अगर आप भी सोचते हैं कि इंडिया टेक्नोलॉजी के मामले में अभी भी बाकी दुनिया से पीछे भाग रहा है, तो केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का यह बयान आपकी सोच बदल सकता है। Digit India के Top Appliance Awards 2026 (DITAA 2026) में बोलते हुए साइंस एंड टेक्नोलॉजी, अर्थ साइंसेज, MoS PMO, PP/DoPT, एटॉमिक एनर्जी और स्पेस मिनिस्टर जितेंद्र सिंह ने साफ कहा कि भारत अब टेक्नोलॉजी के मामले में वेट-एंड-वॉच वाली पोजीशन में नहीं है, बल्कि क्वांटम टेक्नोलॉजी, बायोटेक और स्पेस जैसे फील्ड्स में सबसे पहले उतरने वाले देशों में शामिल हो चुका है। उनकी पूरी स्पीच में एक बात बार-बार घूमकर आई, टेक्नोलॉजी तो तेजी से बदल ही रही है, लेकिन असली गेम-चेंजर हमारा माइंडसेट है।
डॉ. सिंह ने कहा कि एक समय था जब भारत डेवलप्ड कंट्रीज़ के पीछे-पीछे नई टेक्नोलॉजी अपनाता था, वो अब पीछे छूट चुका है। उन्होंने खुलकर बताया कि आज इंडिया क्वांटम टेक्नोलॉजी में सबसे शुरुआती देशों में गिना जाता है, और साथ ही स्पेस सेक्टर और बाकी रिसर्च एरियाज़ में भी काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उनका पॉइंट सिंपल था, टैलेंट तो भारत के पास हमेशा से था, बस पहले वो इकोसिस्टम नहीं था जहां वो टैलेंट अपने आइडियाज़ को असल प्रोडक्ट में बदल सके। अब वो गैप भर चुका है, और इंडियन इनोवेशन ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के बराबर खड़ा है, पीछे नहीं रहा है।
स्पीच का सबसे दिलचस्प हिस्सा तब आया जब मंत्री जी ने एक स्टूडेंट की कहानी शेयर की। यह लड़की एक छोटे और टेरर-अफेक्टेड टाउन से थी, जहां न कोई कोचिंग सेंटर, न कोई खास रिसोर्स थे। फिर भी उसने IIT-JEE क्रैक कर दिया। जब डॉ. सिंह ने पूछा कैसे मैनेज किया, तो उसने बस अपना फोन उठाया और बोली, अंकल, 14 घंटे, 8 महीने, IIT क्रैक; सब कुछ इसी में है। यानी रोज 14 घंटे और लगातार 8 महीने तक फोन के साथ पढ़ाई करके उसने यह अचीव किया। डॉ. सिंह के लिए यह सिर्फ एक इमोशनल स्टोरी नहीं, बल्कि इस बात का सबूत है कि स्मार्टफोन ने चुपचाप एजुकेशन का पूरा गेम बराबर कर दिया है। अब छोटे शहरों के बच्चे भी बड़े शहरों वालों को टक्कर दे सकते हैं।
बायोटेक्नोलॉजी पर बात करते हुए मंत्री जी ने कहा कि आने वाले सालों में यह इकोनॉमिक ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन बनने वाला है। मेडिकल साइंस, खेती और फूड इंडस्ट्री, इन सब में बायोटेक्नोलॉजी का रोल लगातार बढ़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि चौथी इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन सिर्फ AI से नहीं, बल्कि AI और बायोटेक्नोलॉजी दोनों के कॉम्बिनेशन से चलेगी, और यह शुरुआत हो भी चुकी है। इसके साथ ही उन्होंने सरकार की Bio-E3 इनिशिएटिव (Biotechnology for Economy, Employment and Environment) का भी जिक्र किया, और बताया कि कई इंडियन स्टार्टअप्स अब एनिमल-फ्री मिल्क जैसे प्रोडक्ट्स बना रहे हैं जो ग्लोबल लेवल पर अटेंशन खींच रहे हैं।
मंत्री जी ने भारत की स्पेस इकोनॉमी की ग्रोथ पर भी बात की, जो पिछले पांच-छह साल में प्राइवेट सेक्टर के लिए खुलने के बाद तेजी से बढ़ी है। उन्होंने आंकड़े शेयर किए, अभी स्पेस इकोनॉमी करीब 9 बिलियन डॉलर की है, और अगले 8-9 सालों में इसके 40 से 45 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस दौरान उन्होंने Skyroot का नाम लिया, एक ऐसा स्टार्टअप जो अपना पहला रॉकेट लॉन्च करने से लेकर सिर्फ पांच साल में यूनिकॉर्न बनने तक पहुंच गया। उनके मुताबिक, यह इस बात का सबूत है कि इंडिया का प्राइवेट स्पेस सेक्टर कितनी तेजी से मैच्योर हो रहा है।
पूरी स्पीच की समरी अगर एक लाइन में कहें तो यही था, टेक्नोलॉजी कितनी भी आगे बढ़ जाए, अगर लोग बदलने को तैयार नहीं हैं तो कोई फायदा नहीं। डॉ. सिंह ने बिल्कुल क्लियर तरीके से कहा कि भारत के पास टैलेंट है, इनोवेशन इकोसिस्टम है, साइंटिफिक कैपेबिलिटी है, बस जरूरत है तो लोगों के नए आइडियाज़ और बदलती इंडस्ट्रीज़ को खुले दिल से अपनाने की।