राहकों को राहत देने वाली है।

UPI ऐप्स से बंधे ग्राहकों को अब मैनडेट बदलने में दिक्कत नहीं होगी।

SIM Card की तरह पोर्ट किए जा सकेंगे ऑटोमैटिक पेमेंट्स।

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों भारतीय उपभोक्ताओं के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के ओर से एक जबरदस्त और क्रांतिकारी सुविधा शुरू की जाने वाली है। अभी तक अगर आप किसी एक यूपीआई ऐप (जैसे PhonePe या Google Pay) पर अपनी म्यूचुअल फंड SIP, नेटफ्लिक्स सब्सक्रिप्शन, बिजली बिल या लोन की EMI का UPI AutoPay सेट कर लेते थे, तो ऐप बदलने के लिए आपको पुराना मैंडेट कैंसिल करके नए सिरे से रजिस्टर करना होता था। हालांकि, अब NPCI जल्द ही UPI AutoPay Interoperability (पोर्टेबिलिटी) लागू करने जा रहा है, जिससे आप अपने सभी एक्टिव मैंडेट्स को बिना किसी झंझट के एक ऐप से दूसरे ऐप में ट्रांसफर कर सकेंगे। इसे ऐसे ही समझ सकते हैं जैसे आप अपने SIM Card को एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क पर पोर्ट करते हैं।

यूज़र्स को कैसे मिलेगा फायदा?

नया यूपीआई ऐप इस्तेमाल करने पर आपको अपने इंश्योरेंस प्रीमियम, लोन रीपेमेंट या ओटीपी-बेस्ड रिकरिंग पेमेंट्स को दोबारा सेट अप करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्योंकि क्रॉस-ऐप विजिबिलिटी मिलने से यूज़र्स आसानी से यह देख पाएंगे कि उनके कौन-कौन से सब्सक्रिप्शन एक्टिव हैं, अगला ऑटो-डेबिट कब होने वाला है और कौन से पुराने प्लान्स को बंद करने की जरूरत है। इसके अलावा मैंडेट को चाहे जिस भी यूपीआई ऐप में देखा या मैनेज किया जाए, पैसा उसी मूल बैंक खाते से कटेगा जिसे ग्राहक ने शुरू में अधिकृत (Authorize) किया था।

मर्चेंट्स और छोटे फिनटेक ऐप्स के लिए ‘लेवल प्लेइंग फील्ड’

इस समय PhonePe और Google Pay जैसे बड़े खिलाड़ी यूपीआई मार्केट के बड़े हिस्से पर काबिज हैं। अक्सर यूज़र्स सिर्फ इसलिए ऐप नहीं बदलते थे क्योंकि उनके कई जरूरी AutoPay मैंडेट्स उस खास ऐप से बंधे (Locked-in) होते थे।

इस इंटरऑपरेबिलिटी के आने से नवी (Navi), पॉप यूपीआई (POP UPI) और सुपर.मनी (super.money) जैसे नए व उभरते फिनटेक ऐप्स को भी इस क्षेत्र में मौका मिलने वाला है। इसके अलावा, मर्चेंट्स (जैसे नेटफ्लिक्स या अन्य सर्विस प्रोवाइडर्स) यदि अपना पेमेंट गेटवे (जैसे PayU से Cashfree) बदलते हैं, तो वे बिना ग्राहकों को दोबारा रजिस्ट्रेशन के लिए परेशान किए पुराने मैंडेट्स को नए गेटवे पर ट्रांसफर कर सकेंगे।

कब होगा आधिकारिक ऐलान?

इस पूरे इकोसिस्टम को इंटरऑपरेबल बनाने के लिए थर्ड-पार्टी ऐप्लिकेशन प्रोवाइडर्स (TPAPs) अपने सिस्टम में जरूरी तकनीकी बदलाव कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, NPCI अगले महीने मुंबई में आयोजित होने वाले Global Fintech Fest (GFF 2026) के दौरान इस नए इंटरऑपरेबल ऑटोपे फीचर का ऐलान कर सकता है। जुलाई 2026 में देश के शीर्ष 10 बैंकों ने करीब 1.8 अरब यूपीआई ई-मैंडेट ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए हैं, जो पिछले साल के मुकाबले तीन गुना ज्यादा हैं। ऐसे में यह नया नियम रिकरिंग पेमेंट्स की दुनिया को पूरी तरह बदल देगा।

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Ashwani Kumar

Ashwani Kumar has been the heart of Digit Hindi for nearly nine years, now serving as Senior Editor and leading the Vernac team with passion. He’s known for making complex tech simple and relatable, helping millions discover gadgets, reviews, and news in their own language. Ashwani’s approachable writing and commitment have turned Digit Hindi into a trusted tech haven for regional readers across India, bridging the gap between technology and everyday life.

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