महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में Apple और Google से कुछ राइड-हेलिंग ऐप्स हटाने की मांग की, जिसके बाद यह खबर तेजी से फैल गई कि Ola, Uber और Rapido पर राज्य में बैन लग सकता है. लेकिन असल स्थिति थोड़ी अलग है. सरकार अब पूरी तरह ऐप्स हटाने के बजाय सिर्फ बाइक टैक्सी सेवाओं को रोकने का रास्ता तलाश रही है. इसका मतलब यह है कि इन प्लेटफॉर्म्स की बाकी सेवाएं जैसे कैब और ऑटो फिलहाल जारी रह सकती हैं.
राज्य के साइबर विभाग ने पहले आईटी एक्ट के तहत Apple और Google को नोटिस भेजकर इन ऐप्स को App Store और Play Store से हटाने की मांग की थी. लेकिन बाद में अधिकारियों को एहसास हुआ कि यह कदम कानूनी तौर पर मुश्किल साबित हो सकता है. अब सरकार ऐसी रणनीति पर काम कर रही है जिससे बाइक टैक्सी ऑपरेशन बंद हो जाए, लेकिन ऐप्स पूरी तरह बंद न हों.
महाराष्ट्र में फिलहाल Ola, Uber और Rapido को कार और ऑटो रिक्शा सेवाएं देने की अनुमति है. लेकिन बाइक टैक्सी को लेकर मामला फंसा हुआ है. मार्च में ई-बाइक के लिए दिए गए अस्थायी लाइसेंस वापस ले लिए गए थे, क्योंकि कंपनियां जरूरी नियमों का पालन नहीं कर पाईं या ग्रीन नंबर प्लेट वाले वाहनों में बदलाव नहीं कर सकीं.
सरकार का कहना है कि बाइक टैक्सी सेवाएं नियमों का उल्लंघन कर रही हैं और इससे लाइसेंसधारी ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों की कमाई प्रभावित हो रही है. इसके अलावा सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है. एक हालिया हादसे का जिक्र किया गया, जिसमें मुंबई के बांद्रा इलाके में एक महिला की मौत बाइक टैक्सी से जुड़े मामले में हुई थी.
सरकार के अनुसार, ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर चल रही बाइक सेवाएं सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करतीं और यात्रियों के लिए जोखिम पैदा करती हैं.
सरकार फिलहाल बैकफुट पर दिख रही है और पूरे ऐप बैन की बजाय टारगेटेड एक्शन लेना चाहती है. यानी आने वाले समय में यह संभव है कि:
सीधा बैन लगाना जितना आसान लग रहा था, उतना है नहीं. कानूनी और तकनीकी दोनों चुनौतियां सामने आ गई हैं.
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